16 सितंबर 2026
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मद्रास हाई कोर्ट: पार्टी बदलकर उपचुनाव लड़ना मतदाताओं का 'अपमान', चुनाव आयोग से दिशा-निर्देश बनाने को कहा

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मद्रास हाई कोर्ट: पार्टी बदलकर उपचुनाव लड़ना मतदाताओं का 'अपमान', चुनाव आयोग से दिशा-निर्देश बनाने को कहा

सारांश

मद्रास हाई कोर्ट ने उस राजनीतिक चलन पर तीखा सवाल उठाया है जिसमें विधायक इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी से उसी सीट पर उपचुनाव लड़ते हैं। कोर्ट ने इसे मतदाताओं का 'अपमान' बताते हुए चुनाव आयोग से संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत रोक के लिए दिशा-निर्देश बनाने को कहा।

मुख्य बातें

मद्रास हाई कोर्ट ने 16 सितंबर को कहा कि पार्टी बदलकर उसी सीट से उपचुनाव लड़ना मतदाताओं के जनादेश का 'अपमान' है।
सुब्रमण्यम और जस्टिस के.
गोविंदराजन की खंडपीठ ने चेन्नई के वकील के.
सुथन की PIL पर सुनवाई की।
तमिलनाडु में AIADMK के छह विधायकों ने इस्तीफा देकर सत्ताधारी TVK का दामन थामा; मरगथम कुमारवेल और पी.
सत्यभामा उपचुनाव में TVK उम्मीदवार हैं।
कोर्ट ने चुनाव आयोग से संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत ऐसे इस्तीफों पर रोक के लिए दिशा-निर्देश बनाने को कहा।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने चेतावनी दी कि अनियंत्रित रहने पर यह प्रवृत्ति बार-बार उपचुनाव और सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचाएगी।

मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार, 16 सितंबर को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि चुने हुए विधायकों का अपनी सीट से इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी में शामिल होना और फिर उसी निर्वाचन क्षेत्र से उपचुनाव लड़ना मतदाताओं तथा उनके मूल जनादेश का 'अपमान' हो सकता है। कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) से आग्रह किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए इस विषय पर उचित दिशा-निर्देश तैयार करे।

मामले की पृष्ठभूमि

यह टिप्पणी कोर्ट की द्वितीय खंडपीठ ने चेन्नई के अधिवक्ता के. सुथन द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान की। खंडपीठ में जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस के. गोविंदराजन शामिल थे। याचिकाकर्ता ने ऐसे कानूनी उपायों की माँग की है जो चुने हुए प्रतिनिधियों को पार्टी बदलने के बाद इस्तीफा देकर उसी सीट से उपचुनाव लड़ने से रोक सकें।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस प्रवृत्ति से आम चुनाव में मतदाताओं की मूल पसंद कमज़ोर होती है और सार्वजनिक खजाने पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ता है।

तमिलनाडु में ताज़ा घटनाक्रम

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आर. सिंगारावेलन ने खंडपीठ को बताया कि तमिलनाडु में इस वर्ष विधानसभा चुनाव के पश्चात अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के छह विधायकों ने इस्तीफा दिया और बाद में सत्ताधारी दल तमिलगा वेत्री कजगम (TVK) में शामिल हो गए।

इनमें से मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा को TVK ने क्रमशः मदुरंतकम और धारापुरम निर्वाचन क्षेत्रों से उम्मीदवार बनाया है। उल्लेखनीय है कि ये दोनों सीटें उन्हीं के इस्तीफे के कारण रिक्त हुई थीं। कोर्ट को यह भी बताया गया कि चुनाव आयोग ने केवल इन्हीं दो सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की है, जबकि अन्य रिक्त सीटों पर अभी तक ऐसी कोई अधिसूचना नहीं आई है।

