16 जुलाई 2026
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'वन नेशन, वन इलेक्शन' से GDP में 1.5% वृद्धि संभव: भाजपा विधायक राम कदम, सुप्रिया सुले के रुख का स्वागत

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'वन नेशन, वन इलेक्शन' से GDP में 1.5% वृद्धि संभव: भाजपा विधायक राम कदम, सुप्रिया सुले के रुख का स्वागत

सारांश

भाजपा विधायक राम कदम ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' को आर्थिक और प्रशासनिक जरूरत बताया — ₹3 लाख करोड़ की बचत और GDP में 1.5% वृद्धि का हवाला देते हुए। साथ ही सुप्रिया सुले के परिसीमन पर सशर्त समर्थन को लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत करार दिया।

मुख्य बातें

भाजपा विधायक राम कदम ने 16 जुलाई 2025 को मुंबई में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' को देश की आवश्यकता बताया।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति ने 21,000 से अधिक सुझावों के आधार पर 18,616 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की।
एक साथ चुनाव से जीडीपी में 1.5% वृद्धि और चुनाव खर्च में ₹3 लाख करोड़ की बचत का अनुमान।
NCP (शरदचंद्र पवार) सांसद सुप्रिया सुले के परिसीमन पर सशर्त समर्थन का राम कदम ने स्वागत किया।
NCP नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात को राम कदम ने सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राम कदम ने 16 जुलाई 2025 को मुंबई में 'एक देश, एक चुनाव' (वन नेशन, वन इलेक्शन) प्रस्ताव को देश की अनिवार्य जरूरत बताया और कहा कि इसके लागू होने से भारत की जीडीपी में लगभग 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले द्वारा परिसीमन (डिलिमिटेशन) पर दिए गए सशर्त समर्थन के संकेत का स्वागत किया।

कोविंद समिति की रिपोर्ट और आर्थिक तर्क

राम कदम ने बताया कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का प्रस्ताव किसी राजनीतिक सोच का नहीं, बल्कि गहन अध्ययन का परिणाम है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित समिति ने देशभर से प्राप्त 21,000 से अधिक सकारात्मक सुझावों के आधार पर लगभग 18,616 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है।

उन्होंने कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो चुनावों पर होने वाले खर्च में करीब ₹3 लाख करोड़ की बचत होगी, जिसे विकास कार्यों में लगाया जा सकेगा। यह बचत भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में और मज़बूती प्रदान करेगी।

शासन और प्रशासन पर असर

राम कदम ने तर्क दिया कि अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों के कारण शासन और प्रशासन का बड़ा हिस्सा कई महीनों तक चुनावी प्रक्रिया में उलझा रहता है, जिससे विकास परियोजनाएँ प्रभावित होती हैं और आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने 'एक देश, एक निशान', 'एक देश, एक टैक्स' (GST) और 'एक देश, एक राशन कार्ड' जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' भी इसी कड़ी में अगला स्वाभाविक कदम है। उन्होंने कहा, 'यह व्यवस्था पहले की सरकारों को लागू करनी चाहिए थी, लेकिन अब समय की माँग है कि इस कानून को लागू किया जाए।'

सुप्रिया सुले के रुख का स्वागत

NCP (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले द्वारा परिसीमन के मुद्दे पर सशर्त समर्थन के संकेत दिए जाने पर राम कदम ने उनके रुख को लोकतंत्र के लिए सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि यदि संसद के आगामी मानसून सत्र में देशहित से जुड़ा कोई विधेयक लाया जाता है और विपक्ष उसका सकारात्मक दृष्टिकोण से समर्थन करता है, तो यह स्वागत योग्य है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह 'केवल विरोध के लिए विरोध' की नीति छोड़कर जनहित और राष्ट्रहित के मामलों में सहयोग करे।

NCP नेताओं की फडणवीस से मुलाकात पर प्रतिक्रिया

NCP के नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हुई मुलाकात को लेकर उठे सवालों पर राम कदम ने कहा कि मुख्यमंत्री के दरवाजे समाज के हर वर्ग — किसान, मजदूर, आम नागरिक, विधायक, सांसद — के लिए हमेशा खुले रहते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता का मुख्यमंत्री से मिलना सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे किसी विशेष राजनीतिक संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शरद पवार और अजित पवार गुटों के संभावित राजनीतिक समीकरणों पर टिप्पणी करने से राम कदम ने स्पष्ट रूप से इनकार किया और कहा कि यह दोनों दलों का आंतरिक निर्णय है।

उद्धव ठाकरे पर निशाना

राम कदम ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की कार्यशैली की तुलना देवेंद्र फडणवीस से करते हुए कहा कि फडणवीस प्रतिदिन लंबे समय तक काम करते हैं और जनप्रतिनिधियों व आम नागरिकों के लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं। उन्होंने ठाकरे पर लोगों से दूरी बनाए रखने का आरोप लगाया। आगे आने वाले दिनों में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' विधेयक पर संसदीय बहस और विपक्षी दलों की आधिकारिक स्थिति इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन आँकड़ों की स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्षी दल — विशेषकर दक्षिण भारतीय क्षेत्रीय पार्टियाँ — परिसीमन और एक साथ चुनाव को एक ही पैकेज के रूप में स्वीकार करेंगी, जबकि दोनों मुद्दों पर उनके हित अलग-अलग हैं। सुप्रिया सुले का सशर्त समर्थन महाराष्ट्र की राजनीतिक जमीन पर एक सामरिक कदम भी हो सकता है। संसद के मानसून सत्र में विधेयक की वास्तविक परीक्षा तब होगी जब संख्याबल और संवैधानिक संशोधन की जटिलताएँ सामने आएँगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वन नेशन, वन इलेक्शन' से आर्थिक फायदा कितना होगा?
राम कदम के अनुसार, यह व्यवस्था लागू होने पर भारत की जीडीपी में लगभग 1.5 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है और चुनावों पर होने वाले खर्च में करीब ₹3 लाख करोड़ की बचत होगी। यह राशि देश के विकास कार्यों में लगाई जा सकती है।
कोविंद समिति ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर क्या रिपोर्ट दी?
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित समिति ने देशभर से प्राप्त 21,000 से अधिक सकारात्मक सुझावों का अध्ययन करके लगभग 18,616 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है।
सुप्रिया सुले ने परिसीमन पर क्या रुख अपनाया है?
NCP (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने परिसीमन के मुद्दे पर सशर्त समर्थन के संकेत दिए हैं। भाजपा विधायक राम कदम ने इसे लोकतंत्र के लिए सकारात्मक बताते हुए स्वागत किया।
NCP नेताओं की देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के क्या मायने हैं?
NCP नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। राम कदम ने इसे सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया बताया और कहा कि इसे किसी विशेष राजनीतिक संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भाजपा ने शरद पवार और अजित पवार गुटों के संभावित गठजोड़ पर क्या कहा?
राम कदम ने दोनों गुटों के संभावित राजनीतिक समीकरणों पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि दोनों दलों को भविष्य में साथ आना है या अलग रहना है, यह उनका आंतरिक और राजनीतिक निर्णय है।
राष्ट्र प्रेस
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