14 सितंबर 2026
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अमेरिकी कोर CPI महंगाई 0.3% उछली, फेड दर बढ़ोतरी की 88% संभावना से सोना $4,340 पर लुढ़का

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अमेरिकी कोर CPI महंगाई 0.3% उछली, फेड दर बढ़ोतरी की 88% संभावना से सोना $4,340 पर लुढ़का

सारांश

अमेरिका में कोर CPI महंगाई उम्मीद से अधिक आई, फेड दर बढ़ोतरी की संभावना 88% तक पहुंची। सोना $4,340 और चांदी $64 पर फिसली। ऊपर से पश्चिम एशिया में हौथी हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव — दोहरे दबाव में फंसे कीमती धातु बाज़ार की दिशा अब फेड के फैसले पर टिकी है।

मुख्य बातें

स्पॉट गोल्ड 14 सितंबर 2026 को $4,340 प्रति औंस पर, दिनभर में 0.2% और पिछले सप्ताह कुल 1.8% की गिरावट।
चांदी 0.8% गिरकर $64 प्रति औंस पर; प्लैटिनम और पैलेडियम में भी नरमी।
अमेरिकी Core CPI अगस्त में मासिक आधार पर 0.3% बढ़ा — बाज़ार अपेक्षाओं से अधिक।
बाज़ार अब फेड की सितंबर बैठक में दर वृद्धि की 88% संभावना देख रहा है।
MCX पर अक्टूबर सोना वायदा ₹1,52,655 प्रति 10 ग्राम , सितंबर चांदी वायदा ₹2,34,886 प्रति किलोग्राम ।
ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल से ऊपर; होर्मुज जलडमरूमध्य में हमले के बाद सऊदी अरब ने पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन अस्थायी रूप से बंद की।

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में स्पॉट गोल्ड 14 सितंबर 2026 को $4,340 प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा — दिनभर में करीब 0.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ। अमेरिका में अगस्त के उम्मीद से अधिक महंगाई के आंकड़ों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इसी सप्ताह ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका को और पुख्ता कर दिया है, जिसके चलते सुरक्षित निवेश की श्रेणी में रखे जाने वाले सोने-चांदी में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।

महंगाई के आंकड़े और बाज़ार की प्रतिक्रिया

शुक्रवार को जारी अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर मापी जाने वाली कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Core CPI) आधारित महंगाई अगस्त 2026 में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत बढ़ी — जो बाज़ार की अपेक्षाओं से अधिक रही। इसने यह स्पष्ट संकेत दिया कि महंगाई पर अभी पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।

इस आंकड़े के बाद कारोबारियों के बीच यह धारणा मज़बूत हुई है कि फेड अपनी आगामी सितंबर बैठक में दरें बढ़ाएगा। बाज़ार अब इस बैठक में दर वृद्धि की 88 प्रतिशत संभावना देख रहा है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने जैसी 'नॉन-यील्डिंग' यानी बिना ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि निवेशक तब ब्याज देने वाले विकल्पों की ओर रुख करते हैं।

सोना-चांदी और अन्य धातुओं का हाल

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में स्पॉट गोल्ड पिछले सप्ताह के दौरान कुल 1.8 प्रतिशत कमज़ोर रहा। चांदी करीब 0.8 प्रतिशत गिरकर $64 प्रति औंस के स्तर पर आ गई। प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी नरमी दर्ज की गई।

घरेलू मोर्चे पर गणेश चतुर्थी के अवसर पर सोमवार को MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) के सोना और चांदी वायदा बाज़ार का सुबह का सत्र बंद रहा। कारोबार केवल शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे IST तक के शाम के सत्र में हुआ। MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना वायदा ₹1,52,655 प्रति 10 ग्राम के आसपास और सितंबर डिलीवरी वाली चांदी ₹2,34,886 प्रति किलोग्राम के स्तर पर रही।

पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतें

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को भी प्रभावित किया है। ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। हौथी बलों ने यमन के महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर कब्जा कर लिया है, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार के एक बड़े हिस्से की जीवन-रेखा माने जाते हैं।

रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में ड्रोन हमलों और एक व्यापारिक पोत पर हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

