बाबा साहब ने महिलाओं के अधिकारों के लिए कुर्सी छोड़ी: मुख्यमंत्री मोहन यादव
सारांश
Key Takeaways
- बाबा साहब अंबेडकर ने महिलाओं के अधिकारों के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
- उन्होंने अपनी कुर्सी छोड़कर महिलाओं के सम्मान की रक्षा की।
- सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर चर्चा कर रही है।
- अनुसूचित जाति-जनजाति के कल्याण के लिए बजट का एक तिहाई हिस्सा समर्पित है।
- समाज में समानता और भाईचारे को बढ़ावा देने का बाबा साहब का योगदान अद्वितीय है।
इंदौर, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के बड़े पक्षधर थे। उन्होंने महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों के प्रति सजगता दिखाते हुए अपनी कुर्सी तक छोड़ दी थी।
इंदौर के डॉ. अम्बेडकर नगर (महू) में आयोजित जयंती समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि बाबा साहेब एक ऐसे युगदृष्टा थे, जिन्होंने एक हजार साल की गुलामी के कठिन समय को समाप्त करने और समाज में समानता की भावना को विकसित करने के लिए संघर्ष किया। उनके योगदान पर हमें गर्व होना चाहिए। हमें उनके द्वारा स्थापित संविधान का पालन करना चाहिए, क्योंकि इससे श्रेष्ठ कोई संविधान नहीं हो सकता।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने महिलाओं की समानता और सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन्होंने बहनों को पिता की संपत्ति में अधिकार दिलाने का कार्य किया, तलाक के समय मुआवजा और मातृत्व अवकाश दिलाने के लिए भी उन्होंने महत्वपूर्ण प्रयास किए। उन्होंने हमें 'समान काम-समान वेतन' का विचार भी दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बाबा साहेब महिला सशक्तिकरण के सच्चे समर्थक थे। महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए उन्होंने अपनी कुर्सी तक छोड़ दी थी। न्यूनतम मजदूरी, कंपनी कानून और महिला श्रमिकों के अधिकारों की व्यवस्था उनके योगदान का ही परिणाम है। केंद्र सरकार डॉ. अम्बेडकर के आदर्शों पर चलते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए 21वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय लेने जा रही है। आने वाले दिनों में लोकसभा में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लागू करने पर चर्चा होगी, जिससे माताओं-बहनों को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने महिलाओं के कल्याण के लिए जो कार्य किया, उसे देश हमेशा याद रखेगा। बाबा साहेब ने अपने जीवन के हर पल में भारत माता की आराधना की और समाज को प्रगति का मार्ग दिखाया। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि भीम जन्मभूमि पर आज का माहौल होली-दीवाली जैसा है। बाबा साहेब के जीवन से जुड़े सभी 5 पड़ावों को हमारी सरकार ने पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया है। जातिगत असमानता को समाप्त करने के लिए अंतर्जातीय विवाह करने वाले नवदंपत्तियों को हमारी सरकार 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दे रही है। अनुसूचित जाति-जनजाति के कल्याण के लिए सरकार ने सालाना बजट का एक तिहाई हिस्सा इन्हें समर्पित किया है।
महू विधायक एवं पूर्व मंत्री ऊषा ठाकुर ने कहा कि आज बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर की जयंती पर हमें उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हमें यह संकल्प करना चाहिए कि हम जीवन में कभी हिंसा, चोरी, नशा या कोई गलत कार्य नहीं करेंगे। बाबा साहेब समाज में आमूल-चूल परिवर्तन के लिए कटिबद्ध थे। नारी शक्ति की समानता के उनके विचारों के आधार पर देश की संसद में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के माध्यम से विधानसभा और लोकसभा की 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
वरिष्ठ विचारक आलोक कुमार ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर एक अत्यंत शिक्षित व्यक्ति थे, फिर भी उनके साथ समाज में भेदभाव हुआ। जब संविधान लिखने का समय आया, तो महात्मा गांधी ने पं. जवाहरलाल नेहरू को सुझाव दिया था कि संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनने के लिए केवल एक ही व्यक्ति योग्य है और वह डॉ. भीमराव अम्बेडकर हैं। संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन की जिम्मेदारी डॉ. अम्बेडकर को उनकी योग्यता के कारण ही सौंपी गई थी। उन्होंने समाज को बंधुता और भाईचारे का संदेश दिया। छुआछूत और भेदभाव भारतीय संस्कृति का कभी भी हिस्सा नहीं रहे। हमें भारत के संविधान में उल्लेखित नियमों और उपनियमों का पालन करना चाहिए। सभी को समान मानते हुए देश के विकास में योगदान देना चाहिए। हमें समाज के हर वर्ग को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से समृद्ध बनाना है।