ऐतिहासिक दौरा: रूसी स्टेट ड्यूमा स्पीकर वोलोडिन प्योंगयांग पहुंचे, शहीद उत्तर कोरियाई सैनिकों के स्मारक का होगा उद्घाटन
सारांश
Key Takeaways
- रूसी स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन 25 अप्रैल को प्योंगयांग पहुंचे, यह यात्रा राष्ट्रपति पुतिन के निर्देश पर हुई।
- प्योंगयांग में 'विदेशी सैन्य अभियानों में युद्ध कारनामों का स्मारक संग्रहालय' का उद्घाटन होने जा रहा है।
- जून 2024 में रूस-उत्तर कोरिया रणनीतिक संधि के बाद लगभग 15,000 उत्तर कोरियाई सैनिक रूस भेजे गए थे।
- कुर्स्क अभियान में उत्तर कोरियाई सैनिकों की भूमिका को अब आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया जा रहा है।
- उत्तर कोरिया के सर्वोच्च जनसभा अध्यक्ष जो योंग-वोन ने वोलोडिन का प्योंगयांग में स्वागत किया।
- दोनों देशों के आंतरिक सुरक्षा मंत्रियों के बीच इसी सप्ताह कानून प्रवर्तन सहयोग पर बैठक भी हुई।
प्योंगयांग, 25 अप्रैल। रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन शुक्रवार को उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग पहुंचे। वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निर्देश पर इस कार्यकारी यात्रा पर आए हैं और यूक्रेन युद्ध में रूस की तरफ से लड़ते हुए प्राण न्योछावर करने वाले उत्तर कोरियाई सैनिकों की स्मृति में बनाए गए एक विशेष संग्रहालय के उद्घाटन समारोह में भाग लेंगे।
स्मारक संग्रहालय का उद्घाटन — क्या है इसका महत्व?
उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में 'विदेशी सैन्य अभियानों में युद्ध कारनामों का स्मारक संग्रहालय' का उद्घाटन होने जा रहा है। यह संग्रहालय उन उत्तर कोरियाई सैनिकों को समर्पित है जो रूस के कुर्स्क क्षेत्र की मुक्ति अभियान में शामिल होकर अपनी जान गंवा बैठे।
रूसी समाचार एजेंसी तास ने ड्यूमा प्रेस सेवा के हवाले से पुष्टि की है कि वोलोडिन इस स्मारक परिसर के उद्घाटन के साथ-साथ उत्तर कोरियाई संसद (सर्वोच्च जनसभा) के प्रतिनिधियों से भी द्विपक्षीय बैठक करेंगे। उत्तर कोरिया की सर्वोच्च जनसभा के अध्यक्ष जो योंग-वोन ने प्योंगयांग हवाई अड्डे पर उनका औपचारिक स्वागत किया।
रूस-उत्तर कोरिया सैन्य साझेदारी की पृष्ठभूमि
जून 2024 में उत्तर कोरियाई सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक ऐतिहासिक रणनीतिक साझेदारी संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके बाद उत्तर कोरिया ने रूस की सहायता के लिए अनुमानित 15,000 सैनिक भेजे थे।
इन सैनिकों ने कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेनी बलों के विरुद्ध अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। 26 अप्रैल 2024 को रूस ने दावा किया था कि कुर्स्क क्षेत्र को यूक्रेनी कब्जे से मुक्त करा लिया गया है — इसमें उत्तर कोरियाई सैनिकों के योगदान को रूस ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था।
गौरतलब है कि यह संग्रहालय उस समय खुल रहा है जब रूस-उत्तर कोरिया संबंध अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर हैं और दोनों देश पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद अपने सैन्य व कूटनीतिक सहयोग को लगातार गहरा कर रहे हैं।
कानून प्रवर्तन सहयोग पर भी बनी बात
इसी सप्ताह बुधवार को उत्तर कोरिया के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री पांग तू-सोप और रूस के आंतरिक मंत्री व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कानून प्रवर्तन और आंतरिक सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
यह बैठक इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि दोनों देशों के बीच संबंध अब केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि आंतरिक प्रशासन और पुलिस सहयोग के स्तर तक भी विस्तृत हो रहे हैं।
व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ और विश्लेषण
विश्लेषकों के अनुसार, प्योंगयांग में इस संग्रहालय का उद्घाटन महज एक स्मारक कार्यक्रम नहीं है — यह उत्तर कोरिया का एक सुविचारित संदेश है कि वह अपने सैनिकों की विदेशी धरती पर मौजूदगी को अब आधिकारिक रूप से स्वीकार कर रहा है। इससे पहले प्योंगयांग ऐसी किसी तैनाती को सार्वजनिक रूप से मानने से परहेज करता था।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और पश्चिमी देश उत्तर कोरिया की रूस को सैन्य सहायता की कड़ी निंदा कर रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है, लेकिन दोनों देश इन आपत्तियों को दरकिनार कर अपने संबंध प्रगाढ़ करते जा रहे हैं।
आने वाले हफ्तों में वोलोडिन की इस यात्रा के परिणामस्वरूप रूस-उत्तर कोरिया के बीच और नई द्विपक्षीय संधियों और सहयोग समझौतों की घोषणा हो सकती है, जो वैश्विक सुरक्षा समीकरणों को और जटिल बना सकती है।