ईडी ने अपोलो ग्रीन एनर्जी के पूर्व सीएफओ राकेश गुप्ता को PMLA के तहत किया गिरफ्तार, 5 दिन की रिमांड
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 7 जुलाई 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में अपोलो ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (पूर्व में अपोलो इंटरनेशनल लिमिटेड) के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) एवं प्रेसिडेंट-स्ट्रैटेजिक इनिशिएटिव्स राकेश गुप्ता को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के अंतर्गत गिरफ्तार किया। गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें 5 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
ईडी के अनुसार, राकेश गुप्ता जांच के दौरान भेजे गए चार समन का पालन करने में विफल रहे। इसके बाद गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए अदालत ने उनके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया, जिसके आधार पर गिरफ्तारी की गई। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें पाँच दिन की रिमांड पर ईडी को सौंपा गया।
मामले की जड़: इंद्रजीत सिंह और संगठित अपराध
यह जांच हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज 15 से अधिक एफआईआर और आरोपत्रों के आधार पर शुरू हुई। इन मामलों में इंद्रजीत सिंह — जो जेम रिकॉर्ड्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड (जेम्स ट्यून्स) का मालिक और प्रमुख संचालक बताया जाता है — पर हत्या, जबरन वसूली, धोखाधड़ी, अवैध भूमि कब्जा और अन्य हिंसक अपराधों के आरोप हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इंद्रजीत सिंह फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से अपनी गतिविधियाँ संचालित कर रहा है और कई मामलों में फरार है। जांच में विदेश से संचालित संगठित अपराध सिंडिकेट की भूमिका भी उजागर हुई है।
अपोलो ग्रीन एनर्जी और कर्ज विवाद
ईडी की जांच में सामने आया कि अपोलो ग्रीन एनर्जी लिमिटेड सहित कुछ कॉरपोरेट समूहों ने झज्जर के दिघल क्षेत्र के निजी फाइनेंसरों से ₹200 करोड़ से अधिक का कर्ज लिया था और सुरक्षा के तौर पर पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए थे। बाद में कंपनी ने मूलधन और ब्याज दोनों के भुगतान में लापरवाही की। ईडी का आरोप है कि राकेश गुप्ता ने ही इंद्रजीत सिंह का परिचय अपोलो समूह से कराया था और उसकी सेवाएं लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी के अनुसार, इसके बाद कर्ज विवादों का जबरन निपटारा और दिघल के एक फाइनेंसर की कथित हत्या जैसी घटनाएं सामने आईं।
छापेमारी और संपत्ति कुर्की
इस मामले में ईडी पहले भी कई स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है। इन कार्रवाइयों में ₹6.41 करोड़ नकद, लगभग ₹17.4 करोड़ मूल्य के आभूषण और 5 लग्जरी वाहन बरामद किए गए। अब तक ईडी कुल ₹90.04 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क कर चुकी है। इसके अलावा, विशेष पीएमएलए अदालत, गुरुग्राम में अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) भी दाखिल की जा चुकी है।
आगे क्या होगा
राकेश गुप्ता की 5 दिन की रिमांड के दौरान ईडी उनसे अपोलो समूह और इंद्रजीत सिंह के बीच वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जानकारी जुटाएगी। गौरतलब है कि इंद्रजीत सिंह अभी भी यूएई में फरार है और उसका प्रत्यर्पण इस मामले की अगली बड़ी कड़ी हो सकती है।