उड़ता महाराष्ट्र: शिवसेना (यूबीटी) का आरोप — BJP संरक्षण में पल रहे नशा तस्कर और शराब निर्माता
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 3 सितंबर 2026 को पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक तीखे संपादकीय के ज़रिए महाराष्ट्र सरकार पर सीधा हमला बोला। यह हमला तब आया जब महाराष्ट्र सरकार ने 2029 तक राज्य को नशामुक्त बनाने का संकल्प सार्वजनिक रूप से घोषित किया। ठाकरे गुट ने इस पहल को 'पाखंडी' और 'घटना-आधारित तमाशा' बताते हुए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए।
मुख्य आरोप: राजनीतिक संरक्षण में पल रहा नशे का कारोबार
सामना के संपादकीय में दावा किया गया कि महाराष्ट्र में अवैध मादक पदार्थों के तस्कर, शराब निर्माता, सिगार-सिगरेट विक्रेता और भांग-गांजा बेचने वाले कथित तौर पर BJP के राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहे हैं। संपादकीय में यह भी कहा गया कि 'BJP की राजनीति का पहिया इसी नशीले पदार्थों के व्यापार पर घूमता है।' शिवसेना (यूबीटी) ने सवाल उठाया कि जो पार्टी खुद इस कारोबार की संरक्षक है, वह राज्य को नशामुक्त बनाने का बीड़ा कैसे उठा सकती है।
एक दशक की सत्ता पर सवाल
ठाकरे गुट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 2014 से केंद्र में सत्तासीन है, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लगभग उतने ही समय से महाराष्ट्र की राजनीति में निर्णायक भूमिका में हैं। ऐसे में एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बावजूद नशीले पदार्थों के व्यापार पर अंकुश न लगा पाना, आलोचकों के अनुसार, इस नई घोषणा की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
नासिक, पुणे, सतारा: भंडाफोड़ के बाद भी कार्रवाई नहीं?
नासिक, पुणे और सतारा में अवैध विनिर्माण इकाइयों के पूर्व भंडाफोड़ का हवाला देते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने मुख्यमंत्री फडणवीस के नेतृत्व वाले राज्य गृह विभाग पर भूमि आवंटन और रासायनिक गोली कारखानों से जुड़ी जाँचों को कथित तौर पर दबाने का आरोप लगाया। संपादकीय में चेतावनी दी गई कि ये क्षेत्र राज्य को 'उड़ता महाराष्ट्र' में बदल रहे हैं — एक ऐसा संदर्भ जो पंजाब में नशे की त्रासदी को उजागर करने वाली फिल्म की याद दिलाता है।
शुगर मिल मालिकों और BJP पर निशाना
सामना के संपादकीय में यह भी कहा गया कि शराब उत्पादन करने वाली कई शुगर मिलों के मालिक BJP के खेमे में शरण ले चुके हैं। संपादकीय में मुख्यमंत्री फडणवीस से सीधे सवाल किया गया — क्या वे इन 'शराब व्यापारियों' को कड़ी चेतावनी देने का साहस करेंगे, या चुनावी हितों की रक्षा के लिए शराब के वर्गीकरण को ही फिर से परिभाषित करने की कोशिश होगी? इसके अलावा, नशे के खिलाफ सड़कों पर उतरे स्थानीय नागरिकों का कथित तौर पर मज़ाक उड़ाने के लिए BJP नेताओं की भी कड़ी निंदा की गई।
भ्रष्टाचार भी एक 'नशा': सामना की व्यापक परिभाषा
सामना ने अपने संपादकीय में नशे की परिभाषा को और विस्तार दिया। उसमें कहा गया कि राज्य में नशाखोरी केवल चरस, गांजा और भूरी चीनी जैसे अवैध पदार्थों तक सीमित नहीं है — भ्रष्टाचार और धन की मदहोशी भी उतनी ही घातक है, और महाराष्ट्र को इस नशे से भी मुक्त करना होगा। पार्टी ने नागरिकों से अपने कैलेंडर में 2029 की समय सीमा अंकित करने और उस समय सीमा पर वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया। यह टिप्पणी आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।