विश्लेषकों का कहना है कि तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक महंगाई को और हवा दे सकती हैं, जिससे प्रमुख केंद्रीय बैंकों पर सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। यह ऐसे समय में आया है जब पहले से ही महंगाई के मोर्चे पर चिंताएं गहरी हैं। इसी वजह से निवेशकों ने सोने और चांदी में नई खरीदारी से फिलहाल दूरी बनाए रखी है।

गौरतलब है कि ऊंची दरों के माहौल में सोने पर दबाव की यह कोई नई परिघटना नहीं है — 2022-23 में भी फेड के आक्रामक दर-बढ़ोतरी चक्र के दौरान सोना दबाव में रहा था। हालांकि भू-राजनीतिक जोखिम उस दबाव को सीमित करने का काम कर सकते हैं।

आगे क्या होगा

आने वाले दिनों में निवेशकों की निगाहें पूरी तरह फेड की नीति बैठक और ब्याज दर संबंधी निर्णय पर टिकी रहेंगी। यदि फेड अपेक्षा के अनुरूप दरें बढ़ाता है और आगे भी सख्त रुख के संकेत देता है, तो सोने और चांदी पर दबाव जारी रह सकता है। दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता कीमती धातुओं को कुछ सहारा दे सकती है। अगले सप्ताह की दिशा मुख्यतः इन दो कारकों पर निर्भर होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव जो तेल महंगाई के जरिए उसी सख्ती को और लंबा खींच सकता है। विरोधाभास यह है कि आमतौर पर संकट के समय सोना चढ़ता है, लेकिन इस बार वही संकट (पश्चिम एशिया में युद्ध जोखिम) ऊर्जा महंगाई → फेड सख्ती → उच्च 'ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट' की श्रृंखला के जरिए सोने को नीचे दबा रहा है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि $4,340 का स्तर ऐतिहासिक रूप से ऊंचा है — गिरावट आई है, लेकिन सोना अभी भी बहु-वर्षीय उच्च के करीब है, जो दीर्घकालिक निवेशकों के लिए असली कहानी है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोने की कीमतें 14 सितंबर 2026 को क्यों गिरीं?
अमेरिका में अगस्त का Core CPI 0.3% बढ़ा जो बाज़ार अपेक्षाओं से अधिक रहा, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना 88% तक पहुंच गई। ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी नॉन-यील्डिंग परिसंपत्तियों के आकर्षण को कम करती हैं, इसलिए निवेशकों ने बिकवाली की।
आज MCX पर सोने और चांदी का भाव क्या है?
MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना वायदा ₹1,52,655 प्रति 10 ग्राम और सितंबर डिलीवरी वाली चांदी ₹2,34,886 प्रति किलोग्राम के स्तर पर रही। गणेश चतुर्थी के कारण सोमवार को केवल शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे IST तक कारोबार हुआ।
अमेरिकी फेड की ब्याज दर बढ़ोतरी से सोने पर क्या असर पड़ता है?
जब फेड ब्याज दरें बढ़ाता है तो डॉलर-आधारित बॉन्ड और जमा योजनाएं अधिक आकर्षक हो जाती हैं। सोना कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए उसका 'ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट' बढ़ जाता है और निवेशक उससे दूर होने लगते हैं। यही कारण है कि उच्च ब्याज दर के माहौल में सोना आमतौर पर दबाव में रहता है।
पश्चिम एशिया के तनाव का सोने-तेल पर क्या असर है?
हौथी बलों द्वारा यमन में बंदरगाहों पर कब्जे और होर्मुज जलडमरूमध्य में ड्रोन हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल से ऊपर चला गया है। सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन अस्थायी रूप से बंद की है। विश्लेषकों के अनुसार ऊंची तेल कीमतें वैश्विक महंगाई बढ़ाकर केंद्रीय बैंकों को सख्त रुख बनाए रखने पर मजबूर करती हैं, जो अंततः सोने पर भी दबाव डालता है।
आगे सोने की कीमतों की दिशा क्या होगी?
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले सप्ताह में सोने-चांदी की दिशा मुख्यतः फेडरल रिजर्व के दर निर्णय और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि फेड दरें बढ़ाता है और सख्त रुख जारी रखने के संकेत देता है तो दबाव बने रहने की संभावना है, हालांकि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितता सोने को कुछ सहारा दे सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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