14 सितंबर 2026
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गणेश चतुर्थी 2026: कर्नाटक में धार्मिक उत्साह, बेंगलुरु में 3,000 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरों से निगरानी

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गणेश चतुर्थी 2026: कर्नाटक में धार्मिक उत्साह, बेंगलुरु में 3,000 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरों से निगरानी

सारांश

कर्नाटक में गणेश चतुर्थी 2026 का जश्न — डोड्डा गणपति मंदिर में 1,000 लीटर दूध से अभिषेक, मैसूरु के 101 गणेश मंदिर में उमड़े श्रद्धालु और दावणगेरे में 2,500 से अधिक मूर्तियाँ। बेंगलुरु में 3,000 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से कड़ी निगरानी।

मुख्य बातें

14 सितंबर 2026 को कर्नाटक भर में गौरी-गणेश उत्सव धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।
बेंगलुरु में मौजूदा नेटवर्क के अतिरिक्त 3,000 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए; KSRP तैनात और ड्रोन से हवाई निगरानी जारी।
बसवनगुडी के डोड्डा गणपति मंदिर में सुबह 3 बजे से भीड़; 1,000 लीटर दूध से विशेष दूध अभिषेक किया गया।
मैसूरु के 101 गणेश मंदिर में 101 परिवारों द्वारा स्थापित मूर्तियों के दर्शन के लिए भक्त कतार में।
दावणगेरे में 2,500 से अधिक गणेश मूर्तियाँ स्थापित; 13 संवेदनशील इलाकों में विशेष सुरक्षा प्रबंध।
प्रशासन ने शांतिपूर्ण उत्सव और विसर्जन के दौरान सुरक्षा नियमों के पालन की अपील की।

गणेश चतुर्थी 2026 के अवसर पर 14 सितंबर को कर्नाटक भर में गौरी-गणेश उत्सव धार्मिक जोश और सामूहिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। बेंगलुरु में पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है और पहले से मौजूद सीसीटीवी नेटवर्क के अतिरिक्त संवेदनशील व अति-संवेदनशील इलाकों में लगभग 3,000 नए कैमरे लगाए गए हैं। भक्त मंदिरों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी तादाद में उमड़े हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

कर्नाटक स्टेट रिजर्व पुलिस (KSRP) की टुकड़ियों को शहर के अहम स्थानों पर तैनात किया गया है। हवाई निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है और पुलिस कमांड सेंटर से पूरे शहर की गतिविधियों पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है। लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं और जुलूस के रास्तों पर विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बड़े त्योहारों पर भीड़ प्रबंधन और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहती है।

मुख्य मंदिरों में उत्सव का माहौल

बेंगलुरु के बसवनगुडी स्थित ऐतिहासिक डोड्डा गणपति मंदिर में सोमवार को सुबह 3 बजे से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो गई। मंदिर के पुजारियों ने सुबह 2.30 बजे विशेष पूजा-अर्चना की, जिसके बाद 1,000 लीटर दूध से दूध अभिषेक किया गया। सुबह 6 बजे महा मंगलारती संपन्न हुई और मंदिर रात 12.30 बजे तक भक्तों के लिए खुला रहेगा।

मंदिर प्रबंधन के प्रमुख श्रीनिवास ने बताया कि सुबह 6 बजे से आधी रात तक भक्तों को प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है।

मैसूरु और अन्य शहरों में विशेष आयोजन

मैसूरु के ऐतिहासिक 101 गणेश मंदिर में भी सुबह 3 बजे से विशेष पूजा आरंभ हुई और भक्त सभी 101 गणेश मूर्तियों के दर्शन के लिए कतार में खड़े हो गए। मंदिर के मुख्य पुजारी सुनील के अनुसार, 101 परिवारों ने मिलकर मंदिर परिसर में ये मूर्तियाँ स्थापित की हैं — पहली सीढ़ी पर 32, दूसरी पर 26, तीसरी पर 24 और चौथी पर 18 मूर्तियाँ हैं, जबकि सबसे ऊपर गणेश जी की एक बड़ी मूर्ति स्थापित है, जिससे कुल संख्या 101 होती है। भक्तों का विश्वास है कि यहाँ अक्षत (चावल) चढ़ाने और प्रार्थना करने से पापों व दोषों से मुक्ति मिलती है।

