आरबीआई की नई व्यवस्था: यूपीआई और कार्ड पेमेंट्स में सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

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आरबीआई की नई व्यवस्था: यूपीआई और कार्ड पेमेंट्स में सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

सारांश

आरबीआई ने एक नई दिशा में कदम बढ़ाते हुए यूपीआई और कार्ड पेमेंट्स में सुरक्षा को बढ़ाने के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य कर दिया है। यह कदम धोखाधड़ी की घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

मुख्य बातें

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य होगा।
यूपीआई और कार्ड पेमेंट्स में सुरक्षा बढ़ेगी।
लेन-देन में दो स्तर की वेरिफिकेशन प्रक्रिया होगी।
धोखाधड़ी के मामलों को कम करने का उद्देश्य।
बैंकों की जवाबदेही बढ़ाई जाएगी।

नई दिल्ली, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक अप्रैल, 2026 से टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य किया है। इससे यूपीआई और कार्ड पेमेंट्स में पहले की तुलना में अधिक सुरक्षा होगी।

केंद्रीय बैंक ने सभी डिजिटल पेमेंट्स जैसे यूपीआई, डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स और मोबाइल वॉलेट्स के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को आवश्यक बना दिया है।

इसका अर्थ है कि अब लेन-देन को पूर्ण करने के लिए केवल ओटीपी ही पर्याप्त नहीं होगा। उपयोगकर्ताओं को अब ओटीपी के साथ-साथ कम से कम दो स्तर की वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा, जैसे कि पिन, पासवर्ड, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण या टोकन

यह कदम ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए उठाया गया है, जिनमें फिशिंग और सिम स्वैप घोटाले शामिल हैं, जहां ओटीपी-आधारित प्रणाली असुरक्षित साबित हुई है।

सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जोड़कर, आरबीआई का उद्देश्य अनधिकृत लेनदेन की संभावना को कम करना और डिजिटल भुगतान प्रणालियों में विश्वास बढ़ाना है।

इस बदलाव के कारण विशेष रूप से नए उपकरणों पर या उच्च मूल्य के लेनदेन के लिए भुगतान पूरा करने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।

हालांकि, विश्वसनीय उपकरणों पर नियमित लेनदेन अपेक्षाकृत सुचारू रहने की उम्मीद है।

यह प्रणाली जोखिम-आधारित दृष्टिकोण भी अपनाएगी, जहां सुरक्षा जांच का स्तर लेनदेन की प्रकृति और व्यवहार पर निर्भर करेगा।

नए नियमों का एक और महत्वपूर्ण पहलू बैंकों और भुगतान प्लेटफार्मों के लिए बढ़ी हुई जवाबदेही है।

यदि उनके सिस्टम में खराबी के कारण कोई धोखाधड़ी होती है, तो वित्तीय संस्थानों को ग्राहकों को मुआवजा देना पड़ सकता है।

इससे शिकायतों का जल्द समाधान सुनिश्चित होने और बैंकों को अपने सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रेरित होने की उम्मीद है।

आरबीआई ने यह भी संकेत दिया है कि इसी तरह के प्रमाणीकरण मानदंड सीमा पार कार्ड भुगतान सहित अंतरराष्ट्रीय लेनदेन पर भी लागू होंगे।

इन नियमों का पूर्ण कार्यान्वयन अक्टूबर 2026 तक होने की उम्मीद है।

भारत में डिजिटल भुगतान में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए, केंद्रीय बैंक का यह नया कदम सुविधा और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

एक्सपर्ट्स

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उपभोक्ताओं का विश्वास भी बढ़ाएगा।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन क्या है?
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन एक सुरक्षा प्रक्रिया है जिसमें उपयोगकर्ता को अपने लेनदेन को पूरा करने के लिए दो अलग-अलग प्रकार के प्रमाणीकरण से गुजरना होता है।
यह नियम कब से लागू होगा?
यह नियम एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा।
क्या इससे लेनदेन में समय लगेगा?
हां, नए उपकरणों पर या उच्च मूल्य के लेनदेन के लिए भुगतान पूरा करने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
धोखाधड़ी के खिलाफ यह कदम कितना प्रभावी होगा?
यह कदम ऑनलाइन धोखाधड़ी को कम करने में मदद करेगा, क्योंकि यह अतिरिक्त सुरक्षा परत प्रदान करता है।
क्या बैंकों को भी जिम्मेदारी का सामना करना पड़ेगा?
जी हां, यदि बैंकों के सिस्टम में खराबी के कारण कोई धोखाधड़ी होती है, तो उन्हें ग्राहकों को मुआवजा देना पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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