एटा में 24,900 क्विंटल मक्का की मालगाड़ी बिना 9आर रसीद पकड़ी, मंडी शुल्क चोरी में तीन व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में 16 जुलाई को जिला प्रशासन ने रेलवे स्टेशन पर छापेमारी के दौरान 24,900 क्विंटल मक्का से लदी एक मालगाड़ी को बिना अनिवार्य 9आर मंडी रसीद के पाया, जिससे मंडी शुल्क और सेस की बड़े पैमाने पर चोरी की आशंका जताई गई है। प्रारंभिक जांच के आधार पर तीन व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं और उन पर भारी शमन शुल्क, मंडी शुल्क एवं सेस वसूलने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
कैसे हुआ खुलासा
जिलाधिकारी रवींद्र सिंह ने बताया कि कुछ दिन पूर्व जिला प्रशासन ने खाद और उर्वरकों की आपूर्ति श्रृंखला — विशेषकर इफको और कृभको से रेलवे स्टेशन तथा वहाँ से वेयरहाउस तक पहुँचने की प्रक्रिया — को समझने के लिए एक विशेष अभियान चलाया था। इसी दौरान मंडी से खाद्यान्न की खरीद और परिवहन को लेकर कुछ सूचनाएँ प्राप्त हुईं, जिनके आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम को रेलवे स्टेशन भेजा गया।
जांच दल में एडीएम (ई) — जो मंडी समिति के अध्यक्ष भी हैं — डिप्टी कलेक्टर विपिन कुमार और तहसीलदार सदर शामिल थे। टीम ने रेलवे रैक की जांच में पाया कि कुल 42 वैगन बुक किए गए थे, जिनमें से 40 वैगनों में मक्का लादी जा चुकी थी, जबकि दो वैगन तकनीकी खराबी के कारण खाली रह गए थे।
क्या है 9आर रसीद और क्यों है अनिवार्य
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, मंडी से कोई भी कृषि उपज बाहर भेजने से पूर्व 9आर मंडी रसीद काटना अनिवार्य है। यह रसीद मंडी शुल्क और अन्य देयों के भुगतान का प्रमाण होती है। जांच में सामने आया कि व्यापारियों ने 24,900 क्विंटल मक्का का परिवहन करते समय यह रसीद नहीं काटी, जिससे नियमानुसार देय 1 प्रतिशत मंडी शुल्क का भुगतान नहीं किया गया।
गौरतलब है कि रेलवे का आरआर (रेलवे रसीद) पहले ही जारी हो चुका था, जिसके कारण माल कानूनी रूप से रेलवे की संपत्ति माना जा रहा था। माल को जब्त करने की कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रशासन ने प्रयागराज मंडल के सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर से बातचीत की। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि माल उतारने में लगभग एक दिन का समय लगेगा और ट्रेन रोकना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा। इसे देखते हुए प्रशासन ने माल जब्त करने के बजाय व्यापारियों पर भारी कंपाउंडिंग पेनाल्टी लगाने का निर्णय लिया।
व्यापारियों पर कार्रवाई
जिलाधिकारी रवींद्र सिंह के अनुसार, प्रथम दृष्टया इस मामले में तीन व्यापारी संलिप्त पाए गए हैं। उनके लाइसेंस निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं और निर्धारित मंडी शुल्क के साथ-साथ जुर्माना भी वसूला जा रहा है। इसके अतिरिक्त, यह भी जांचा जाएगा कि पूर्व में भी इन्हीं व्यापारियों द्वारा बिना 9आर रसीद के माल भेजा गया है या नहीं — यदि ऐसा पाया गया तो उन मामलों में भी शमन शुल्क, मंडी शुल्क और सेस वसूला जाएगा।
मंडी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जांच केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगी। यदि मंडी समिति या किसी अन्य संस्थागत स्तर पर किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
भविष्य की रोकथाम के उपाय
प्रशासन ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए रेलवे के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्णय लिया है। योजना यह है कि जब भी किसी मालगाड़ी का आरआर जारी हो, रेलवे उसी समय जिला प्रशासन को यह भी सूचित करे कि संबंधित माल का 9आर मंडी दस्तावेज जारी हुआ है या नहीं। इस व्यवस्था के लागू होने से मंडी शुल्क चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।