अमेरिका-ईरान तनाव के कारण सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार वृद्धि

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अमेरिका-ईरान तनाव के कारण सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार वृद्धि

सारांश

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के साथ-साथ डॉलर में गिरावट ने सोने और चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की। जानें इस स्थिति का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ा है।

Key Takeaways

अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कीमतों में तेजी आई है। सोने का वायदा 1,60,719 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंचा। चांदी की कीमत 2,68,301 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंची। सेबी के नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। बाजार में दीर्घकालिक रुझान मजबूत बना हुआ है।

मुंबई, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा डॉलर में हल्की गिरावट के कारण शुक्रवार को कीमती धातुओं, विशेषकर सोने और चांदी की कीमतों में महान तेजी देखी गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी के सोने का वायदा भाव इंट्रा-डे में 0.30 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,60,719 रुपए प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वहीं, मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने दिन के कारोबार में 3 प्रतिशत से अधिक की उछाल के साथ 2,68,301 रुपए प्रति किलोग्राम पर अपनी स्थिति मजबूत की।

हालांकि, जब रिपोर्ट तैयार की जा रही थी (दोपहर करीब 2.13 बजे) 2 अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट का गोल्ड फ्यूचर 0.40 प्रतिशत यानी 645 रुपए की वृद्धि के साथ 1,60,354 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, 5 अप्रैल एक्सपायरी वाला सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट 6,981 रुपए यानी 2.69 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,66,650 रुपए पर ट्रेड करता नजर आया।

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता में कोई ठोस प्रगति न होने के कारण भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है। अमेरिका द्वारा सैनिक तैनाती बढ़ाने के बाद दोनों देशों के बीच चेतावनियों का आदान-प्रदान हुआ है। इसके साथ ही, वॉशिंगटन ने तेल और हथियार निर्यात से जुड़े नए प्रतिबंधों के माध्यम से ईरान पर दबाव बढ़ाया है, जिससे सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के रूप में सोने और चांदी की मांग बढ़ गई है।

डॉलर इंडेक्स 0.04 प्रतिशत घटकर 97.76 पर पहुंच गया, जिससे विदेशी मुद्रा धारकों के लिए डॉलर आधारित बुलियन थोड़ी सस्ती हो गई। फिर भी, यह हल्की गिरावट डॉलर में हाल की मजबूती के बाद आई, जिसने उसे चार हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया था, जो सोने की कीमतों में वृद्धि पर कुछ हद तक अंकुश लगा रहा है।

इसके अतिरिक्त, अमेरिका में ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदें भी कमजोर पड़ी हैं, क्योंकि वहाँ की अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत मिल रहे हैं।

इस बीच, पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड्स द्वारा अपने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में रखे गए भौतिक सोने और चांदी के मूल्यांकन के ढांचे में बदलाव किया है।

इस कदम का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार की परिस्थितियों के अनुसार कीमतें तय करना, पारदर्शिता बढ़ाना और सभी फंड हाउस के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया को एक समान बनाना है। नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।

एक विश्लेषक के अनुसार, एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स 1,80,000-1,81,000 रुपए के रिकॉर्ड उच्च स्तर से करेक्शन के बाद 1,55,000 रुपए से 1,65,000 रुपए के दायरे में स्थिर हो रहा है। एक्सपर्ट ने आगे कहा कि सोने का दीर्घकालिक रुझान अब भी मजबूत है और मौजूदा स्थिरता गिरावट नहीं, बल्कि एक स्वस्थ विराम का संकेत है।

विश्लेषक ने यह भी कहा कि एमसीएक्स चांदी के लिए 2,25,000-2,35,000 रुपए का स्तर एक मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। यदि कीमतें इस स्तर से ऊपर बनी रहती हैं, तो मध्य अवधि में यह 3,00,000 से 3,25,000 रुपए तक पहुंच सकती है।

Point of View

जो निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर आकर्षित करता है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि का कारण क्या है?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और डॉलर में हल्की कमजोरी के चलते सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आई है।
क्या सोने की कीमतों में और वृद्धि होने की संभावना है?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि कीमतें 2,25,000-2,35,000 रुपए के स्तर से ऊपर बनी रहती हैं, तो सोने की कीमतें बढ़ सकती हैं।
ब्याज दरों में कटौती की संभावना का क्या असर पड़ेगा?
ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर होने से सोने की कीमतों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
क्या सेबी के नए नियमों का सोने की कीमतों पर असर पड़ेगा?
हाँ, सेबी के नए नियम घरेलू बाजार में पारदर्शिता और कीमतों की स्थिरता को बढ़ा सकते हैं।
क्या यह स्थिति निवेशकों के लिए सुरक्षित है?
बढ़ते तनाव के बीच सोना और चांदी सुरक्षित निवेश के विकल्प बन सकते हैं।
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