16 जुलाई 2026
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एटा में 24,900 क्विंटल मक्का की मालगाड़ी बिना 9आर रसीद पकड़ी, मंडी शुल्क चोरी में तीन व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त

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एटा में 24,900 क्विंटल मक्का की मालगाड़ी बिना 9आर रसीद पकड़ी, मंडी शुल्क चोरी में तीन व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त

सारांश

एटा जिला प्रशासन की रेलवे स्टेशन पर छापेमारी में 24,900 क्विंटल मक्का की मालगाड़ी बिना अनिवार्य 9आर मंडी रसीद के पकड़ी गई। मंडी शुल्क चोरी की आशंका में तीन व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त, भारी जुर्माना और रेलवे-प्रशासन समन्वय का नया तंत्र विकसित करने की तैयारी।

मुख्य बातें

एटा रेलवे स्टेशन पर 16 जुलाई को जांच में 24,900 क्विंटल मक्का से लदी मालगाड़ी बिना 9आर मंडी रसीद के पकड़ी गई।
कुल 42 वैगन बुक थे, जिनमें से 40 वैगनों में मक्का लादी जा चुकी थी।
नियमानुसार देय 1 प्रतिशत मंडी शुल्क का भुगतान नहीं किया गया था।
प्रथम दृष्टया संलिप्त तीन व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त; शमन शुल्क, मंडी शुल्क और सेस वसूली की प्रक्रिया शुरू।
पूर्व के लेनदेन की भी जांच होगी; मंडी अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई होगी।
भविष्य में रोकथाम के लिए रेलवे-प्रशासन के बीच आरआर-9आर समन्वय तंत्र विकसित करने की योजना।

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में 16 जुलाई को जिला प्रशासन ने रेलवे स्टेशन पर छापेमारी के दौरान 24,900 क्विंटल मक्का से लदी एक मालगाड़ी को बिना अनिवार्य 9आर मंडी रसीद के पाया, जिससे मंडी शुल्क और सेस की बड़े पैमाने पर चोरी की आशंका जताई गई है। प्रारंभिक जांच के आधार पर तीन व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं और उन पर भारी शमन शुल्क, मंडी शुल्क एवं सेस वसूलने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

कैसे हुआ खुलासा

जिलाधिकारी रवींद्र सिंह ने बताया कि कुछ दिन पूर्व जिला प्रशासन ने खाद और उर्वरकों की आपूर्ति श्रृंखला — विशेषकर इफको और कृभको से रेलवे स्टेशन तथा वहाँ से वेयरहाउस तक पहुँचने की प्रक्रिया — को समझने के लिए एक विशेष अभियान चलाया था। इसी दौरान मंडी से खाद्यान्न की खरीद और परिवहन को लेकर कुछ सूचनाएँ प्राप्त हुईं, जिनके आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम को रेलवे स्टेशन भेजा गया।

जांच दल में एडीएम (ई) — जो मंडी समिति के अध्यक्ष भी हैं — डिप्टी कलेक्टर विपिन कुमार और तहसीलदार सदर शामिल थे। टीम ने रेलवे रैक की जांच में पाया कि कुल 42 वैगन बुक किए गए थे, जिनमें से 40 वैगनों में मक्का लादी जा चुकी थी, जबकि दो वैगन तकनीकी खराबी के कारण खाली रह गए थे।

क्या है 9आर रसीद और क्यों है अनिवार्य

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, मंडी से कोई भी कृषि उपज बाहर भेजने से पूर्व 9आर मंडी रसीद काटना अनिवार्य है। यह रसीद मंडी शुल्क और अन्य देयों के भुगतान का प्रमाण होती है। जांच में सामने आया कि व्यापारियों ने 24,900 क्विंटल मक्का का परिवहन करते समय यह रसीद नहीं काटी, जिससे नियमानुसार देय 1 प्रतिशत मंडी शुल्क का भुगतान नहीं किया गया।

गौरतलब है कि रेलवे का आरआर (रेलवे रसीद) पहले ही जारी हो चुका था, जिसके कारण माल कानूनी रूप से रेलवे की संपत्ति माना जा रहा था। माल को जब्त करने की कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रशासन ने प्रयागराज मंडल के सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर से बातचीत की। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि माल उतारने में लगभग एक दिन का समय लगेगा और ट्रेन रोकना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा। इसे देखते हुए प्रशासन ने माल जब्त करने के बजाय व्यापारियों पर भारी कंपाउंडिंग पेनाल्टी लगाने का निर्णय लिया।

