चंडीगढ़ में 24 घंटे में दूसरी इमारत ढही, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में मलबे में लोग फंसे होने की आशंका
सारांश
मुख्य बातें
चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में शनिवार, 4 जुलाई को एक पुरानी इमारत का हिस्सा ढह गया, जिसमें कुछ लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। यह शहर में महज 24 घंटों के भीतर इमारत गिरने की दूसरी घटना है, जिसने चंडीगढ़ के औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में दशकों पुरानी इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
घटनाक्रम और राहत-बचाव अभियान
अधिकारियों के अनुसार, जिस इमारत का हिस्सा ढहा, उसका उपयोग एक स्क्रैप डीलर (कबाड़ कारोबारी) करता था। भूतल पर कबाड़ का सामान रखा जाता था, जबकि ऊपरी मंजिलें कई वर्षों से खाली बताई जा रही हैं। घटना की सूचना मिलते ही दमकल, पुलिस और नगर निगम की टीमें मौके पर पहुँच गईं। भारी मशीनों की सहायता से मलबा हटाने का काम जारी है और स्निफर डॉग्स की मदद से मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। बचाए गए लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा देने के लिए मौके पर एंबुलेंस तैनात हैं।
इमारत की स्थिति और प्रशासनिक चूक
शुरुआती जाँच में माना जा रहा है कि इमारत अत्यंत पुरानी थी और यही इस हादसे का मुख्य कारण बना। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में हाल के दिनों में भारी बारिश नहीं हुई थी, जिससे संरचनात्मक कमज़ोरी और भी स्पष्ट हो जाती है। उल्लेखनीय है कि यह इमारत हाल के किसी संरचनात्मक सुरक्षा निरीक्षण के दायरे में नहीं थी, क्योंकि प्रशासन का ध्यान फिलहाल सरकारी भवनों और शैक्षणिक संस्थानों के निरीक्षण पर केंद्रित था।
एक दिन पहले सीसीईटी ऑडिटोरियम की छत भी ढही थी
इससे ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (CCET) के सेक्टर-26 स्थित ऑडिटोरियम की छत ढह गई थी। उस समय ऑडिटोरियम खाली था, इसलिए कोई जनहानि नहीं हुई। यह ऑडिटोरियम चुनावों के दौरान मतगणना केंद्र के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इंजीनियरिंग विभाग पहले ही इस भवन को असुरक्षित घोषित कर चुका था और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) से तकनीकी राय माँगने के बाद इसे गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
पुरानी इमारतों पर बढ़ती चिंता
स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का कहना है कि चंडीगढ़ के औद्योगिक व व्यावसायिक क्षेत्रों में अनेक पुरानी इमारतों का समय-समय पर संरचनात्मक सुरक्षा परीक्षण नहीं कराया गया है, जिससे ऐसे हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है। 24 घंटों में दो घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि शहर में इमारतों की सुरक्षा जाँच की व्यवस्था में गंभीर खामियाँ हैं।
आगे क्या
फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान जारी है और प्रशासन मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटा हुआ है। इन घटनाओं के बाद उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन निजी और औद्योगिक इमारतों के संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट को भी प्राथमिकता देगा।