सपा सांसद इकरा हसन पर सहारनपुर में एफआईआर, डीआईजी दफ्तर के बाहर हंगामे का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) की कैराना सांसद इकरा हसन के खिलाफ सहारनपुर के सदर बाजार पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला 19 मई 2026 को डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) कार्यालय के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें सांसद पर सड़क जाम करने, हंगामा करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने का आरोप है। इकरा हसन के अलावा सात नामजद व्यक्तियों और 25 अज्ञात लोगों पर भी विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद शामली जिले के दशले गाँव निवासी मोनू कश्यप की हत्या से जुड़ा है, जिनकी 21 अप्रैल को हत्या कर दी गई थी। पीड़ित परिवार कई हफ्तों से न्याय की माँग कर रहा था और विभिन्न अधिकारियों से गुहार लगा चुका था। इसी संदर्भ में 19 मई को इकरा हसन पीड़ित परिवार के सदस्यों और अपने समर्थकों के साथ डीआईजी कार्यालय पहुँचीं और मामले में त्वरित कार्रवाई की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हसन और उनके समर्थकों ने डीआईजी कार्यालय के बाहर मुख्य सड़क को जाम कर दिया, जिससे यातायात बाधित हुआ और आम जनता को असुविधा हुई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया। डीआईजी कार्यालय में बैठक से कोई तत्काल नतीजा न निकलने के बाद एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर सांसद को थाने ले गई। हसन ने बाद में दावा किया कि उन्हें महिला पुलिस स्टेशन में करीब दस मिनट तक हिरासत में रखा गया।
प्रदर्शन के दौरान शांति भंग के आरोप में पाँच व्यक्तियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जिनमें पूर्व राज्य मंत्री मंगूराम कश्यप के साथ-साथ अनुज, अजय, शिशपाल और तेजपाल शामिल थे। हसन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफआईआर का विवरण दिए बिना इन लोगों को चुपचाप जेल भेज दिया।
सांसद का धरना और तीखा टकराव
गिरफ्तारियों के बाद इकरा हसन ने सदर बाजार पुलिस स्टेशन के बाहर दूसरा धरना दिया और समर्थकों की तत्काल रिहाई की माँग की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह प्रदर्शन शाम करीब 4 बजे से रात 9:30 बजे तक चला। इस दौरान सांसद और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कथित तौर पर इस टकराव में हसन ने पुलिसकर्मियों को चुनौती देते हुए कहा, 'मुझे गोली मार दो! मुझे फाँसी दे दो! इससे ज़्यादा तुम और क्या कर सकते हो?'
हसन ने प्रदर्शन के दौरान यह भी कहा कि जब आम नागरिक शिकायत लेकर अधिकारियों के पास जाते हैं तो उनकी बात नहीं सुनी जाती। उन्होंने कहा, 'या तो हमें भी जेल भेज दो या हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं को रिहा करो — हम जेल जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।'
रिहाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया
उसी रात सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह पुलिस स्टेशन पहुँचे और प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि सभी गिरफ्तार व्यक्तियों को बुधवार सुबह रिहा किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद हसन ने धरना समाप्त किया। धारा 151 के तहत हिरासत में लिए गए पाँचों व्यक्तियों को अगले दिन रिहा कर दिया गया।
एफआईआर की प्रतियाँ सार्वजनिक होने के बाद जिले में सपा समर्थकों में नए सिरे से आक्रोश फैल गया। सहारनपुर के धरने के बाद सांसद उसी रात राशन संबंधी शिकायत के एक पीड़ित के साथ लखनऊ गईं और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। इसके बाद अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार को ₹2 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की।
जाँच की स्थिति
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटना की समीक्षा और सबूत जुटाने के बाद कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। अज्ञात आरोपियों की पहचान के लिए वायरल वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जाँच की जा रही है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जाँच के आगे बढ़ने पर और कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। यह मामला उत्तर प्रदेश में विपक्षी नेताओं और पुलिस प्रशासन के बीच तनाव की बढ़ती प्रवृत्ति को एक बार फिर उजागर करता है।