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तमिलनाडु विधानसभा सचिवालय आज देगा जवाब: एसाक्की सुबैया के इस्तीफा वापसी अनुरोध पर फैसला

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तमिलनाडु विधानसभा सचिवालय आज देगा जवाब: एसाक्की सुबैया के इस्तीफा वापसी अनुरोध पर फैसला

सारांश

तमिलनाडु में राजनीतिक नाटक का नया अध्याय — अंबासमुद्रम के पूर्व विधायक एसाक्की सुबैया इस्तीफा वापस लेना चाहते हैं, लेकिन सीट पहले ही रिक्त घोषित हो चुकी है। सचिवालय का बुधवार का जवाब तय करेगा कि उपचुनाव की राह कितनी सीधी है।

मुख्य बातें

अंबासमुद्रम के पूर्व विधायक एसाक्की सुबैया ने 28 अगस्त को विधानसभा सचिव को पत्र लिखकर इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध किया।
तमिलनाडु विधानसभा सचिवालय बुधवार, 3 सितंबर को इस अनुरोध पर औपचारिक जवाब देगा।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) अंबासमुद्रम सीट को पहले ही रिक्त घोषित कर गजट अधिसूचना जारी कर चुका है।
AIADMK के 25 विधायकों ने पार्टी आदेश की अवहेलना कर TVK सरकार के पक्ष में विश्वास मत दिया था।
पलानीस्वामी ने चार पूर्व विधायकों के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जो अभी विचाराधीन है।
सचिवालय सूत्रों के अनुसार सुबैया का अनुरोध कानूनी रूप से मान्य नहीं हो सकता।

तमिलनाडु विधानसभा सचिवालय बुधवार, 3 सितंबर 2026 को अंबासमुद्रम के पूर्व विधायक एसाक्की सुबैया के उस अनुरोध पर अपना औपचारिक जवाब देने की स्थिति में है, जिसमें उन्होंने अपना इस्तीफा वापस लेने की माँग की थी। यह घटनाक्रम तमिलनाडु में हाल के सत्ता परिवर्तन के बाद उपजी राजनीतिक उथल-पुथल में एक नया पेच जोड़ता है। सचिवालय सूत्रों के अनुसार, कानूनी स्थिति सुबैया के पक्ष में नहीं दिखती।

मुख्य घटनाक्रम

28 अगस्त को सुबैया ने विधानसभा सचिव शांति को एक पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने अनुरोध किया कि उनके पूर्व में दिए गए इस्तीफे पर कोई कार्रवाई न की जाए। उन्होंने अंबासमुद्रम के निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में बने रहने की इच्छा जताई। हालाँकि, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) इस सीट को पहले ही रिक्त घोषित कर आधिकारिक गजट में अधिसूचना प्रकाशित कर चुका है।

सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि सुबैया का यह अनुरोध कानूनी रूप से मान्य नहीं हो सकता, क्योंकि उनका इस्तीफा पहले ही स्वीकार किया जा चुका है और सीट रिक्त घोषित हो चुकी है। चुनाव कानून के तहत रिक्त सीट के लिए उपचुनाव कराना अनिवार्य है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह पूरा विवाद तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) में आई दरार से जुड़ा है। पार्टी के 25 विधायकों ने महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के निर्देश की अवहेलना करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) सरकार के समर्थन में विश्वास मत दिया।

इन विधायकों में धारापुरम की विधायक एस. सत्यभामा, अंबासमुद्रम के एसाक्की सुबैया, मदुरंतकम के मरगथम कुमारवेल और पेरुंदुरई के जयकुमार प्रमुख थे। इन चारों ने बाद में अचानक अपनी सीटें छोड़ दीं और TVK में शामिल हो गए।

