क्या उदयनिधि स्टालिन ने हिंदुओं का अपमान किया है? एएनएस प्रसाद का बयान

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क्या उदयनिधि स्टालिन ने हिंदुओं का अपमान किया है? एएनएस प्रसाद का बयान

सारांश

तमिलनाडु के उप मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के विवादास्पद बयानों को लेकर भाजपा ने तुरंत इस्तीफे की मांग की है। यह मामला अदालत के एक फैसले से जुड़ा है, जिसमें भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ एफआईआर को रद्द किया गया। पढ़ें पूरी खबर।

Key Takeaways

  • उदयनिधि स्टालिन के बयानों ने विवाद उत्पन्न किया है।
  • भाजपा ने उन्हें इस्तीफे की मांग की है।
  • मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
  • यह मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है।
  • सार्वजनिक हस्तियों को उनके शब्दों के लिए उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए।

चेन्नई, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को तमिलनाडु के उप मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन से तुरंत इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने इसके लिए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ एफआईआर को रद्द कर दिया गया था।

तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने कहा कि हाईकोर्ट का यह फैसला उदयनिधि स्टालिन की सार्वजनिक पद पर बने रहने की नाकाबिलियत को संवैधानिक और नैतिक रूप से उजागर करता है।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय भाजपा के उस पुराने दृष्टिकोण को सही साबित करता है कि भड़काऊ बयानों की कानूनी आलोचना को अपराध नहीं बनाया जा सकता और असहमति को दबाने के लिए पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग न्यायिक जांच में टिक नहीं पाएगा।

मदुरै बेंच ने 20 जनवरी के अपने आदेश में भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के प्रभारी अमित मालवीय के खिलाफ उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयानों पर सोशल मीडिया पोस्ट के लिए दर्ज आपराधिक मामले को रद्द कर दिया।

जस्टिस एस. श्रीमाथी ने कहा कि मालवीय का उत्तर कोई अपराध नहीं था। उन्होंने एफआईआर को कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग बताया।

एएनएस प्रसाद ने कहा कि यह फैसला सितंबर 2023 में उप मुख्यमंत्री स्टालिन के अपने बयानों पर फिर से ध्यान दिलाता है, जहां उन्होंने सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही थी और इसकी तुलना मलेरिया, डेंगू और कोरोनावायरस जैसी संक्रामक बीमारियों से की थी।

भाजपा के अनुसार, इन टिप्पणियों से लाखों नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची और यह भारतीयों के एक बड़े हिस्से द्वारा माने जाने वाले धर्म के खिलाफ नफरत भरी बातें थीं।

प्रसाद ने कहा, "संविधान धर्म की स्वतंत्रता और कानून के सामने समानता की गारंटी देता है और सभी समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने की वकालत करता है। एक मंत्री जिसने संविधान को बनाए रखने की शपथ ली है, वह सार्वजनिक रूप से किसी भी धर्म का अपमान नहीं कर सकता।"

उन्होंने तर्क किया कि हाईकोर्ट का फैसला सार्वजनिक हस्तियों को उनके शब्दों के लिए जवाबदेह ठहराने की वैधता को मजबूत करता है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, "इस्तीफा केवल एक राजनीतिक मांग नहीं है। यह एक संवैधानिक और नैतिक आवश्यकता है।"

Point of View

सभी पक्षों को एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

उदयनिधि स्टालिन ने क्या कहा था?
उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से की थी।
भाजपा ने इस्तीफे की मांग क्यों की?
भाजपा ने उन्हें अपमानजनक बयानों के लिए इस्तीफे की मांग की है, जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।
मद्रास हाईकोर्ट का फैसला क्या था?
हाईकोर्ट ने अमित मालवीय के खिलाफ एफआईआर को रद्द कर दिया था।
क्या यह मामला राजनीतिक विवाद है?
हाँ, यह मामला राजनीतिक और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
क्या उच्च न्यायालय का फैसला महत्वपूर्ण है?
जी हाँ, यह सार्वजनिक हस्तियों की ज़िम्मेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय है।
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