सीपीए जोन-2 सम्मेलन चंडीगढ़: महिपाल ढांडा बोले — 'विकसित भारत 2047' की राह में अहम पड़ाव
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा विधानसभा, चंडीगढ़ में 8 जून 2026 को राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) इंडिया रीजन के जोन-2 के तीन दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। पहले दिन विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के कामकाज, तकनीकी सुधारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने के उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। हरियाणा के संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा ने इस अवसर पर कहा कि यह सम्मेलन 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।
सम्मेलन की संरचना और उद्देश्य
मंत्री महिपाल ढांडा ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में देश की समस्त विधानसभाओं को नौ जोनों में विभाजित किया गया है। जोन-2 में उत्तर भारत के राज्य सम्मिलित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले दो दिनों में विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देंगे, जिससे विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों को नवीन जानकारी और व्यावहारिक सीख प्राप्त होगी।
ढांडा ने यह भी रेखांकित किया कि सम्मेलन में आगामी चुनौतियों की पहचान, उनके समाधान के रास्ते और प्रौद्योगिकी के माध्यम से शासन को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों पर केंद्रित चर्चा होगी।
विकसित भारत 2047 और विधानसभाओं की भूमिका
संसदीय कार्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि 'विकसित भारत 2047' केवल एक स्वप्न नहीं, बल्कि एक सुनिश्चित राष्ट्रीय संकल्प है। उनके अनुसार, इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विधानसभाओं का नई तकनीकों को अपनाना, नवाचार करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का मूल उद्देश्य विधानसभाओं को अधिक जनोन्मुखी, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है, ताकि विधायिका और जनता के बीच की दूरी घटे।
दिल्ली विधानसभा स्पीकर का दृष्टिकोण
दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने सम्मेलन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यहाँ से निकलने वाले निष्कर्ष 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र को मजबूत करना वास्तव में देश को मजबूत करने के समान है।' उनके अनुसार, ऐसे संवाद-आयोजन लोकतांत्रिक संस्थाओं, प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं में सुधार की दिशा प्रदान करते हैं।
डिजिटल बदलाव और सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान
स्पीकर गुप्ता ने बताया कि देश की विभिन्न विधानसभाओं में अलग-अलग कार्यप्रणालियाँ अपनाई जा रही हैं — कुछ विधानसभाएँ पूरी तरह पेपरलेस हो चुकी हैं, जबकि कुछ डिजिटल परिवर्तन की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने सुझाया कि यदि सभी विधानसभाएँ एक-दूसरे की सर्वश्रेष्ठ प्रथाएँ (बेस्ट प्रैक्टिस) अपनाएँ, तो एक समान और सुदृढ़ संसदीय व्यवस्था विकसित हो सकती है, जिससे कार्यकुशलता और पारदर्शिता दोनों में वृद्धि होगी।
गौरतलब है कि सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और परस्पर अधिगम से प्रणाली में एकरूपता और निरंतर सुधार दोनों संभव हैं। सम्मेलन के शेष दो दिनों में और अधिक विशेषज्ञ सत्र आयोजित होने की उम्मीद है, जिनके निष्कर्ष विधानसभाओं के भविष्य के कार्यसंचालन को दिशा देंगे।