सुप्रीम कोर्ट का नोटिस: बेवजह इस्तीफा देने वाले विधायकों से उपचुनाव खर्च वसूली की मांग पर केंद्र ECI को जवाब तलब
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण याचिका पर नोटिस जारी करते हुए केंद्र सरकार, चुनाव आयोग (ECI) और अन्य पक्षों से जवाब तलब किया है। याचिका में माँग की गई है कि बिना किसी कानूनी रूप से मान्य कारण के अपनी विधानसभा सीट से स्वेच्छा से इस्तीफा देने वाले और फिर चुनाव लड़ने वाले जनप्रतिनिधियों से उपचुनाव पर हुए सरकारी खर्च की वसूली की जाए। यह याचिका विशेष रूप से तमिलनाडु में AIADMK के छह पूर्व विधायकों के मामले से उपजी है, जिन्होंने चुनाव के कुछ हफ्तों के भीतर ही सीटें छोड़ दी थीं।
मामले की पृष्ठभूमि
4 मई को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के कुछ सप्ताह बाद ही AIADMK के छह विधायकों ने अपनी अपनी सीटों से इस्तीफा दे दिया और बाद में सत्तारूढ़ दल में शामिल हो गए। याचिका के अनुसार, इन विधायकों पर पहले से पार्टी व्हिप के विरुद्ध मतदान करने के आरोप में अयोग्यता की कार्यवाही चल रही थी, और इस्तीफे ने उन्हें उस कार्यवाही से बचाने का काम किया। इन इस्तीफों के परिणामस्वरूप हुए उपचुनावों ने सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला।
याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें
वकील के. सुथन द्वारा दायर इस याचिका में 'चुनाव व्यय सुरक्षा' प्रणाली लागू करने का निर्देश देने की माँग की गई है। इस प्रणाली के तहत बिना कानूनी रूप से मान्य ठोस कारण के इस्तीफा देने वाले विधायक को दोबारा चुनाव लड़ने से पहले उपचुनाव की पूरी लागत के बराबर राशि जमा करनी होगी। इसके अतिरिक्त, ऐसे विधायकों के लिए पाँच वर्षों की चुनावी अयोग्यता की भी माँग की गई है।
मद्रास हाईकोर्ट का रुख और सुप्रीम कोर्ट तक की यात्रा
याचिकाकर्ता ने पहले मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने 24 सितंबर को कहा था कि "किसी विधायी सीट से इस्तीफा देने का अधिकार स्वयं सदन की सदस्यता को नियंत्रित करने वाली संवैधानिक योजना का एक पहलू है और न्यायिक आदेश द्वारा इस पर अतिरिक्त वैधानिक शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं।" हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रस्तावित वित्तीय और दंडात्मक ढाँचा न्यायिक निर्देशों के नहीं, बल्कि विधायी नीति के दायरे में आता है।
चुनाव आयोग की पुरानी सिफारिश
याचिका में एक उल्लेखनीय तथ्य यह भी उठाया गया है कि चुनाव आयोग ने 2004 में चुनाव सुधारों के लिए अपने प्रस्तावों में स्वयं सिफारिश की थी कि अपनी सीट छोड़कर उपचुनाव कराने वाले उम्मीदवारों को संबंधित खर्च स्वयं वहन करना चाहिए। गौरतलब है कि यह सिफारिश दो दशक से अधिक समय बाद भी लागू नहीं हुई है।
बेंच और नोटिस
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, तमिलनाडु के मुख्य चुनाव अधिकारी और सीट छोड़ने वाले छह पूर्व विधायकों सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। यह मामला अब चुनावी जवाबदेही और संसदीय नैतिकता के व्यापक प्रश्न को अदालत के सामने रखता है — और देशभर में राजनीतिक दलबदल की आड़ में होने वाले रणनीतिक इस्तीफों पर लगाम लगाने की दिशा में एक अहम पड़ाव बन सकता है।