चांदी रिफाइनरी में ₹15 लाख की ठगी, अंतरराज्यीय गिरोह के 5 सदस्य गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- महाकाली पुलिस ने हैदराबाद में चांदी रिफाइनरी ठगी के अंतरराज्यीय गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया।
- पीड़ित हीरालाल वर्मा को 6,350 ग्राम नकली चांदी के बदले करीब ₹15 लाख का नुकसान हुआ।
- गिरोह के मुखिया हृदेश कुमार का 2021 में मध्य प्रदेश में पहले से आपराधिक रिकॉर्ड था।
- गिरोह ने MP, ओडिशा, दिल्ली और UP सहित कई राज्यों में ठगी की वारदातें अंजाम दीं।
- हृदेश कुमार के पास से 8.4 किलो चांदी और ₹1.5 लाख नकद बरामद किया गया।
- पुलिस गिरोह के शेष सदस्यों की तलाश में अन्य राज्यों में छापेमारी जारी रखे हुए है।
हैदराबाद में चांदी की रिफाइनरी को निशाना बनाकर ₹15 लाख की ठगी करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का महाकाली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। 20 अप्रैल 2026 को शुरू हुई गिरफ्तारी में पुलिस ने उत्तर प्रदेश के आगरा, इटावा और मध्य प्रदेश से गिरोह के पांच सदस्यों को दबोचा। यह गिरोह नकली चांदी के सिल्ले देकर असली चांदी हड़पने का खेल कई राज्यों में खेल चुका है।
क्या है पूरा मामला
सिकंदराबाद की महाकाली स्ट्रीट पर श्री जगदंबा इंडस्ट्रीज नाम से चांदी की रिफाइनरी चलाने वाले हीरालाल वर्मा के साथ यह ठगी हुई। 20 मार्च 2026 को शाम करीब साढ़े चार बजे उनके पुराने ग्राहक राजेश एक अन्य व्यक्ति के साथ दुकान पर आए। वे तीन कच्ची चांदी के सिल्ले लेकर आए और हैदराबाद के चारकमान स्थित दुर्गा बुलियन रिफाइनरी की शुद्धता परीक्षण रिपोर्ट भी दिखाई।
पुराने परिचय और भरोसे के चलते हीरालाल वर्मा ने बिना जांच किए आरोपियों को 60 प्रतिशत शुद्धता के बराबर 25 छोटे चांदी के सिल्ले दे दिए, जिनका कुल वजन करीब 6,350 ग्राम था। जब बाद में बाजार में उन सिल्लों की जांच कराई गई तो चौंकाने वाला सच सामने आया — उनमें चांदी की मात्रा शून्य थी। इस धोखाधड़ी में हीरालाल को करीब ₹15 लाख का नुकसान हुआ।
तीन थानों में दर्ज हुए मामले
इसी तरह के दो और मामले सामने आए — एक महाकाली पुलिस स्टेशन में और दूसरा मार्केट पुलिस स्टेशन में। इन मामलों में भी शिकायतकर्ताओं को 6 किलो से अधिक चांदी के बराबर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। तीनों मामलों में एक ही गिरोह का हाथ पाया गया।
गिरोह का चालाक तरीका
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। गिरोह के मुखिया हृदेश कुमार समेत पांच सदस्य हैं, जिनमें तीन आगरा (उत्तर प्रदेश), एक इटावा और एक मध्य प्रदेश के हैं। ये सभी आपस में रिश्तेदार या करीबी दोस्त हैं।
गिरोह की कार्यशैली तीन चरणों में होती थी। पहले दो बार वे व्यापारियों को 60 प्रतिशत शुद्धता वाली असली चांदी देकर विश्वास जीतते थे। तीसरी बार नकली शुद्धता रिपोर्ट दिखाकर शून्य शुद्धता वाले नकली सिल्ले थमा देते और बदले में असली चांदी ले जाते। यही पैटर्न उन्होंने मध्य प्रदेश, ओडिशा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भी अपनाया।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने 20 अप्रैल 2026 को हृदेश कुमार को आगरा से गिरफ्तार किया। अगले दिन सुशील कुमार वर्मा, प्रिंस उर्फ लड्डू सोनी और राजीव जैन को आगरा और इटावा से पकड़ा गया। सोनू कुशवाहा को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। सभी के खिलाफ ट्रांजिट वारंट लिया गया।
हृदेश कुमार के पास से 8 किलो 400 ग्राम चांदी, ₹1.5 लाख नकद और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। शेष आरोपियों से भी मोबाइल फोन जब्त किए गए। उल्लेखनीय है कि हृदेश कुमार का वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश के अशोक नगर पुलिस स्टेशन में भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज था।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
यह सफल कार्रवाई महाकाली पुलिस टीम ने अतिरिक्त उपायुक्त जे. नरसैया, सहायक आयुक्त सी.एच. श्रीधर और एस. रवि कुमार के नेतृत्व में अंजाम दी। पुलिस के अनुसार गिरोह के शेष सदस्यों की तलाश जारी है और अन्य राज्यों में भी छापेमारी की जा रही है।
यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि संगठित ठगी के गिरोह किस तरह व्यापारियों के भरोसे का फायदा उठाते हैं। चांदी-सोने के व्यापारियों को सतर्क रहने और किसी भी लेन-देन से पहले स्वतंत्र प्रयोगशाला में शुद्धता की जांच कराने की सलाह दी जाती है। आने वाले दिनों में पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय कर इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश करेगी।