एआईएडीएमके को चौथा झटका: अंबासमुद्रम विधायक इसाकी सुब्बैया का इस्तीफा, टीवीके में शामिल होने की अटकलें
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) की अंदरूनी उथल-पुथल 26 मई 2026 को और गहरी हो गई, जब अंबासमुद्रम से पार्टी विधायक इसाकी सुब्बैया ने तमिलनाडु विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। हालिया विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी छोड़ने वाले वे चौथे एआईएडीएमके विधायक बन गए हैं। सूत्रों के अनुसार, सुब्बैया के सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) में शामिल होने की संभावना है।
इस्तीफे की प्रक्रिया
सुब्बैया ने अपना इस्तीफा पत्र सौंपने के लिए विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, स्पीकर ने शुरू में टाइप किया हुआ इस्तीफा पत्र स्वीकार करने से मना कर दिया और उन्हें हाथ से लिखकर जमा करने का निर्देश दिया। इन निर्देशों का पालन करते हुए सुब्बैया ने हस्तलिखित इस्तीफा पत्र तैयार कर जमा किया, जिसे बाद में स्वीकार कर लिया गया।
पार्टी में दो फाड़
यह ऐसे समय में आया है जब एआईएडीएमके के विधायक दो खेमों में बंटे हुए हैं। एक गुट पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के प्रति वफादार है, जबकि दूसरा गुट सी. वे. शनमुगम के साथ जुड़ा है। विधानसभा में विश्वास मत के दौरान यह दरार और स्पष्ट हो गई, जब शनमुगम गुट ने टीवीके सरकार का समर्थन किया, जबकि ईपीएस नेतृत्व वाले गुट ने इसका कड़ा विरोध किया।
एक दिन पहले तीन और विधायकों ने छोड़ी पार्टी
सुब्बैया के इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले एआईएडीएमके के तीन विधायकों ने भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इनमें धारापुरम (आरक्षित) सीट से सत्यभामा, पेरुनदुरई सीट से जयकुमार और मदुरंतकम सीट से मरगथम कुमारवेल शामिल हैं। इन तीनों ने स्पीकर प्रभाकर को इस्तीफा सौंपने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता आधव अर्जुन की मौजूदगी में टीवीके की सदस्यता ग्रहण की।
इसाकी सुब्बैया: एक अनुभवी नेता
सुब्बैया तमिलनाडु की राजनीति में एक जाने-माने चेहरा हैं। हालिया विधानसभा चुनावों में उन्होंने अंबासमुद्रम सीट 10,245 मतों के बड़े अंतर से जीती थी। इससे पहले वे 2011 और 2021 के विधानसभा चुनावों में भी इसी सीट से विजयी रहे थे। जयललिता के नेतृत्व वाली सरकार में वे मंत्री पद भी संभाल चुके हैं।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि सुब्बैया के पार्टी छोड़ने के बाद एआईएडीएमके से और विधायकों के अलग होने की अटकलें तेज हो गई हैं। विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी के भीतर यह संकट विधानसभा चुनावों में हार के बाद से लगातार गहराता जा रहा है, और आने वाले दिनों में यह और विकराल रूप ले सकता है।