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'वन नेशन, वन इलेक्शन' से ₹3 लाख करोड़ की बचत संभव: भाजपा विधायक राम कदम, सुप्रिया सुले के रुख की तारीफ

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'वन नेशन, वन इलेक्शन' से ₹3 लाख करोड़ की बचत संभव: भाजपा विधायक राम कदम, सुप्रिया सुले के रुख की तारीफ

सारांश

'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर भाजपा विधायक राम कदम का बड़ा दावा — ₹3 लाख करोड़ की बचत और 1.5% GDP उछाल। साथ ही सुप्रिया सुले के परिसीमन रुख की तारीफ और फडणवीस से NCP नेताओं की मुलाकात को सामान्य प्रक्रिया बताया।

मुख्य बातें

भाजपा विधायक राम कदम ने 16 जुलाई 2025 को मुंबई में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' को देश की अनिवार्य ज़रूरत बताया।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समिति ने 21,000 से अधिक सुझावों के आधार पर 18,616 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की।
एक साथ चुनाव से जीडीपी में 1.5% वृद्धि और चुनावी खर्च में ₹3 लाख करोड़ की बचत का दावा।
NCP (शरदचंद्र पवार) सांसद सुप्रिया सुले के परिसीमन पर सशर्त समर्थन के संकेत का कदम ने स्वागत किया।
NCP नेताओं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात को सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया बताया।
शरद पवार और अजित पवार गुटों के संभावित गठबंधन पर भाजपा ने टिप्पणी से इनकार किया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राम कदम ने 16 जुलाई 2025 को मुंबई में मीडिया से बातचीत में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' प्रस्ताव को देश की अनिवार्य ज़रूरत बताया और कहा कि इससे चुनावी खर्च में करीब ₹3 लाख करोड़ की बचत हो सकती है। साथ ही उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले द्वारा परिसीमन (डिलिमिटेशन) पर दिए गए सशर्त समर्थन के संकेत का स्वागत किया।

कोविंद समिति की रिपोर्ट और आर्थिक तर्क

राम कदम ने कहा कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का प्रस्ताव व्यापक अध्ययन पर आधारित है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित समिति ने देशभर से प्राप्त 21,000 से अधिक सकारात्मक सुझावों का विश्लेषण कर 18,616 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। उनके अनुसार, यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो भारत की जीडीपी में लगभग 1.5 प्रतिशत की वृद्धि संभव है और चुनावों पर होने वाले खर्च में करीब ₹3 लाख करोड़ की बचत हो सकती है, जिसे विकास कार्यों में लगाया जा सकेगा।

कदम ने तर्क दिया कि इस बचत से भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अतिरिक्त बल मिलेगा। उन्होंने 'एक देश, एक निशान', 'एक देश, एक टैक्स' (GST) और 'एक देश, एक राशन कार्ड' जैसी पूर्व नीतिगत एकरूपताओं का हवाला देते हुए कहा कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' उसी कड़ी का अगला तार्किक कदम है।

शासन और प्रशासन पर असर

भाजपा विधायक ने कहा कि अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों के कारण शासन और प्रशासन का बड़ा हिस्सा कई महीनों तक चुनावी प्रक्रिया में उलझा रहता है। इस दौरान विकास परियोजनाएँ प्रभावित होती हैं और आम जनता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, एक साथ चुनाव होने पर सरकार और प्रशासन दोनों विकास कार्यों पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

सुप्रिया सुले के रुख का स्वागत

NCP (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले द्वारा परिसीमन के मुद्दे पर सशर्त समर्थन के संकेत दिए जाने पर राम कदम ने उनके रुख की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि संसद के आगामी मानसून सत्र में देशहित से जुड़ा कोई विधेयक आता है और विपक्ष उसे सकारात्मक दृष्टिकोण से समर्थन देता है, तो यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है। कदम ने कहा, 'विपक्ष को केवल विरोध के लिए विरोध नहीं करना चाहिए, बल्कि जनहित और राष्ट्रहित के मामलों में सहयोग करना चाहिए।'

