बिधाननगर मतगणना केंद्र के बाहर TMC-BJP कार्यकर्ताओं में झड़प, केंद्रीय बल तैनात
सारांश
Key Takeaways
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बिधाननगर में एक मतगणना केंद्र के बाहर रविवार, 4 मई 2025 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं के बीच मामूली झड़प हुई। पुलिस के अनुसार, शनिवार रात स्ट्रॉन्ग रूम के सामने दोनों दलों के समर्थकों के बीच कहासुनी से तनाव शुरू हुआ, जो कुछ ही देर में झड़प में बदल गया। केंद्रीय बलों और बिधाननगर पुलिस के त्वरित हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रण में ला लिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, नारेबाजी और जवाबी नारेबाजी के बाद दोनों पक्षों में तनाव बढ़ा और स्थिति झड़प में तब्दील हो गई। BJP ने आरोप लगाया कि TMC कार्यकर्ताओं ने मतगणना केंद्र के बाहर अपने कैंप में पार्टी के झंडे लगा दिए, जिससे विवाद भड़का। वहीं, TMC ने दावा किया कि केंद्रीय बलों ने उनके कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया।
बड़ी संख्या में केंद्रीय बल मौके पर पहुँचे और पुलिस ने समर्थकों को तितर-बितर किया। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को अलग कर उनके बीच बैरिकेड्स लगा दिए गए। स्ट्रॉन्ग रूम के आसपास सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है।
मतगणना की तैयारी
पश्चिम बंगाल में दो चरणों में हुए विधानसभा चुनाव के तहत 293 सीटों के लिए सोमवार को 77 मतगणना केंद्रों पर वोटों की गिनती होनी है। हालाँकि, चुनाव आयोग (ECI) ने शनिवार को दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी बूथों पर पुनर्मतदान कराने की घोषणा की, क्योंकि 29 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के मतदान में गंभीर चुनावी अनियमितताएँ पाई गई थीं। इसलिए फलता को छोड़कर 293 विधानसभा क्षेत्रों के वोटों की गिनती की जाएगी।
प्रशासन ने मतगणना के दिन केंद्रों के बाहर पटाखे फोड़ने और विजय जुलूस निकालने पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है। सभी मतगणना केंद्रों के बाहर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
ममता बनर्जी के निर्देश
मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को वर्चुअल बैठक के जरिए अपनी पार्टी के मतगणना एजेंटों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहाँ BJP 500 से 700 वोटों से आगे हो, वहाँ तुरंत पुनर्गणना की माँग की जाए। बनर्जी ने एजेंटों को यह भी कहा कि वे रविवार रात किसी लॉज या होटल में ठहरें ताकि सोमवार सुबह समय पर मतगणना केंद्र पहुँच सकें।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब पूरे राज्य में मतगणना से पहले राजनीतिक तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास रहा है और इस बार भी दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। चुनाव आयोग ने सुरक्षा के लिए कई अतिरिक्त कदम उठाए हैं और मतगणना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही है।