हेमंत सोरेन ने PM मोदी को लिखा पत्र: झारखंड में ST, SC, OBC और अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति राशि बढ़ाने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC), पिछड़ा वर्ग (BC) और अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजनाओं में केंद्रीय सहायता बढ़ाने की माँग की है। 30 जुलाई को भेजे गए इस पत्र में सोरेन ने आँकड़ों के साथ यह रेखांकित किया कि केंद्र से मिलने वाली राशि राज्य की माँग के मुकाबले बेहद कम है, जिससे लाखों पात्र विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
वित्तीय अंतर की गंभीर तस्वीर
पत्र में मुख्यमंत्री ने पिछड़ा वर्ग की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के आँकड़े पेश किए। वर्ष 2024-25 में राज्य ने ₹66.14 करोड़ की माँग की थी, जबकि केंद्र से केवल ₹12.61 करोड़ प्राप्त हुए। वर्ष 2025-26 में ₹45.91 करोड़ की माँग के विरुद्ध मात्र ₹3.95 करोड़ जारी किए गए।
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में भी यही स्थिति है। 2024-25 में ₹353.21 करोड़ की माँग के मुकाबले केंद्र ने केवल ₹33.57 करोड़ दिए, और 2025-26 में ₹370.87 करोड़ की माँग के बावजूद केवल ₹58.22 करोड़ उपलब्ध कराए गए।
ST विद्यार्थियों के लिए शून्य आवंटन
सोरेन ने पत्र में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र की ओर से अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए प्री और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत कोई राशि जारी नहीं की गई। 2024-25 में जारी ₹200 करोड़ भी पूर्व वर्षों के बकाये और आंशिक केंद्रीय अंशदान से संबंधित थे, न कि चालू वर्ष के नए आवंटन।
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड की बड़ी आबादी आदिवासी समुदायों से है और राज्य की भौगोलिक परिस्थितियाँ पहले से ही शैक्षणिक पहुँच को सीमित करती हैं।
छात्रवृत्ति दरों में असमानता पर आपत्ति
मुख्यमंत्री ने ST, SC और BC विद्यार्थियों के बीच प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की दरों में विसंगति को भी उठाया। वर्तमान में ST विद्यार्थियों को ₹3,000 प्रति छात्र, SC विद्यार्थियों को ₹3,500 और पिछड़ा वर्ग को ₹4,000 प्रति छात्र मिलते हैं। सोरेन ने इस असमानता को दूर कर दरें समान करने का आग्रह किया।
अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना बंद होने पर चिंता
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि झारखंड में अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी 23.29 प्रतिशत है, फिर भी वर्ष 2021-22 के बाद से केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के तहत कोई राशि जारी नहीं की है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को पुनः शुरू करने का अनुरोध किया।
झारखंड की माँग और आगे की राह
सोरेन ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि आर्थिक रूप से पिछड़े और विकासशील राज्यों के लिए विशेष नीति बनाई जाए और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति सहित सभी योजनाओं में केंद्रीय अंशदान बढ़ाया जाए। झारखंड सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण की व्यवस्था को समुदाय-आधारित के बजाय अभिभावकों की वार्षिक आय के आधार पर लागू किया है, ताकि सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके। गौरतलब है कि यह पत्र ऐसे समय में आया है जब राज्य और केंद्र के बीच वित्तीय साझेदारी की बहस कई मोर्चों पर जारी है। केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और इस पर आगे की कार्रवाई पर सभी की नज़र रहेगी।