फडणवीस से NCP नेताओं की मुलाकात पर प्रतिक्रिया

NCP नेताओं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हुई मुलाकात को लेकर राम कदम ने कहा कि मुख्यमंत्री के दरवाजे समाज के हर वर्ग के लिए खुले हैं — किसान, मज़दूर, आम नागरिक, जनप्रतिनिधि या किसी भी दल का नेता। उन्होंने इस मुलाकात को सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि इसे किसी विशेष राजनीतिक संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शरद पवार और अजित पवार गुटों के संभावित राजनीतिक समीकरणों पर टिप्पणी करने से कदम ने इनकार किया। उन्होंने कहा कि दोनों दलों को भविष्य में साथ आना है या अलग रहना है, यह उनका आंतरिक निर्णय है और भाजपा इस पर कोई राय नहीं देगी।

उद्धव ठाकरे पर निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए राम कदम ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे की कार्यशैली में बड़ा अंतर है। उनके अनुसार, फडणवीस आम जनता और जनप्रतिनिधियों के लिए हमेशा उपलब्ध रहने वाले नेता हैं, जबकि उद्धव ठाकरे पर उन्होंने लोगों से दूरी बनाए रखने का आरोप लगाया। आगे देखना होगा कि मानसून सत्र में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' विधेयक पर विपक्ष का रुख क्या रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कोविंद समिति की रिपोर्ट के बाद भी संवैधानिक और संघीय ढाँचे पर बहस अनसुलझी है — विपक्षी दल राज्यों की स्वायत्तता का हवाला देते आए हैं। सुप्रिया सुले का परिसीमन पर 'सशर्त समर्थन' महाराष्ट्र की जटिल गठबंधन राजनीति में एक सुविचारित संकेत हो सकता है, न कि सिद्धांतगत सहमति। NCP के दोनों गुटों के नेताओं का फडणवीस से मिलना जब राज्य में सत्ता-समीकरण बदलने की अटकलें तेज़ हैं, तब इसे 'सामान्य प्रक्रिया' कहना पर्याप्त नहीं लगता — मुख्यधारा की कवरेज इस राजनीतिक उपसंदर्भ को नज़रअंदाज़ कर रही है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वन नेशन, वन इलेक्शन' से ₹3 लाख करोड़ की बचत कैसे होगी?
भाजपा विधायक राम कदम के अनुसार, अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों पर होने वाले संचयी खर्च को एक साथ चुनाव कराने से करीब ₹3 लाख करोड़ तक घटाया जा सकता है। यह बचत प्रशासनिक लागत, सुरक्षा तैनाती और चुनाव प्रबंधन के एकीकरण से आने का अनुमान है।
कोविंद समिति की रिपोर्ट में क्या है?
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित समिति ने देशभर से 21,000 से अधिक सुझावों का अध्ययन कर 18,616 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था को व्यावहारिक और लाभकारी बताया गया है।
सुप्रिया सुले ने परिसीमन पर क्या कहा और राम कदम ने क्यों स्वागत किया?
NCP (शरदचंद्र पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने परिसीमन के मुद्दे पर सशर्त समर्थन के संकेत दिए हैं। राम कदम ने इसे लोकतंत्र के लिए सकारात्मक कदम बताया और कहा कि विपक्ष को राष्ट्रहित के मामलों में सहयोग करना चाहिए।
प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात का क्या मतलब है?
राम कदम ने इस मुलाकात को सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया बताया और कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दरवाजे सभी वर्गों के लिए खुले हैं। उन्होंने इसे किसी विशेष राजनीतिक संकेत से जोड़ने से इनकार किया।
'वन नेशन, वन इलेक्शन' कब लागू हो सकता है?
अभी तक कोई आधिकारिक तिथि तय नहीं हुई है। राम कदम ने संकेत दिया कि संसद के आगामी मानसून सत्र में इससे जुड़ा विधेयक लाया जा सकता है, लेकिन इसके लागू होने की समयसीमा संसदीय सहमति पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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