28 जुलाई 2026
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सीपीए जोन-2 सम्मेलन चंडीगढ़: महिपाल ढांडा बोले — 'विकसित भारत 2047' की राह में अहम पड़ाव

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सीपीए जोन-2 सम्मेलन चंडीगढ़: महिपाल ढांडा बोले — 'विकसित भारत 2047' की राह में अहम पड़ाव

सारांश

चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा के तत्वावधान में सीपीए इंडिया रीजन जोन-2 का तीन दिवसीय सम्मेलन शुरू हुआ। संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा और दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने इसे 'विकसित भारत 2047' की दिशा में निर्णायक कदम बताया।

मुख्य बातें

8 जून 2026 को चंडीगढ़ में सीपीए इंडिया रीजन जोन-2 के तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन हुआ।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में देश की विधानसभाएँ नौ जोनों में विभाजित हैं; जोन-2 में उत्तर भारत के राज्य शामिल हैं।
संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा ने सम्मेलन को 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ा।
दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यहाँ से निकले निष्कर्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करेंगे।
कुछ विधानसभाएँ पूरी तरह पेपरलेस हो चुकी हैं; सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ डिजिटल प्रथाओं के आदान-प्रदान पर जोर दिया गया।

हरियाणा विधानसभा, चंडीगढ़ में 8 जून 2026 को राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) इंडिया रीजन के जोन-2 के तीन दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। पहले दिन विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के कामकाज, तकनीकी सुधारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने के उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। हरियाणा के संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा ने इस अवसर पर कहा कि यह सम्मेलन 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

सम्मेलन की संरचना और उद्देश्य

मंत्री महिपाल ढांडा ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में देश की समस्त विधानसभाओं को नौ जोनों में विभाजित किया गया है। जोन-2 में उत्तर भारत के राज्य सम्मिलित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले दो दिनों में विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देंगे, जिससे विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों को नवीन जानकारी और व्यावहारिक सीख प्राप्त होगी।

ढांडा ने यह भी रेखांकित किया कि सम्मेलन में आगामी चुनौतियों की पहचान, उनके समाधान के रास्ते और प्रौद्योगिकी के माध्यम से शासन को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों पर केंद्रित चर्चा होगी।

विकसित भारत 2047 और विधानसभाओं की भूमिका

संसदीय कार्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि 'विकसित भारत 2047' केवल एक स्वप्न नहीं, बल्कि एक सुनिश्चित राष्ट्रीय संकल्प है। उनके अनुसार, इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विधानसभाओं का नई तकनीकों को अपनाना, नवाचार करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का मूल उद्देश्य विधानसभाओं को अधिक जनोन्मुखी, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है, ताकि विधायिका और जनता के बीच की दूरी घटे।

दिल्ली विधानसभा स्पीकर का दृष्टिकोण

दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने सम्मेलन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यहाँ से निकलने वाले निष्कर्ष 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र को मजबूत करना वास्तव में देश को मजबूत करने के समान है।' उनके अनुसार, ऐसे संवाद-आयोजन लोकतांत्रिक संस्थाओं, प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं में सुधार की दिशा प्रदान करते हैं।

डिजिटल बदलाव और सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान

स्पीकर गुप्ता ने बताया कि देश की विभिन्न विधानसभाओं में अलग-अलग कार्यप्रणालियाँ अपनाई जा रही हैं — कुछ विधानसभाएँ पूरी तरह पेपरलेस हो चुकी हैं, जबकि कुछ डिजिटल परिवर्तन की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने सुझाया कि यदि सभी विधानसभाएँ एक-दूसरे की सर्वश्रेष्ठ प्रथाएँ (बेस्ट प्रैक्टिस) अपनाएँ, तो एक समान और सुदृढ़ संसदीय व्यवस्था विकसित हो सकती है, जिससे कार्यकुशलता और पारदर्शिता दोनों में वृद्धि होगी।

गौरतलब है कि सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और परस्पर अधिगम से प्रणाली में एकरूपता और निरंतर सुधार दोनों संभव हैं। सम्मेलन के शेष दो दिनों में और अधिक विशेषज्ञ सत्र आयोजित होने की उम्मीद है, जिनके निष्कर्ष विधानसभाओं के भविष्य के कार्यसंचालन को दिशा देंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि यहाँ तय होने वाले डिजिटल और प्रक्रियागत सुधार वास्तव में विधानसभाओं के दैनिक कामकाज में कितने उतरते हैं। 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य बार-बार राजनीतिक मंचों पर उद्धृत होता है, परंतु विधायिका-स्तर पर पेपरलेस कार्यप्रणाली और पारदर्शिता के ठोस संकेतक अभी भी राज्यों में असमान हैं। जब तक सम्मेलन से निकले निष्कर्ष बाध्यकारी क्रियान्वयन ढाँचे में नहीं बदलते, ये आयोजन प्रेरणादायी तो रहेंगे, पर परिवर्तनकारी नहीं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीए इंडिया रीजन जोन-2 सम्मेलन क्या है?
यह राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) इंडिया रीजन के जोन-2 का तीन दिवसीय वार्षिक सम्मेलन है, जो 8 जून 2026 को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा विधानसभा में शुरू हुआ। इसमें उत्तर भारत के राज्यों की विधानसभाओं के विधायक, अधिकारी और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
इस सम्मेलन में किन विषयों पर चर्चा हो रही है?
सम्मेलन में विधानसभाओं के कामकाज, तकनीकी सुधार, पेपरलेस कार्यप्रणाली, प्रशासनिक आधुनिकीकरण और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने पर केंद्रित चर्चा हो रही है। विशेषज्ञ विभिन्न राज्यों की सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान भी करेंगे।
महिपाल ढांडा ने सम्मेलन के बारे में क्या कहा?
हरियाणा के संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि 'विकसित भारत 2047' केवल एक सपना नहीं बल्कि राष्ट्रीय संकल्प है, और इसे पाने के लिए विधानसभाओं को नई तकनीक अपनानी होगी। उन्होंने सम्मेलन को इस लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने क्या कहा?
स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इस सम्मेलन के निष्कर्ष 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करना देश को मजबूत करने के समान है।
देश की विधानसभाएँ जोनों में कैसे विभाजित हैं?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में देश की सभी विधानसभाओं को नौ जोनों में विभाजित किया गया है। जोन-2 में उत्तर भारत के राज्य शामिल हैं और इसी जोन का सम्मेलन चंडीगढ़ में आयोजित हो रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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