पीयूष गोयल: व्यापक आर्थिक स्थिरता और इन्फ्रास्ट्रक्चर से 2047 तक बनेगा विकसित भारत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 22 सितंबर 2026 को कहा कि व्यापक आर्थिक स्थिरता, इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार और लक्षित समाज कल्याण योजनाओं के बल पर भारत 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में सक्षम होगा। उन्होंने यह बात आनंद राठी कॉन्फ्रेंस, जी-200 समिट 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए कही।
तीन मुख्य एजेंडे पर ज़ोर
मंत्री गोयल ने स्पष्ट किया कि सरकार की रणनीति तीन केंद्रीय स्तंभों पर टिकी है। उन्होंने कहा, 'भारत 2047 तक विकसित बनने के लिए मज़बूत आधार बना रहा है और यह तीन मुख्य एजेंडे पर केंद्रित है, जिसमें व्यापक आर्थिक स्थिरता, इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार और लक्षित समाज कल्याण योजनाएं शामिल हैं।' उनके अनुसार व्यापार, मैन्युफैक्चरिंग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के बल पर भारत वैश्विक आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बना हुआ है।
वैश्विक विकास में भारत की हिस्सेदारी
गोयल ने रेखांकित किया कि दुनिया की कुल आर्थिक वृद्धि में भारत की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक कूटनीति का उल्लेख करते हुए कहा, 'भविष्य उन्हीं लोगों का है, जिन्हें साझेदारी बनाना आता है। प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी दुनिया के साथ साझेदारी बनाई है, जिसमें दक्षिण के देशों के साथ विकसित देश भी शामिल हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत की विदेश नीति में द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश की जा रही है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर में ₹12 लाख करोड़ का सालाना निवेश
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार हर साल निजी क्षेत्र के साथ मिलकर ₹12 लाख करोड़ का इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश कर रही है। इस निवेश के दायरे में पोर्ट, एक्सप्रेसवे, वाटरवे और रेलवे शामिल हैं। गौरतलब है कि बीते एक दशक में भारत के पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और सरकार इसे आर्थिक विकास का मुख्य चालक मानती है।
मुक्त व्यापार समझौतों का विस्तार
गोयल ने बताया कि बीते चार वर्षों में हुए नौ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से भारतीय कारोबारियों को 38 देशों की 60 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्थाओं तक तरजीही पहुंच मिली है। इसके अलावा सरकार आठ और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर चर्चा कर रही है, जिनसे अतिरिक्त 15 ट्रिलियन डॉलर के बाज़ारों तक पहुंच मिल सकती है। यह विस्तार भारत की 'व्यापार-नेतृत्व वाली वृद्धि' की नीति का हिस्सा है, जो 2014 के बाद से लगातार आगे बढ़ाई जा रही है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा जब नीतिगत घोषणाएं ज़मीनी क्रियान्वयन में तब्दील हों और रोज़गार सृजन तथा आय वृद्धि के ठोस संकेतक सामने आएं। गोयल के बयान से स्पष्ट है कि सरकार आर्थिक कूटनीति और घरेलू बुनियादी ढांचे को एक साथ साधते हुए 2047 के विज़न को आकार देने की कोशिश में है।