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उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर के पास बेगम बाग में 15-16 इमारतें ध्वस्त, कोर्ट स्टे हटने के बाद बुलडोजर एक्शन

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उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर के पास बेगम बाग में 15-16 इमारतें ध्वस्त, कोर्ट स्टे हटने के बाद बुलडोजर एक्शन

सारांश

उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के पास बेगम बाग में कोर्ट का स्टे हटते ही UDA ने 15-16 इमारतें ध्वस्त कर दीं। 1998 में रिहायशी लीज पर दिए गए प्लॉटों को व्यावसायिक उपयोग में बदलने और लीज नवीनीकरण न कराने के आरोप में यह कार्रवाई हुई — पहले के 72 ध्वस्तीकरणों के बाद यह दूसरा बड़ा चरण है।

मुख्य बातें

उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) ने 22 अगस्त 2026 को बेगम बाग में बुलडोजर और पोकलेन मशीनों से 15-16 इमारतें ध्वस्त कीं।
कोर्ट का स्टे ऑर्डर हटने के बाद यह कार्रवाई संभव हुई; संबंधित संपत्तियों की लीज पहले ही रद्द की जा चुकी थी।
यह पूरा क्षेत्र वर्ष 1998 में निवास के लिए लीज पर दिया गया था, लेकिन बाद में व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया गया।
इससे पहले इसी क्षेत्र में 72 इमारतें हटाई जा चुकी हैं; 23 मई 2025 को भी अभियान चला था जिसमें 3 संपत्तियाँ ध्वस्त हुई थीं।
सीएसपी संजू चौहान के अनुसार कार्रवाई के दौरान स्थिति सामान्य रही और यातायात वैकल्पिक मार्गों से संचालित किया गया।

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के समीप बेगम बाग इलाके में 22 अगस्त 2026 को उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) ने बड़ी ध्वस्तीकरण कार्रवाई को अंजाम दिया। न्यायालय का स्टे ऑर्डर हटते ही अधिकारियों ने बुलडोजर और पोकलेन मशीनों की मदद से रिहायशी प्लॉटों पर कथित तौर पर अवैध रूप से बनाई गई 15 से 16 व्यावसायिक इमारतों को जमींदोज कर दिया। यह कार्रवाई उन संपत्तियों के विरुद्ध की गई जिनकी लीज पहले ही रद्द की जा चुकी थी।

मुख्य घटनाक्रम

उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी ने बताया, 'आज उज्जैन डेवलपमेंट अथॉरिटी की लगभग 15-16 ऐसी इमारतें हैं, जिनकी लीज पहले ही रद्द की जा चुकी है। इन्हें हटाने के बाद कब्जा ले लिया जाएगा, जिससे सड़क चौड़ी करने और कुल मिलाकर विस्तारीकरण का काम आसान हो जाएगा।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इससे पहले भी इसी क्षेत्र में 72 इमारतें हटाई जा चुकी हैं।

सोनी ने आगे बताया कि सर्वे के दौरान पाया गया कि रिहायशी या व्यावसायिक उद्देश्य से आवंटित प्लॉटों पर समय के साथ लीज की शर्तों का उल्लंघन किया गया था। उल्लेखनीय है कि यह पूरा क्षेत्र वर्ष 1998 में निवास के लिए लीज पर दिया गया था, लेकिन बाद में संपत्ति-धारकों ने इसे व्यापारिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इसके अतिरिक्त, अनेक लोगों ने लीज का नवीनीकरण भी नहीं कराया।

पुलिस की भूमिका और कानून-व्यवस्था

सीएसपी संजू चौहान ने बताया कि नगर निगम की ओर से स्वयं यह कार्रवाई संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा, 'आगे बैरिकेड लगाकर लोगों को रोका जा रहा है और दूसरे रास्तों से भेजा जा रहा है। स्थिति सामान्य है, कोई परेशानी नहीं है और कार्रवाई जारी है।' सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच ध्वस्तीकरण का काम बिना किसी बड़े विवाद के आगे बढ़ा।

पिछली कार्रवाइयों का संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब 23 मई 2025 को भी इसी बेगम बाग इलाके में अतिक्रमण-विरोधी अभियान चलाया गया था। उस दौरान 28 चिह्नित संपत्तियों में से 3 को ध्वस्त किया गया था और स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था। गौरतलब है कि वर्तमान कार्रवाई उस अभियान की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है — आज एक ही दिन में 15-16 इमारतें गिराई गईं और इससे पहले के चरण में 72 इमारतें हटाई जा चुकी हैं।

आम जनता और क्षेत्र पर असर

बेगम बाग क्षेत्र महाकालेश्वर मंदिर के निकट होने के कारण व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। प्राधिकरण के अनुसार इमारतें हटने के बाद सड़क चौड़ीकरण और क्षेत्र-विस्तार की योजनाओं को गति मिलेगी, जिससे तीर्थयात्रियों और स्थानीय यातायात दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालाँकि, जिन संपत्ति-धारकों की इमारतें गिराई गई हैं, उनके पुनर्वास या मुआवजे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

आगे क्या

उज्जैन विकास प्राधिकरण के अनुसार ध्वस्तीकरण के बाद संबंधित भूमि का कब्जा प्राधिकरण को सौंपा जाएगा और सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। यह देखना होगा कि शेष चिह्नित संपत्तियों पर कार्रवाई कब और किस क्रम में होती है, तथा क्या प्रभावित पक्ष पुनः न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रभावित निवासियों के पुनर्वास पर चुप्पी चिंताजनक है। बिना पारदर्शी पुनर्वास नीति के, बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण विकास की आड़ में विस्थापन का रूप ले सकता है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन के बेगम बाग में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई क्यों हुई?
उज्जैन विकास प्राधिकरण ने उन इमारतों को गिराया जो रिहायशी लीज पर आवंटित प्लॉटों पर कथित तौर पर व्यावसायिक उपयोग के लिए बनाई गई थीं। लीज शर्तों के उल्लंघन और नवीनीकरण न कराने के कारण इन संपत्तियों की लीज पहले ही रद्द की जा चुकी थी।
22 अगस्त 2026 को कितनी इमारतें ध्वस्त की गईं?
UDA के सीईओ संदीप सोनी के अनुसार 22 अगस्त को 15 से 16 इमारतें ध्वस्त की गईं। इससे पहले के चरणों में इसी क्षेत्र में 72 इमारतें पहले ही हटाई जा चुकी थीं।
कोर्ट स्टे ऑर्डर का इस कार्रवाई से क्या संबंध है?
ध्वस्तीकरण पर पहले न्यायालय का स्टे ऑर्डर लागू था, जिसके कारण कार्रवाई रुकी हुई थी। स्टे हटते ही प्राधिकरण ने बुलडोजर और पोकलेन मशीनों से ध्वस्तीकरण शुरू किया।
क्या इससे पहले भी बेगम बाग में ऐसा अभियान चला था?
हाँ, 23 मई 2025 को भी बेगम बाग में अतिक्रमण-विरोधी अभियान चलाया गया था, जिसमें 28 चिह्नित संपत्तियों में से 3 को ध्वस्त किया गया था। उस समय स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया था।
ध्वस्तीकरण के बाद इस क्षेत्र का क्या होगा?
UDA के अनुसार इमारतें हटने के बाद ज़मीन का कब्जा प्राधिकरण को सौंपा जाएगा और सड़क चौड़ीकरण एवं क्षेत्र-विस्तार की योजनाएँ लागू की जाएंगी। इससे महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र में तीर्थयात्रियों के लिए यातायात सुगम होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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