29 जुलाई 2026
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राजस्थान हाई कोर्ट ने खारिज की ECI की याचिका, जयपुर ग्रामीण चुनाव विवाद में बना रहेगा पक्षकार

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राजस्थान हाई कोर्ट ने खारिज की ECI की याचिका, जयपुर ग्रामीण चुनाव विवाद में बना रहेगा पक्षकार

सारांश

राजस्थान हाई कोर्ट ने ECI को जयपुर ग्रामीण चुनाव याचिका से बाहर नहीं जाने दिया — कारण सीधा है: रद्द पोस्टल बैलेट के दो परस्पर विरोधी आंकड़े (1,225 बनाम 2,738), दोनों ECI के, और जीत का अंतर केवल 1,615 वोट। जब आंकड़े खुद विरोधाभासी हों, तो आयोग को जवाब देना होगा।

मुख्य बातें

राजस्थान हाई कोर्ट ने 29 जुलाई को ECI की याचिका खारिज की; आयोग को जयपुर ग्रामीण चुनाव मामले में पक्षकार बने रहना होगा।
जस्टिस विनोद कुमार भरवानी ने आदेश दिया कि ECI, मुख्य चुनाव आयुक्त, जिला चुनाव अधिकारी और रिटर्निंग अधिकारी सभी मामले में पक्षकार रहेंगे।
भाजपा के राव राजेंद्र सिंह ने कांग्रेस के अनिल चोपड़ा को 1,615 वोटों के अंतर से हराया था, जबकि रद्द पोस्टल बैलेट की संख्या 2,738 बताई गई — अंतर से अधिक।
रिटर्निंग ऑफिसर ने मतगणना के दिन 1,225 रद्द पोस्टल बैलेट बताए थे, लेकिन RTI से 2,738 का आंकड़ा सामने आया — दोनों एक ही दिन के लिए ECI के आंकड़े।
ECI ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का हवाला देते हुए खुद को पक्षकार से हटाने की माँग की थी, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार किया।

राजस्थान हाई कोर्ट ने 29 जुलाई को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की वह अर्जी खारिज कर दी, जिसमें आयोग ने 2024 के जयपुर ग्रामीण लोकसभा चुनाव नतीजों को चुनौती देने वाली याचिका से खुद को अलग करने की मांग की थी। जस्टिस विनोद कुमार भरवानी ने स्पष्ट किया कि ECI, मुख्य चुनाव आयुक्त, जिला चुनाव अधिकारी और रिटर्निंग अधिकारी — सभी इस मामले में पक्षकार बने रहेंगे।

मामले की पृष्ठभूमि

4 जून 2024 को घोषित नतीजों में भाजपा उम्मीदवार राव राजेंद्र सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार अनिल चोपड़ा को मात्र 1,615 वोटों के अंतर से हराया था। नतीजे आने के तुरंत बाद चोपड़ा ने मतगणना प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में धरना दिया और पुनर्मतगणना की माँग की। चुनाव अधिकारियों ने पुनर्मतगणना से इनकार करते हुए केवल आंकड़ों का दोबारा मिलान किया।

रद्द पोस्टल बैलेट का विवाद

इस मामले का केंद्रबिंदु रद्द किए गए पोस्टल बैलेट से जुड़े परस्पर विरोधी आंकड़े हैं। कोर्ट ने नोट किया कि 4 जून 2024 को रिटर्निंग ऑफिसर ने याचिकाकर्ता को बताया था कि 1,225 पोस्टल बैलेट रद्द किए गए। परंतु बाद में सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी से उजागर हुआ कि उसी दिन के लिए रद्द पोस्टल बैलेट की संख्या 2,738 थी। दोनों आंकड़े ECI द्वारा एक ही तिथि के लिए दिए गए, और यह अंतर जीत के अंतर — 1,615 वोट — से भी अधिक है।

