मध्य पूर्व के तनाव के बीच सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट; चांदी 3,300 रुपए से अधिक सस्ती
सारांश
Key Takeaways
- सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है।
- महंगाई की आशंका बढ़ने के चलते बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरीदारी में तेजी देखी जा रही है।
- विश्लेषक सोने के लिए 1,48,000 रुपए का स्तर महत्वपूर्ण मानते हैं।
- चांदी के भविष्य का दृष्टिकोण सकारात्मक है।
मुंबई, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सोमवार को अमेरिकी डॉलर की मजबूती और महंगाई के खतरे के चलते कीमती धातुओं, जैसे कि सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। इससे निकट भविष्य में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों में कमी आई है।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर उम्मीद थी कि सोने और चांदी की कीमतें और बढ़ेंगी। लेकिन इसके विपरीत, इनकी कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।
सोमवार को एमसीएक्स पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना वायदा 1,59,826 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि मई डिलीवरी वाली चांदी वायदा 2,60,743 रुपए प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर पहुँच गई।
खबर लिखे जाने तक (दोपहर लगभग 12.18 बजे) एमसीएक्स पर 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट 881 रुपए या 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,60,678 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, एमसीएक्स पर 5 मई एक्सपायरी वाला सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट 3,378 रुपए या 1.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,64,907 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था।
इस बीच, अमेरिकी डॉलर 99.34 के तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुँच गया, जो इंट्राडे आधार पर लगभग 0.36 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। डॉलर की मजबूती से अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए सोना और चांदी खरीदना महंगा हो जाता है।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी बॉंड यील्ड भी बढ़ गई है और 10 साल के बॉंड की यील्ड एक महीने के उच्च स्तर पर पहुँच गई है। इससे बिना ब्याज देने वाली धातुओं जैसे सोने और चांदी को रखने की लागत बढ़ जाती है।
कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। तेल की कीमत 27 प्रतिशत बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई, जो 2022 के बाद पहली बार है जब दोनों प्रमुख तेल मानक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गए हैं। यह तेजी मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण आई है।
तेल की कीमतों में इस उछाल से महंगाई बढ़ने की आशंका बढ़ गई है, जिसके चलते बाजार में यह उम्मीद बढ़ रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व 18 मार्च को होने वाली दो दिवसीय नीति बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है।
बाजार के अनुमानों के अनुसार, जून में भी फेड के ब्याज दरों को बिना बदलाव के रखने की संभावना 51 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जो पिछले सप्ताह 43 प्रतिशत से कम थी।
विश्लेषकों का कहना है कि सोने के लिए 1,48,000 रुपए का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 1,53,000 रुपए का स्तर रेजिस्टेंस हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में 5,000 डॉलर के आसपास मजबूत खरीदारी देखी जा रही है। यदि कीमतें 5,400 से 5,600 डॉलर के ऊपर स्थिर रहती हैं, तो सोना नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद चांदी का मध्यम और लंबी अवधि का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां और बाजार के संकेत इसके पक्ष में हैं।