हुब्बल्ली में भी त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, जहाँ ग्रामीण इलाकों से लोग बैलगाड़ियों में आकर मूर्तियाँ खरीद रहे हैं। के.आर. मार्केट, बेंगलुरु में सुबह 5 बजे से ही भारी भीड़ के कारण आवागमन बाधित रहा।

दावणगेरे में 2,500 से अधिक मूर्तियाँ स्थापित

दावणगेरे में उत्सव के तहत 2,500 से अधिक गणेश मूर्तियाँ स्थापित की जा रही हैं। पुलिस ने 13 संवेदनशील इलाकों में विशेष सुरक्षा प्रबंध किए हैं। गौरतलब है कि यहाँ के लोग कुन्नूर इलाके की मूर्तियों को विशेष तवज्जो देते हैं, क्योंकि उनकी मान्यता है कि वहाँ की मिट्टी को सूफी संत संता शिशुनाला शरीफ का आशीर्वाद प्राप्त है — यह आस्था सांप्रदायिक सद्भाव की एक मिसाल है।

प्रशासन की अपील

राज्य भर के अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे उत्सव शांतिपूर्ण ढंग से मनाएँ, आपसी भाईचारा बनाए रखें और जुलूस तथा मूर्ति विसर्जन के दौरान सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करें। अगले कुछ दिनों में विसर्जन जुलूसों के दौरान प्रशासनिक चौकसी और बढ़ाए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन निगरानी यह संकेत देती है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में तकनीक-आधारित सुरक्षा अब मानक बनती जा रही है — लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या यह निगरानी केवल भीड़ प्रबंधन के लिए है या नागरिक स्वतंत्रता पर असर डालती है। दावणगेरे में 'संता शिशुनाला शरीफ की मिट्टी' की मान्यता और कुन्नूर की मूर्तियों की माँग यह दर्शाती है कि भारत में धार्मिक उत्सव अक्सर सांप्रदायिक सौहार्द की जीवंत मिसाल होते हैं — एक पहलू जिसे मुख्यधारा की कवरेज प्रायः अनदेखा कर देती है। प्रशासन की शांति-अपील और कड़े सुरक्षा प्रबंध दोनों एक साथ चलना यही बताता है कि उत्सव की राजनीतिक संवेदनशीलता अभी भी बनी हुई है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश चतुर्थी 2026 पर बेंगलुरु में सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए हैं?
बेंगलुरु में पहले से मौजूद सीसीटीवी नेटवर्क के अलावा संवेदनशील इलाकों में लगभग 3,000 नए कैमरे लगाए गए हैं। KSRP की टुकड़ियाँ अहम स्थानों पर तैनात हैं और हवाई निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है।
बेंगलुरु का डोड्डा गणपति मंदिर गणेश चतुर्थी पर कितने बजे खुलता है?
इस वर्ष डोड्डा गणपति मंदिर, बसवनगुडी में सोमवार को सुबह 3 बजे से भक्तों की भीड़ जमा हो गई और मंदिर रात 12.30 बजे तक खुला रहेगा। सुबह 2.30 बजे विशेष पूजा और 1,000 लीटर दूध से दूध अभिषेक किया गया।
मैसूरु के 101 गणेश मंदिर में मूर्तियाँ कैसे स्थापित हैं?
मंदिर के मुख्य पुजारी सुनील के अनुसार, 101 परिवारों ने मिलकर 101 मूर्तियाँ स्थापित की हैं। पहली सीढ़ी पर 32, दूसरी पर 26, तीसरी पर 24 और चौथी पर 18 मूर्तियाँ हैं, जबकि शीर्ष पर एक बड़ी मूर्ति है।
दावणगेरे में गणेश उत्सव की क्या खासियत है?
दावणगेरे में 2,500 से अधिक गणेश मूर्तियाँ स्थापित की जा रही हैं और 13 संवेदनशील इलाकों में विशेष सुरक्षा है। यहाँ के लोग कुन्नूर इलाके की मूर्तियाँ पसंद करते हैं, क्योंकि उनकी मान्यता है कि वहाँ की मिट्टी को सूफी संत संता शिशुनाला शरीफ का आशीर्वाद मिला है।
कर्नाटक में गणेश उत्सव के दौरान प्रशासन ने क्या अपील की है?
राज्य के अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाएँ, आपसी भाईचारा बनाए रखें और जुलूस व मूर्ति विसर्जन के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें।
राष्ट्र प्रेस
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