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क्या ईडी ने गुरुग्राम में अपराध की कमाई से खरीदी गई लग्जरी अपार्टमेंट को जब्त किया?

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क्या ईडी ने गुरुग्राम में अपराध की कमाई से खरीदी गई लग्जरी अपार्टमेंट को जब्त किया?

सारांश

गुरुग्राम में प्रवर्तन निदेशालय ने 32.28 करोड़ रुपए मूल्य के एक लग्जरी अपार्टमेंट को जब्त किया है। यह संपत्ति जेनसोल समूह के प्रमोटर अनमोल सिंह जग्गी के नाम पर है, जिसे सरकारी फंड के दुरुपयोग से खरीदा गया है। जांच जारी है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुग्राम में लग्जरी अपार्टमेंट को जब्त किया।
यह संपत्ति जेनसोल समूह के प्रमोटर के नाम पर है।
सरकारी फंड का दुरुपयोग हुआ है।
इस मामले में आगे के खुलासे की संभावना है।

नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय ने भारतीय संपत्ति अधिनियम, 2002 के अंतर्गत गुरुग्राम के डीएलएफ सिटी फेज-5, वजीराबाद स्थित द मैगनोलियास अपार्टमेंट (जिसकी कीमत लगभग 32.28 करोड़ रुपए है) को जब्त कर लिया है। यह अपार्टमेंट एंवी पावर इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर रजिस्टर्ड है।

जांच में यह सामने आया है कि यह संपत्ति जेनसोल समूह के चेयरमैन और मुख्य प्रमोटर अनमोल सिंह जग्गी ने खरीदी थी और इसे जेनसोल समूह की कंपनी मैट्रिक्स गैस एंड रिन्यूएबल्स लिमिटेड से डायवर्ट किए गए फंड का उपयोग करके खरीदा गया।

प्रवर्तन निदेशालय ने मैट्रिक्स कंपनी और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ जांच सीबीआई द्वारा लिमिटेड की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। जांच में यह पता चला कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत इस्पात मंत्रालय के माध्यम से भारत में इस्पात क्षेत्र में पायलट परियोजनाओं के लिए सरकारी फंड आवंटित किया था।

इन परियोजनाओं का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग करके लोहा और इस्पात का उत्पादन करना था। इस कार्यान्वयन के लिए इस्पात मंत्रालय ने योजना कार्यान्वयन एजेंसी नियुक्त की थी।

पायलट परियोजनाओं के लिए सफल बोलीदाता के रूप में मैट्रिक्स कंपनी को चुना गया और परियोजना के लिए स्वीकृत सरकारी अनुदान का 20 प्रतिशत यानी 32.28 करोड़ कंपनी को वितरित किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि मैट्रिक्स कंपनी ने सरकारी फंड का उपयोग परियोजना के लिए करने के बजाय इसे अनमोल सिंह जग्गी के नियंत्रण वाली कंपनियों के माध्यम से डायवर्ट कर दिया।

फंड को कई लेन-देन के माध्यम से प्रमोटरों के व्यक्तिगत लाभ और समूह की अन्य गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया। इसी राशि से उपरोक्त लग्जरी अपार्टमेंट खरीदा गया। चूंकि यह राशि अपराध से अर्जित की गई मानी गई, इसलिए प्रवर्तन निदेशालय ने इसे अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि जांच अभी जारी है और आगे भी संबंधित व्यक्तियों और फंड डायवर्जन की विस्तार से जांच की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें एक प्रमुख उद्योगपति का नाम शामिल है। यह दर्शाता है कि कैसे कुछ लोग अपना लाभ उठाने के लिए नियमों का उल्लंघन करते हैं। यह भारत की संपत्ति कानूनों और प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता पर भी सवाल उठाता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने क्यों इस अपार्टमेंट को जब्त किया?
यह अपार्टमेंट अपराध से अर्जित धन का उपयोग करके खरीदा गया था, जिससे इसे जब्त किया गया।
क्या जांच अभी भी चल रही है?
हाँ, प्रवर्तन निदेशालय की जांच अभी भी जारी है।
इस अपार्टमेंट की कीमत क्या है?
इस अपार्टमेंट की कीमत लगभग 32.28 करोड़ रुपए है।
यह अपार्टमेंट किसके नाम पर है?
यह अपार्टमेंट एंवी पावर इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर रजिस्टर्ड है।
क्या इसके पीछे कोई बड़ा वित्तीय घोटाला है?
हां, जांच में यह सामने आया है कि सरकारी फंड का दुरुपयोग हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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