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ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में भारत का आह्वान: छोटे किसानों को सशक्त बनाएं, खाद्य सुरक्षा मजबूत करें

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ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में भारत का आह्वान: छोटे किसानों को सशक्त बनाएं, खाद्य सुरक्षा मजबूत करें

सारांश

इंदौर में ब्रिक्स कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में भारत ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा की साझा जिम्मेदारी का संदेश दिया। शिवराज सिंह चौहान ने 376 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन और 87% छोटे किसानों की भूमिका का हवाला देते हुए ब्रिक्स देशों से ठोस सहयोग की माँग रखी।

मुख्य बातें

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 12 जून 2026 को इंदौर में ब्रिक्स कृषि सम्मेलन को संबोधित किया।
भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 376 मिलियन टन ; गेहूं उत्पादन 118 मिलियन टन और बागवानी 378 मिलियन टन से अधिक।
मत्स्य उत्पादन 19 मिलियन टन से अधिक; कृषि क्षेत्र में पिछले दशक में औसतन 4.5% वार्षिक वृद्धि।
भारत के लगभग 87% किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में; लगभग 43% कार्यशक्ति कृषि क्षेत्र से जुड़ी।
भारत ने ब्रिक्स देशों से टिकाऊ कृषि विकास और खाद्य सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 12 जून 2026 को इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन में सभी सदस्य देशों से अपील की कि वे मिलकर छोटे और सीमांत किसानों को सशक्त बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक स्तर पर टिकाऊ कृषि विकास को गति देने के लिए ठोस कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों का सामूहिक प्रयास वैश्विक कृषि को एक नई और समावेशी दिशा दे सकता है।

सम्मेलन में भारत का रुख

चौहान ने इस मंच पर भारत की कृषि उपलब्धियों, सांस्कृतिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय कृषि साझेदारियों को मजबूत करने के भारत के संकल्प को उजागर किया और 'वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना — जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानती है — पर विशेष जोर दिया।

मंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन दुनिया भर के छोटे और सीमांत किसानों की चुनौतियों पर सामूहिक रूप से विचार करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव, कृषि लागत में वृद्धि और कृषि बाज़ारों में अनिश्चितता जैसी चुनौतियाँ किसानों की आजीविका को सीधे प्रभावित कर रही हैं।

भारत की कृषि उपलब्धियाँ

चौहान ने सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों को बताया कि पिछले एक दशक में भारत के कृषि क्षेत्र ने औसतन लगभग 4.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है। देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन अब लगभग 376 मिलियन टन तक पहुँच गया है।

उन्होंने आगे बताया कि गेहूं उत्पादन करीब 118 मिलियन टन तक पहुँच गया है, जबकि बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन के आँकड़े को पार कर चुका है। मत्स्य उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह अब 19 मिलियन टन से अधिक हो गया है।

छोटे किसानों की केंद्रीय भूमिका

चौहान ने इस बात पर बल दिया कि भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में आते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ये किसान आर्थिक रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनते हैं, तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी अधिक मजबूत और लचीली होगी।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की लगभग 43 प्रतिशत कार्यशक्ति कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में लगी हुई है, जो इसे देश की अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बनाती है।

वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भारत की भूमिका

मंत्री ने जानकारी दी कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम चला रहा है, जिसके माध्यम से देश की बड़ी आबादी को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ रहा है और कई देश खाद्य असुरक्षा की चुनौती से जूझ रहे हैं।

गौरतलब है कि ब्रिक्स देश मिलकर वैश्विक कृषि उत्पादन और खाद्य व्यापार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं। इस सम्मेलन के निष्कर्ष आगामी बहुपक्षीय कृषि नीतियों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ब्रिक्स सहयोग की यह अपील ठोस द्विपक्षीय या बहुपक्षीय प्रतिबद्धताओं में कब बदलेगी। भारत के 87% छोटे किसानों की स्थिति सुधारने के लिए घरेलू नीतियाँ और वैश्विक मंचों पर की गई घोषणाएँ अक्सर समानांतर पटरियों पर चलती हैं। 'वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना राजनयिक रूप से आकर्षक है, परंतु जलवायु परिवर्तन और बाज़ार अनिश्चितता जैसी चुनौतियों के लिए ब्रिक्स के भीतर बाध्यकारी सहयोग ढाँचे की आवश्यकता है, जो अभी तक स्पष्ट नहीं है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर में ब्रिक्स कृषि सम्मेलन क्या था?
यह 12 जून 2026 को इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन था, जिसमें छोटे किसानों के सशक्तिकरण, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि विकास पर विचार-विमर्श किया गया। भारत की ओर से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन को संबोधित किया।
शिवराज सिंह चौहान ने ब्रिक्स देशों से क्या अपील की?
चौहान ने ब्रिक्स सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे मिलकर छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाएं तथा वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास करें। उन्होंने जलवायु परिवर्तन और कृषि लागत में वृद्धि को प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया।
भारत का खाद्यान्न उत्पादन अभी कितना है?
सम्मेलन में दी गई जानकारी के अनुसार भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 376 मिलियन टन तक पहुँच गया है। गेहूं उत्पादन करीब 118 मिलियन टन और बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक है, जबकि मत्स्य उत्पादन 19 मिलियन टन से ऊपर है।
भारत में छोटे किसानों की स्थिति क्या है?
भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में आते हैं। देश की लगभग 43 प्रतिशत कार्यशक्ति कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में लगी है, जो इसे अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा रोज़गार प्रदाता क्षेत्र बनाती है।
ब्रिक्स कृषि सहयोग भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
ब्रिक्स देश मिलकर वैश्विक कृषि उत्पादन और खाद्य व्यापार में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। भारत के लिए यह मंच अपनी कृषि तकनीक, खाद्य सुरक्षा मॉडल और किसान-केंद्रित नीतियों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने का अवसर है।
राष्ट्र प्रेस
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