क्या 2032 तक दुनिया में 1 मिलियन सेमीकंडक्टर पेशेवरों की कमी होगी? भारत के लिए एक बड़ा अवसर : अश्विनी वैष्णव

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क्या 2032 तक दुनिया में 1 मिलियन सेमीकंडक्टर पेशेवरों की कमी होगी? भारत के लिए एक बड़ा अवसर : अश्विनी वैष्णव

सारांश

क्या आप जानते हैं कि 2030 तक सेमीकंडक्टर पेशेवरों की भारी कमी हो सकती है? केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के इस क्षेत्र में संभावनाओं का जिक्र किया है। जानिए कैसे भारत इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

मुख्य बातें

भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ा अवसर।
2030 तक 1 मिलियन पेशेवरों की कमी की संभावना।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत कई परियोजनाएं।
युवाओं को सशक्त बनाने का मौका।
गुजरात का महत्वपूर्ण केंद्र बनना।

नई दिल्ली, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 2030 तक दुनिया को 1 मिलियन सेमीकंडक्टर पेशेवरों की कमी का सामना करना पड़ सकता है, और भारत के पास इस कमी को पूरा करने का एक बड़ा अवसर है।

केंद्रीय मंत्री ने एक मजबूत प्रतिभा आधार विकसित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) का एक मुख्य उद्देश्य कुशल पेशेवरों की एक वैश्विक पाइपलाइन तैयार करना है।

गुजरात के साणंद में सीजी पावर की भारत की पहली एंड-टू-एंड सेमीकंडक्टर ओएसएटी पायलट लाइन सुविधा के उद्घाटन के अवसर पर मंत्री वैष्णव ने कहा कि यह पायलट लाइन सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण और डाउनस्ट्रीम क्षमताओं को विकसित करने के भारत के सपने को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण कदम है, और गुजरात इस परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने ओएसएटी पायलट लाइन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यहां निर्मित चिप्स का उपयोग ग्राहक क्वालिफिकेशन के लिए किया जाएगा। इन चिप्स की स्वीकृति के बाद, कमर्शियल प्लांट के लिए क्वालिफाइड उत्पादों का उत्पादन शुरू करना आसान हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह उद्घाटन भारत सेमीकंडक्टर मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है, जिसके तहत अब तक 10 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है।

सरकार ने 270 विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी कर उन्हें अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर डिजाइन उपकरणों से सुसज्जित किया है। 2025 में, इन उपकरणों का 1.2 करोड़ से अधिक बार उपयोग किया गया। इसके परिणामस्वरूप, 17 संस्थानों द्वारा डिजाइन की गई 20 चिप्स का सफल निर्माण सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल), मोहाली में किया गया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया के बहुत कम देशों में छात्रों को ऐसे एडवांस्ड टूल्स तक पहुंच प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत के युवाओं को सशक्त बनाएगी, तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगी और देश को सेमीकंडक्टर टैलेंट के वैश्विक हब के रूप में स्थापित करेगी।

साणंद स्थित सीजी सेमी सुविधा चिप असेंबली, पैकेजिंग, परीक्षण और पोस्ट-टेस्ट सेवा के लिए संपूर्ण समाधान प्रदान करती है, जिसमें पारंपरिक और उन्नत पैकेजिंग तकनीकें शामिल हैं।

यह भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक बाजारों की सेवा करते हुए आत्मनिर्भर बनने के देश के लक्ष्य को समर्थन देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह न केवल तकनीकी विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगा।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में सेमीकंडक्टर पेशेवरों की कमी का क्या कारण है?
भारत में सेमीकंडक्टर पेशेवरों की कमी का मुख्य कारण इस क्षेत्र में शिक्षा और प्रशिक्षण की कमी है।
भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कैसे आगे बढ़ रहा है?
भारत इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत कई परियोजनाएं शुरू कर रहा है, जिससे कुशल पेशेवरों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।
क्या भारत सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भर हो सकता है?
जी हां, भारत अपनी सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मजबूत कर रहा है और वैश्विक बाजारों की सेवा करते हुए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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