क्या शाहबाग आंदोलन के नेता ने बांग्लादेश में शांति और 'सोनार बांग्ला' की वापसी की अपील की?

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क्या शाहबाग आंदोलन के नेता ने बांग्लादेश में शांति और 'सोनार बांग्ला' की वापसी की अपील की?

सारांश

कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बांग्लादेश के शाहबाग आंदोलन के नेता बप्पादित्य बसु ने हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर चिंता जताई। उन्होंने शांति और 'सोनार बांग्ला' की वापसी की अपील की, साथ ही भारत सरकार से नागरिकता देने की मांग की। इस मुद्दे पर विचार करना अत्यंत आवश्यक है।

Key Takeaways

  • बांग्लादेश में हिंदुओं का उत्पीड़न बढ़ रहा है।
  • बप्पादित्य बसु ने 'सोनार बांग्ला' की वापसी की मांग की।
  • भारत सरकार से नागरिकता देने की अपील की गई है।
  • पश्चिम बंगाल के बुद्धिजीवियों से समर्थन की आवश्यकता है।
  • बांग्लादेश की स्थिति चिंताजनक है।

कोलकाता, 30 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार लगातार जारी है। वहां भय का माहौल व्याप्त है, और हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या से दक्षिण एशियाई देश में हिंसा का अंत नहीं हुआ है।

बांग्लादेश में व्याप्त असहाय परिस्थितियों के बीच, सनातनी संसद ने मंगलवार को कोलकाता प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें कई ऐसे हिंदुओं के उदाहरण प्रस्तुत किए गए जिन्होंने पड़ोसी देश में अपने जीवन के खतरे के कारण चिकित्सा वीजा या अन्य माध्यमों से भारत में शरण ली थी।

इनमें बांग्लादेश के 2023 के शाहबाग आंदोलन के एक प्रमुख चेहरे बप्पादित्य बसु भी शामिल थे, जिन्होंने 'सोनार बांग्ला' (स्वर्ण बंगाल) की बहाली की मांग की थी।

बासु ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मैं पिछले 14 महीनों से छिपकर रह रहा हूं। अंसारुल्लाह बांग्ला संगठन ने मुझे जान से मारने की धमकी दी थी। आज बोलने के बाद मुझे नहीं पता कि मैं कल का सूरज देख पाऊंगा या नहीं। मैं मेडिकल वीजा पर इस देश में आया था, लेकिन मैं और मेरे जैसे जो लोग इस समय इस देश और इस राज्य में हैं, वे अपने वतन लौटना चाहते हैं।"

साथ ही, बसु ने अपील की कि चूंकि उनके जैसे हिंदू धार्मिक उत्पीड़न के कारण यहां शरण ले चुके हैं, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत उन्हें नागरिकता प्रदान करने पर विचार करना चाहिए।

पश्चिम बंगाल के बुद्धिजीवी समुदाय से उनका साथ देने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, "बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति 1971 के मुक्ति युद्ध से भी बदतर है। मौजूदा स्थिति का अंत होना चाहिए और एक बार फिर शांति स्थापित होनी चाहिए। हम एक 'सोनार बांग्ला' चाहते हैं।"

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शंकुदेव पांडा ने कहा, "भाजपा बांग्लादेश के उत्पीड़ित हिंदुओं के साथ खड़ी है। उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए सनातनी संसद के माध्यम से नागरिकता की मांग के लिए आवेदन करना चाहिए।"

प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के अध्यक्ष गोबिंदा दास, महासचिव और पत्रकार रक्तिम दास, प्रोफेसर मोहित रॉय, अधिवक्ता जॉयदीप मुखोपाध्याय सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

Point of View

यह स्पष्ट है कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ते उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह एक मानवीय मुद्दा है, जो न केवल बांग्लादेश, बल्कि समस्त क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर रहा है। हमें इस स्थिति का समाधान खोजने की आवश्यकता है।
NationPress
08/01/2026

Frequently Asked Questions

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार क्यों हो रहा है?
बांग्लादेश में धार्मिक भेदभाव और राजनीतिक अस्थिरता के कारण हिंदू समुदाय पर अत्याचार हो रहे हैं।
क्या भारत सरकार हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देगी?
हां, नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने पर विचार किया जा रहा है।
सोनार बांग्ला का क्या अर्थ है?
सोनार बांग्ला का अर्थ है 'स्वर्ण बंगाल', जो बांग्लादेश की समृद्धि और शांति का प्रतीक है।
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