क्या मध्य प्रदेश की विधायक निर्मला सप्रे दल-बदल के आरोपों में फंस गईं?

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क्या मध्य प्रदेश की विधायक निर्मला सप्रे दल-बदल के आरोपों में फंस गईं?

सारांश

मध्य प्रदेश की विधायक निर्मला सप्रे पर दल-बदल का आरोप है। हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया है। सप्रे ने 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी, लेकिन भाजपा में शामिल हो गईं। क्या यह मामला उनके राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा?

मुख्य बातें

निर्मला सप्रे पर दल-बदल का आरोप है।
हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया है।
उमंग सिंघार ने याचिका दायर की है।
निर्मला सप्रे ने कांग्रेस से भाजपा में प्रवेश किया।
दल-बदल याचिका का निर्णय शीघ्र होना आवश्यक है।

भोपाल, 7 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश में दल-बदल के आरोपों के कारण सागर जिले के बीना विधानसभा क्षेत्र की विधायक निर्मला सप्रे की समस्याएँ बढ़ सकती हैं, क्योंकि हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया है। सप्रे ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में वे भाजपा में शामिल हो गईं।

कांग्रेस की तरफ से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्य प्रदेश विधानसभा के सभापति के समक्ष सप्रे की विधायकी निरस्त करने के लिए याचिका प्रस्तुत की थी, जिसका निराकरण अब तक नहीं हुआ है। इस कारण उमंग सिंघार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है और मांग की है कि निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता रद्द की जाए।

याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने की। सुनवाई के बाद न्यायालय ने सभापति एवं विधायक निर्मला सप्रे को नोटिस जारी किया है। इस मामले में उमंग सिंघार की तरफ से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल एवं जयेश गुरनानी ने पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से पैरवी महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने की।

उमंग सिंघार ने बताया कि सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने महाधिवक्ता से यह पूछा कि आखिर सभापति ने 16 महीने बीत जाने के बाद भी याचिका पर निर्णय क्यों नहीं लिया है? जबकि उच्चतम न्यायालय ने 'पाडी कौशिक रेड्डी बनाम तेलंगाना राज्य' और 'केशम बनाम मणिपुर राज्य' में यह स्पष्ट किया है कि दल-बदल याचिका का निराकरण तीन माह के भीतर किया जाना चाहिए।

उमंग सिंघार के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि सभापति उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित विधि के सिद्धांतों के विपरीत कार्य कर रहे हैं और निर्मला सप्रे के खिलाफ प्रस्तुत की गई दल-बदल याचिका का निराकरण नहीं कर रहे हैं। भारतीय संविधान के अनुसार यदि कोई विधायक दल-बदल करता है, तो उसकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो जानी चाहिए। यदि दल-बदल के बाद विधायक रहना हो, तो उसे फिर से चुनाव लड़ना पड़ता है। इसके बाद उच्च न्यायालय ने विधायक सप्रे और सभापति को नोटिस जारी किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्मला सप्रे ने किस पार्टी से चुनाव लड़ा था?
निर्मला सप्रे ने कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ा था।
उमंग सिंघार ने किसके खिलाफ याचिका दायर की?
उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे के खिलाफ याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने किसे नोटिस जारी किया?
हाईकोर्ट ने विधायक निर्मला सप्रे और सभापति को नोटिस जारी किया।
दल-बदल याचिका का निराकरण कब होना चाहिए?
उच्चतम न्यायालय के अनुसार, दल-बदल याचिका का निराकरण तीन माह के भीतर होना चाहिए।
क्या दल-बदल करने वाले विधायक की सदस्यता रद्द हो सकती है?
जी हाँ, भारतीय संविधान के अनुसार, दल-बदल करने वाले विधायक की सदस्यता रद्द हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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