पलानीस्वामी की कानूनी कार्रवाई

पलानीस्वामी ने स्पीकर जे.सी.टी. प्रभाकर के पास शिकायत दर्ज कराते हुए दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। हालाँकि, इस्तीफे बिना किसी विलंब के स्वीकार कर लिए गए और चुनाव आयोग ने चारों सीटें औपचारिक रूप से रिक्त घोषित कर दीं। इसके अलावा, पलानीस्वामी ने इन चार पूर्व विधायकों के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की है, जो अभी विचाराधीन है।

गौरतलब है कि पार्टी आदेश की अवहेलना करने वाले अन्य AIADMK विधायकों ने कथित तौर पर माफी माँगी, जिसके बाद स्पीकर ने पलानीस्वामी के अनुरोध पर उन्हें माफ कर दिया। लेकिन राहत मिलने के अगले ही दिन विरलीमलाई के विधायक डॉ. सी. विजयभास्कर और करूर के विधायक एम.आर. विजयभास्कर ने भी इस्तीफा देकर TVK का दामन थाम लिया।

संवैधानिक और कानूनी पक्ष

विधि विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार इस्तीफा स्वीकार होने और सीट रिक्त घोषित होने के बाद उसे वापस लेने का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

स्पीकर प्रभाकर बुधवार को मीडिया से बात कर इस मामले के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं को स्पष्ट कर सकते हैं। उपचुनाव की औपचारिक प्रक्रिया आरंभ होने से पहले सचिवालय का यह जवाब तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

आगे क्या होगा

सचिवालय के औपचारिक जवाब के बाद सुबैया के पास मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प बचेगा। तमिलनाडु में रिक्त हुई सीटों पर उपचुनाव की घोषणा चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है और इसकी प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक रूप से यह TVK सरकार की उस कमज़ोरी को उजागर करता है जो दल-बदल के सहारे खड़ी हुई है। असली सवाल यह है कि AIADMK के टूटे हुए विधायक अब किस हैसियत से राजनीति करेंगे — TVK में दोयम दर्जे के सदस्य बनकर, या उपचुनाव में नई पहचान बनाकर। मद्रास उच्च न्यायालय में लंबित मामला और उपचुनाव की अनिवार्यता मिलकर तमिलनाडु की राजनीति को आने वाले महीनों में और जटिल बनाएगी।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसाक्की सुबैया कौन हैं और उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया था?
एसाक्की सुबैया AIADMK के अंबासमुद्रम विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे। उन्होंने पार्टी महासचिव पलानीस्वामी के निर्देश की अवहेलना करते हुए TVK सरकार के समर्थन में विश्वास मत दिया और बाद में अपनी सीट से इस्तीफा देकर TVK में शामिल हो गए।
क्या इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उसे वापस लिया जा सकता है?
विधि विशेषज्ञों और सचिवालय सूत्रों के अनुसार, एक बार इस्तीफा स्वीकार होने और सीट रिक्त घोषित होने के बाद उसे वापस लेने का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। चुनाव आयोग गजट अधिसूचना जारी कर चुका है, जो इस प्रक्रिया को अंतिम बनाती है।
अंबासमुद्रम सीट पर आगे क्या होगा?
चुनाव कानून के तहत रिक्त घोषित सीट पर उपचुनाव कराना अनिवार्य है। चुनाव आयोग इस सीट सहित अन्य रिक्त सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर सकता है। सचिवालय के जवाब के बाद सुबैया के पास न्यायालय का विकल्प बचेगा।
AIADMK में यह दरार कैसे शुरू हुई?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK की जीत के बाद, जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया, तब AIADMK के 25 विधायकों ने पार्टी आदेश की अनदेखी कर सरकार के पक्ष में मत दिया। इसके बाद चार विधायकों ने इस्तीफा देकर TVK ज्वाइन किया, जिससे पार्टी में बड़ी टूट आई।
पलानीस्वामी ने इस मामले में क्या कानूनी कदम उठाए हैं?
पलानीस्वामी ने स्पीकर जे.सी.टी. प्रभाकर के पास दल-बदल विरोधी कानून के तहत शिकायत दर्ज कराई और मद्रास उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की है। यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
राष्ट्र प्रेस
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