व्यापारियों पर कार्रवाई

जिलाधिकारी रवींद्र सिंह के अनुसार, प्रथम दृष्टया इस मामले में तीन व्यापारी संलिप्त पाए गए हैं। उनके लाइसेंस निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं और निर्धारित मंडी शुल्क के साथ-साथ जुर्माना भी वसूला जा रहा है। इसके अतिरिक्त, यह भी जांचा जाएगा कि पूर्व में भी इन्हीं व्यापारियों द्वारा बिना 9आर रसीद के माल भेजा गया है या नहीं — यदि ऐसा पाया गया तो उन मामलों में भी शमन शुल्क, मंडी शुल्क और सेस वसूला जाएगा।

मंडी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जांच केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगी। यदि मंडी समिति या किसी अन्य संस्थागत स्तर पर किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

भविष्य की रोकथाम के उपाय

प्रशासन ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए रेलवे के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्णय लिया है। योजना यह है कि जब भी किसी मालगाड़ी का आरआर जारी हो, रेलवे उसी समय जिला प्रशासन को यह भी सूचित करे कि संबंधित माल का 9आर मंडी दस्तावेज जारी हुआ है या नहीं। इस व्यवस्था के लागू होने से मंडी शुल्क चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसका फायदा व्यापारी वर्षों से उठाते रहे हैं। जिलाधिकारी का यह स्वीकारोक्ति कि माल को जब्त करना 'व्यावहारिक रूप से कठिन' था, बताती है कि कानून का ढाँचा मज़बूत होने के बावजूद प्रवर्तन तंत्र कमज़ोर है। पूर्व के मामलों की जांच का निर्णय सही दिशा में है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि रेलवे-प्रशासन समन्वय तंत्र कागज़ों से बाहर निकलकर ज़मीन पर कब उतरता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एटा में मंडी शुल्क चोरी का मामला क्या है?
16 जुलाई को एटा रेलवे स्टेशन पर जांच के दौरान 24,900 क्विंटल मक्का से लदी एक मालगाड़ी बिना अनिवार्य 9आर मंडी रसीद के पकड़ी गई, जिससे मंडी शुल्क और सेस की चोरी की आशंका जताई गई है। जिला प्रशासन ने तीन व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त कर भारी जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू की है।
9आर मंडी रसीद क्या होती है और यह क्यों ज़रूरी है?
9आर मंडी रसीद उत्तर प्रदेश मंडी अधिनियम के तहत एक अनिवार्य दस्तावेज़ है, जो मंडी से कृषि उपज बाहर भेजने से पहले काटनी होती है। यह रसीद मंडी शुल्क और अन्य देयों के भुगतान का कानूनी प्रमाण है; इसके बिना परिवहन करना शुल्क चोरी माना जाता है।
पकड़े गए तीन व्यापारियों पर क्या कार्रवाई हुई?
जिलाधिकारी रवींद्र सिंह के अनुसार, प्रथम दृष्टया संलिप्त तीन व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन पर निर्धारित 1 प्रतिशत मंडी शुल्क के साथ-साथ शमन शुल्क और सेस भी वसूला जाएगा, और पूर्व के लेनदेन की भी जांच होगी।
माल को जब्त क्यों नहीं किया गया?
रेलवे का आरआर (रेलवे रसीद) पहले ही जारी हो चुका था, जिसके कारण माल कानूनी रूप से रेलवे की संपत्ति बन चुका था। प्रयागराज मंडल के सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर से बातचीत के बाद स्पष्ट हुआ कि माल उतारने में एक दिन लगेगा और ट्रेन रोकना व्यावहारिक रूप से कठिन है, इसलिए प्रशासन ने जब्ती के बजाय जुर्माना लगाने का निर्णय लिया।
भविष्य में मंडी शुल्क चोरी रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
जिला प्रशासन रेलवे के साथ एक समन्वय तंत्र विकसित करेगा जिसके तहत जब भी कोई आरआर जारी हो, रेलवे यह भी सूचित करेगा कि संबंधित माल का 9आर मंडी दस्तावेज जारी हुआ है या नहीं। इसके अलावा मंडी समिति के अधिकारियों की संलिप्तता की भी विस्तृत जांच कराई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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