कोर्ट का तर्क

कोर्ट ने माना कि चूँकि रद्द पोस्टल बैलेट की संख्या जीत के अंतर से अधिक है, इसलिए इन विसंगतियों की व्याख्या करना ECI की ज़िम्मेदारी बनती है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'इन हालात को देखते हुए, चुनाव आयोग इस मामले में एक ज़रूरी पक्ष है, इसलिए उसकी अर्जी खारिज की जाती है।'

ECI और याचिकाकर्ता के तर्क

ECI ने अपनी अर्जी में दलील दी थी कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के अंतर्गत उसे चुनाव याचिका में पक्षकार नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि यह विवाद केवल चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के बीच का मामला है। दूसरी ओर, अनिल चोपड़ा के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जब जीत का अंतर रद्द पोस्टल बैलेट से कम हो, तो इन विसंगतियों का स्पष्टीकरण देने में आयोग की भूमिका अपरिहार्य हो जाती है।

आगे क्या होगा

कोर्ट के इस आदेश के बाद ECI को मामले में पक्षकार के रूप में अपना पक्ष रखना होगा। यह याचिका जयपुर ग्रामीण सीट के 2024 लोकसभा चुनाव नतीजों को कानूनी चुनौती देती है और अब सुनवाई आगे बढ़ेगी, जिसमें रद्द पोस्टल बैलेट के आंकड़ों में अंतर का जवाब ECI को देना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

225 और 2,738 के बीच झूलते हों, और जीत का अंतर महज 1,615 वोट हो, तो 'हम पक्षकार नहीं हैं' की दलील संस्थागत जवाबदेही से बचने का प्रयास लगती है। राजस्थान हाई कोर्ट ने सही माना कि आंकड़ों की इस विसंगति का जवाब आयोग को ही देना होगा। यह फैसला एक व्यापक सवाल भी उठाता है — क्या पोस्टल बैलेट प्रबंधन में प्रणालीगत खामियाँ हैं जो करीबी चुनावों में नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं?
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान हाई कोर्ट ने ECI की याचिका क्यों खारिज की?
कोर्ट ने पाया कि रद्द पोस्टल बैलेट के आंकड़ों में विसंगति — एक ओर 1,225 और दूसरी ओर 2,738 — जीत के 1,615 वोट के अंतर से अधिक है, इसलिए ECI इन अंतरों की व्याख्या करने के लिए एक आवश्यक पक्ष है। जस्टिस विनोद कुमार भरवानी ने आदेश दिया कि आयोग को मामले में बने रहना होगा।
जयपुर ग्रामीण 2024 चुनाव याचिका का मूल विवाद क्या है?
भाजपा के राव राजेंद्र सिंह ने कांग्रेस के अनिल चोपड़ा को 1,615 वोटों से हराया था। चोपड़ा ने आरोप लगाया कि रद्द पोस्टल बैलेट के आंकड़े परस्पर विरोधी हैं — मतगणना के दिन 1,225 बताए गए, जबकि RTI से 2,738 का आंकड़ा सामने आया, और दोनों आंकड़े ECI ने एक ही तिथि के लिए दिए।
ECI ने खुद को पक्षकार से हटाने की माँग किस आधार पर की थी?
ECI ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का हवाला देते हुए कहा था कि चुनाव याचिका केवल चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के बीच का विवाद है और आयोग को इसमें पक्षकार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया।
पोस्टल बैलेट के आंकड़ों में अंतर कैसे सामने आया?
मतगणना के दिन 4 जून 2024 को रिटर्निंग ऑफिसर ने याचिकाकर्ता को 1,225 रद्द पोस्टल बैलेट की जानकारी दी थी। बाद में RTI के माध्यम से प्राप्त जानकारी में उसी दिन के लिए 2,738 पोस्टल बैलेट रद्द होने का उल्लेख था, जो पहले बताए गए आंकड़े से काफी अधिक है।
इस फैसले के बाद मामले में आगे क्या होगा?
ECI को अब जयपुर ग्रामीण चुनाव याचिका में पक्षकार के रूप में अपना पक्ष रखना होगा और रद्द पोस्टल बैलेट के परस्पर विरोधी आंकड़ों का स्पष्टीकरण देना होगा। इसके बाद राजस्थान हाई कोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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