कोर्ट की तीखी टिप्पणियाँ

जस्टिस सुब्रमण्यम ने कहा कि जो विधायक केवल दूसरी पार्टी के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ने के उद्देश्य से इस्तीफा देते हैं, वे 'शायद लोकतंत्र का मज़ाक उड़ा रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं ने किसी उम्मीदवार को उसकी पार्टी की विचारधारा के आधार पर चुना था, उन्हें विधायक के व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय के कारण दोबारा मतदान करने पर विवश होना पड़ रहा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता सिंगारावेलन ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया तो भविष्य में बड़े पैमाने पर इस्तीफे हो सकते हैं, जिससे बार-बार उपचुनाव होंगे और सरकारी खजाने को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

चुनाव आयोग से क्या माँगा गया

खंडपीठ ने संकेत दिया कि इस मामले की बारीकी से जाँच आवश्यक है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह इस बात पर विचार करे कि क्या ऐसे इस्तीफों को नियमों के ज़रिये रोका जा सकता है जो केवल पार्टी परिवर्तन और तत्काल पुनर्निर्वाचन के उद्देश्य से दिए जाते हैं। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि चुनाव की निगरानी करना आयोग की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है।

यह मामला भारत में दल-बदल और लोकतांत्रिक जवाबदेही की व्यापक बहस से जुड़ा है। आगे की सुनवाई में यह देखा जाएगा कि चुनाव आयोग इस विषय पर क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे तकनीकी रूप से कानूनी दायरे में रहते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक भावना का उल्लंघन करते हैं। चुनाव आयोग के पास अनुच्छेद 324 के तहत व्यापक शक्तियाँ हैं, फिर भी आयोग ने अब तक इस विशिष्ट प्रवृत्ति पर कोई ठोस दिशा-निर्देश नहीं बनाए — यह चूक उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना कोर्ट का हस्तक्षेप। यदि आयोग इस अवसर पर सक्रिय नहीं हुआ, तो यह न्यायिक टिप्पणी भी उन कई चेतावनियों की सूची में जुड़ जाएगी जिन पर कार्रवाई नहीं हुई।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाई कोर्ट ने विधायकों के उपचुनाव लड़ने पर क्या कहा?
मद्रास हाई कोर्ट ने 16 सितंबर को कहा कि विधायकों का इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी में शामिल होना और उसी सीट से उपचुनाव लड़ना मतदाताओं के मूल जनादेश का 'अपमान' हो सकता है। जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम ने इसे 'लोकतंत्र का मज़ाक' करार दिया।
यह जनहित याचिका किसने और क्यों दायर की?
चेन्नई के अधिवक्ता के. सुथन ने यह PIL दायर की, जिसमें ऐसे उपाय माँगे गए हैं जो चुने हुए प्रतिनिधियों को पार्टी बदलने के बाद इस्तीफा देकर उसी सीट से उपचुनाव लड़ने से रोक सकें। उनका तर्क है कि इससे मतदाताओं की पसंद कमज़ोर होती है और सार्वजनिक धन की बर्बादी होती है।
तमिलनाडु में AIADMK के विधायकों ने क्या किया?
तमिलनाडु में इस वर्ष विधानसभा चुनाव के बाद AIADMK के छह विधायकों ने इस्तीफा दिया और सत्ताधारी TVK में शामिल हो गए। इनमें से मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा को TVK ने क्रमशः मदुरंतकम और धारापुरम से उम्मीदवार बनाया है, जो उन्हीं के इस्तीफे से रिक्त हुई सीटें हैं।
चुनाव आयोग से कोर्ट ने क्या माँगा?
खंडपीठ ने चुनाव आयोग से कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए विचार करे कि क्या ऐसे इस्तीफों पर नियम बनाए जा सकते हैं जो केवल पार्टी बदलने और तत्काल पुनर्निर्वाचन के उद्देश्य से दिए जाते हैं।
इस प्रवृत्ति से लोकतंत्र और सरकारी खजाने पर क्या असर पड़ता है?
वरिष्ठ अधिवक्ता आर. सिंगारावेलन ने कोर्ट को बताया कि इस चलन से लोकतांत्रिक जवाबदेही कमज़ोर होती है और बार-बार उपचुनाव से सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अनियंत्रित रहने पर भविष्य में बड़े पैमाने पर इस्तीफे हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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