2 सितंबर 2026
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विश्व बैंक प्रमुख अजय बंगा बोले — भारत की विकास दर 8% के पार जाने की क्षमता, सड़क-डिजिटाइजेशन में बेहतरीन काम

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विश्व बैंक प्रमुख अजय बंगा बोले — भारत की विकास दर 8% के पार जाने की क्षमता, सड़क-डिजिटाइजेशन में बेहतरीन काम

सारांश

विश्व बैंक प्रमुख अजय बंगा ने एशविले में जी20 बैठक के दौरान कहा कि भारत की विकास दर 8% से आगे जाने की क्षमता है। वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 7.8% की वृद्धि को मज़बूत बताते हुए उन्होंने स्किलिंग और शिक्षा सुधार को अगली बड़ी ज़रूरत करार दिया।

मुख्य बातें

विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा ने 2 सितंबर 2026 को एशविले में कहा कि भारत की विकास दर 8 प्रतिशत से आगे जाने की क्षमता है।
भारत ने वैश्विक अस्थिरता के बीच वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की।
बंगा ने सड़क, एयरपोर्ट, बिजली, पानी और डिजिटाइजेशन में भारत के प्रदर्शन की सराहना की।
रोज़गार सृजन के लिए उन्होंने भौतिक व मानव बुनियादी ढाँचा , नियामक सुधार और निजी पूँजी को तीन प्रमुख स्तंभ बताया।
उन्होंने शिक्षा, स्किलिंग और स्वास्थ्य सेवा में और अधिक सुधार की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने 2 सितंबर 2026 को एशविले में जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के साइडलाइन पर दिए गए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि भारत में अर्थव्यवस्था की विकास दर को मौजूदा 7-8 प्रतिशत के स्तर से भी आगे ले जाने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत सड़क, एयरपोर्ट और डिजिटाइजेशन जैसे बुनियादी ढाँचे के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है।

भारत की वृद्धि दर पर बंगा का आकलन

बंगा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने वैश्विक अस्थिरता के बीच वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की है। उन्होंने कहा, "भारत अब लगातार 7 से 8 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल कर रहा है, जो काफी अच्छा है और मुझे लगता है कि इससे भी आगे जाने का मौका है।"

गौरतलब है कि यह आँकड़ा उन प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत को शीर्ष पर रखता है जिन्होंने वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बावजूद स्थिर गति बनाए रखी है।

सेवा क्षेत्र और निर्यात की भूमिका

विश्व बैंक प्रमुख ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर के पीछे सेवा क्षेत्र और निर्यात में हुई बढ़ोतरी को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा, "उस 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर में सर्विस सेक्टर और निर्यात दोनों में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। निवेश का स्तर भी बना हुआ है। इस कारण मुझे लगता है कि भारत ने बहुत मज़बूत प्रदर्शन किया है।"

बंगा ने यह भी रेखांकित किया कि देश में लगातार हो रहे निवेश ने इस वृद्धि को टिकाऊ बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

रोज़गार सृजन की तीन प्राथमिकताएँ

बंगा ने रोज़गार पैदा करने के लिए तीन आवश्यक स्तंभों की पहचान की — भौतिक और मानव बुनियादी ढाँचा, नियामक सुधार और निजी पूँजी को आकर्षित करना। उन्होंने स्पष्ट किया कि ध्यान केवल एक तिमाही के आँकड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इस वृद्धि को युवाओं के लिए वास्तविक अवसरों में बदलना होगा।

उन्होंने कहा, "भारत के पास प्राइवेट सेक्टर के निवेश और नौकरियों में बढ़ोतरी के ज़रिए आगे बढ़ने का बहुत अच्छा मौका है। आपको इन सभी चीज़ों को युवाओं के लिए मौकों, उम्मीदों और आकांक्षाओं में बदलना होगा।"

बुनियादी ढाँचे में सराहना, शिक्षा-स्वास्थ्य में सुधार की दरकार

बंगा ने स्वीकार किया कि भारत सड़कें, पुल, एयरपोर्ट, बिजली, पानी और डिजिटाइजेशन के क्षेत्र में काफी अच्छा काम कर रहा है। हालाँकि, उन्होंने शिक्षा, स्किलिंग और स्वास्थ्य सेवा में और अधिक प्रगति की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि भारत में पूरे स्किलिंग और शिक्षा सिस्टम को इस तरह से बेहतर बनाने की ज़रूरत है कि वे भविष्य में मिलने वाली नौकरियों और प्राइवेट सेक्टर की ज़रूरतों के हिसाब से हों।"

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार बुनियादी ढाँचे पर पूँजीगत व्यय बढ़ाने और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने में जुटी है। बंगा के बयान से भारत की आर्थिक दिशा को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलता दिख रहा है, लेकिन स्किलिंग और रोज़गार-सृजन की चुनौती अभी भी केंद्र में बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 7.8% की वृद्धि का फल आम भारतीय युवा तक कितना पहुँच रहा है — जबकि बेरोज़गारी दर और औपचारिक क्षेत्र में नौकरियों की कमी एक स्थायी चिंता बनी हुई है। बंगा ने खुद स्किलिंग और शिक्षा को कमज़ोर कड़ी माना, जो यह संकेत देता है कि उच्च GDP वृद्धि और समावेशी रोज़गार के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई। डिजिटाइजेशन और बुनियादी ढाँचे में निवेश की तारीफ उचित है, लेकिन जब तक स्किलिंग इकोसिस्टम निजी क्षेत्र की माँग से नहीं जुड़ता, तब तक 8% से आगे की वृद्धि एक संभावना ही बनी रहेगी — उपलब्धि नहीं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व बैंक प्रमुख अजय बंगा ने भारत की विकास दर के बारे में क्या कहा?
अजय बंगा ने कहा कि भारत में अर्थव्यवस्था की विकास दर को मौजूदा 7-8 प्रतिशत के स्तर से भी आगे ले जाने की क्षमता है। उन्होंने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि को भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती का प्रमाण बताया।
भारत ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कितनी विकास दर हासिल की?
भारत ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की। बंगा के अनुसार इस वृद्धि में सेवा क्षेत्र, निर्यात और निरंतर निवेश का अहम योगदान रहा।
बंगा ने भारत में रोज़गार सृजन के लिए किन क्षेत्रों को प्राथमिकता बताई?
बंगा ने रोज़गार पैदा करने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की — भौतिक और मानव बुनियादी ढाँचा, नियामक सुधार और निजी पूँजी को आकर्षित करना। उन्होंने यह भी कहा कि स्किलिंग और शिक्षा को निजी क्षेत्र की ज़रूरतों के अनुरूप बनाना ज़रूरी है।
विश्व बैंक ने भारत के किन क्षेत्रों की तारीफ की और किन में सुधार की बात कही?
बंगा ने सड़क, पुल, एयरपोर्ट, बिजली, पानी और डिजिटाइजेशन में भारत के काम की सराहना की। हालाँकि, उन्होंने शिक्षा, स्किलिंग और स्वास्थ्य सेवा में और अधिक प्रगति की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
अजय बंगा का यह बयान कहाँ और किस अवसर पर आया?
यह बयान 2 सितंबर 2026 को एशविले में जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के साइडलाइन पर दिए गए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में सामने आया। बंगा उस समय विश्व बैंक के अध्यक्ष के रूप में बैठक में भाग ले रहे थे।
राष्ट्र प्रेस
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