वेल्लामंडी नटराजन टीवीके में शामिल: एआईएडीएमके को एक और बड़ा झटका, जयललिता के बाद पार्टी टूटने का दिया हवाला
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के पूर्व पर्यटन मंत्री वेल्लामंडी नटराजन ने 28 मई 2025 को सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) की सदस्यता ग्रहण कर ली, जिससे विपक्षी दल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) को एक और गंभीर राजनीतिक धक्का लगा है। तिरुचि के इस वरिष्ठ नेता ने पार्टी छोड़ने की वजह बताते हुए कहा कि जे. जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके लगातार आंतरिक विभाजन और चुनावी पराजय से उबर नहीं पाई। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब एआईएडीएमके के चार विधायक पहले ही पार्टी छोड़कर टीवीके में जा चुके हैं।
नटराजन का राजनीतिक सफर
वेल्लामंडी नटराजन तमिलनाडु की राजनीति में मध्य क्षेत्र के एक मजबूत जमीनी संगठनकर्ता के रूप में जाने जाते रहे हैं। वे 2016 में तिरुचि ईस्ट विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके सरकार में पर्यटन मंत्री का दायित्व भी संभाला।
जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके में उत्पन्न सत्ता-संघर्ष के दौरान नटराजन ने पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम का पक्ष लिया। बाद में जब पन्नीरसेल्वम द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के निकट आ गए, तो नटराजन एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले एआईएडीएमके गुट में लौट आए। किंतु पार्टी के भीतर जारी आंतरिक संकट के चलते उन्होंने अंततः टीवीके का रुख किया।
टीवीके में शामिल होने की प्रक्रिया
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नटराजन ने बुधवार देर रात टीवीके के महासचिव एन. आनंद से मुलाकात की और औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने टीवीके नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पार्टी ने पेरियार, सी.एन. अन्नादुरई, एम.जी. रामचंद्रन और जयललिता जैसे नेताओं की विचारधारा को अपनाया है, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने यह निर्णय लिया।
नटराजन के अपने शब्दों में
टीवीके में शामिल होने के बाद नटराजन ने कहा, 'मैं लंबे समय से पार्टी में हूं। जयललिता के निधन के बाद पार्टी टूट गई और लगातार हार का सामना करना पड़ा। मैंने कई बार सुझाव दिया कि सभी नेता मिलकर भविष्य की दिशा तय करें, लेकिन मेरी बात नहीं मानी गई। चुनाव के बाद भी पार्टी में विभाजन जारी रहा। यह ठीक नहीं है।'
एआईएडीएमके की प्रतिक्रिया
एआईएडीएमके सांसद धनपाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों से मामले की जांच कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि तमिलनाडु की राजनीति में बड़े पैमाने पर हॉर्स ट्रेडिंग और धन के लेन-देन के ज़रिए विधायकों को तोड़ा जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
एआईएडीएमके पर बढ़ता दबाव
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एआईएडीएमके को इस तरह के पलायन का सामना करना पड़ा हो। नटराजन से पहले पार्टी के चार विधायक भी टीवीके में शामिल हो चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि जयललिता के बाद से एआईएडीएमके एक मजबूत एकीकृत नेतृत्व के अभाव में लगातार कमजोर होती जा रही है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य में टीवीके सत्ता में है और विपक्ष को एकजुट रखना एआईएडीएमके के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।