ब्रिक्स समिट में पहलगाम हमले की निंदा: मोदी की कूटनीति पर BJP JDU नेताओं ने जताया गर्व
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 'नई दिल्ली घोषणापत्र' जारी होने और उसमें पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा किए जाने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक सफलता की भूरि भूरि प्रशंसा की है। नेताओं का कहना है कि ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों द्वारा एकजुट होकर आतंकवाद विरोधी प्रस्ताव को स्वीकार किया जाना वैश्विक मंच पर भारत की एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि है।
मुख्य घटनाक्रम
13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में जारी 'नई दिल्ली घोषणापत्र' में पहलगाम आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा की गई। सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी देशों ने आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया। यह ऐसे समय में आया है जब पहलगाम हमले के बाद भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में सक्रिय रहा है।
गौरतलब है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत पहुँचे, जिसे कूटनीतिक हलकों में गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत चीन संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा और जेडीयू नेताओं की प्रतिक्रिया
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए कहा, "ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के ज़रिए दुनिया के 11 अहम देशों का सहयोग मिला।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ब्रिक्स मंच के माध्यम से बिहार के मखाना और सत्तू को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया गया, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को विशेष धन्यवाद दिया।
जनता दल (यूनाइटेड) के नेता श्याम रजक ने कहा कि "प्रधानमंत्री की कुशल कूटनीति और प्रबंधन के तहत आतंकवाद के खिलाफ एक संयुक्त प्रस्ताव पेश किया गया और सभी भाग लेने वाले देशों ने इसे स्वीकार किया।" उन्होंने इसे प्रधानमंत्री के प्रभावी नेतृत्व का प्रमाण बताया।
भाजपा नेता रैना की पाकिस्तान पर तीखी टिप्पणी
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता रविंदर रैना ने पहलगाम हमले की ब्रिक्स देशों द्वारा निंदा किए जाने को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, "यह आतंकवाद किसी के भी हित में नहीं है। इस आतंकवाद की वजह से कश्मीर ने अनगिनत ज़ख्म सहे हैं।" उन्होंने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस देश ने आतंकवादियों को पाला पोसा, प्रशिक्षित किया और हथियार मुहैया कराए, आज वही देश आतंकवाद का शिकार बन रहा है।
रैना ने भारत चीन संबंधों पर भी बात की और कहा कि "गलवान घाटी की घटना के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव आ गया था, लेकिन अब लगातार कूटनीतिक बातचीत से सीमा और एलएसी से जुड़े कई मुद्दों को सुलझा लिया गया है।"
जेकेएनसी विधायक की व्यापक निंदा की माँग
जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के विधायक एडवोकेट रियाज अहमद खान ने पहलगाम हमले की निंदा का स्वागत करते हुए एक अतिरिक्त माँग भी उठाई। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में सिख आबादी रहती है और चिट्टीसिंहपोरा में 36 सिखों के नरसंहार की निंदा भी इसी मंच पर की जानी चाहिए थी।
खान ने यह भी कहा कि "हमारा मकसद है कि 2047 तक हमारा देश एक विकसित भारत बने। बड़े देशों के साथ हमारे रिश्ते जितने मज़बूत होंगे, हमारे लिए उतना ही अच्छा होगा।" यह बयान विकसित भारत के लक्ष्य को कूटनीतिक सक्रियता से जोड़ने की व्यापक सहमति को दर्शाता है।
आगे की राह
ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद की स्पष्ट निंदा के बाद अब नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि भारत इस कूटनीतिक समर्थन को ठोस द्विपक्षीय और बहुपक्षीय कार्रवाई में कैसे परिवर्तित करता है। भारत चीन संबंधों के नए अध्याय और ब्रिक्स में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय अलगाव का संदेश — दोनों मिलकर भारत की बहुआयामी कूटनीतिक रणनीति की तस्वीर पेश करते हैं।