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भारत में समुद्री व्यापार का सामान्यीकरण, केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

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भारत में समुद्री व्यापार का सामान्यीकरण, केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

सारांश

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने समुद्री व्यापार में सुधार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की कार्रवाई ने स्थिति को सामान्य करने में मदद की है। जानें, उन्होंने क्या कहा और भारत के व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए सरकार की तैयारी क्या है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने समुद्री व्यापार को सामान्य करने के लिए त्वरित कदम उठाए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति में सुधार हुआ है, 90% बैकलॉग साफ़ हुआ।
सरकार मुनाफाखोरी को बर्दाश्त नहीं करेगी, और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।
बंदरगाहों को वित्तीय राहत उपायों का लाभ मिल रहा है।
सरकार व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। 'इस्लामाबाद टॉक' की असफलता के बाद, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका की धमकी ने विश्व के विभिन्न देशों में चिंता का माहौल पैदा किया है। इस संदर्भ में, केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक साक्षात्कार में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के त्वरित और समन्वित प्रयासों से भारत के समुद्री व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है और अब स्थितियाँ तेजी से सामान्य हो रही हैं।

मंत्री सोनोवाल ने बताया कि मंत्रालय ने शुरुआत से ही निरंतर निगरानी रखी और सभी प्रमुख बंदरगाहों एवं हितधारकों के साथ करीबी समन्वय स्थापित किया। जहाजों की आवाजाही, कार्गो कंजेशन तथा बंदरगाह-स्तरीय संचालन पर नज़र रखने के लिए एक रियल-टाइम रिव्यू मैकेनिज्म लागू किया गया था।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्पष्ट निर्देश थे कि आपूर्ति श्रृंखला पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। इसी दिशा में, बंदरगाहों को नवाचार-आधारित संचालन, यार्ड क्षमता में वृद्धि, और लॉजिस्टिक्स योजना को सुगम बनाने के निर्देश दिए गए।

मंत्री ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न बैकलॉग का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा प्रमुख बंदरगाहों से साफ़ हो गया है। इसे एक बड़ी उपलब्धि मानते हुए, उन्होंने कहा कि अब जहाजों की आवाजाही स्थिर हो गई है और स्थिति सामान्य हो गई है। फिर भी, उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रालय अब भी सतर्क है और किसी भी संभावित समस्या के लिए निरंतर निगरानी रखी जा रही है।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता निर्यातकों, आयातकों और लॉजिस्टिक्स से जुड़े सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करना है। इस दिशा में, सभी पोर्ट अथॉरिटीज को ग्राउंड रेंट में छूट और रीफर चार्जेस में रियायत जैसे वित्तीय राहत उपायों को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। ये लाभ सीधे हितधारकों तक पहुंचाए जा रहे हैं। साथ ही, शिकायत निवारण प्रणाली को भी मजबूत किया गया है, ताकि परिचालन या लागत संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संकट के समय में मुनाफाखोरी को किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा। इसके लिए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग को सभी शिपिंग शुल्कों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल, कड़ी निगरानी और दस्तावेजीकरण के जरिए ऐसी प्रवृत्तियों को रोकने पर जोर दिया जा रहा है। यदि कोई मामला सामने आता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सोनोवाल ने कहा कि हालात में सुधार हुआ है और समय पर उठाए गए कदमों से समुद्री संचालन में सामान्य स्थिति में वापसी हो गई है। हालाँकि, वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए, सरकार किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार का लक्ष्य समुद्री क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और हर स्थिति में भारत के व्यापारिक हितों की रक्षा करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सरकार की प्राथमिकता व्यापारिक हितों की रक्षा करना है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के समुद्री व्यापार में सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने त्वरित और समन्वित कदम उठाए हैं, जिनमें रियल-टाइम रिव्यू मैकेनिज्म और वित्तीय राहत उपाय शामिल हैं।
क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य हो गई है?
हाँ, मंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न बैकलॉग का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा साफ़ हो गया है और जहाजों की आवाजाही स्थिर हो गई है।
सरकार मुनाफाखोरी के खिलाफ क्या कदम उठा रही है?
सरकार ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग को सभी शिपिंग शुल्कों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और मुनाफाखोरी को बर्दाश्त नहीं करने की बात की है।
सरकार का फोकस क्या है?
सरकार का फोकस समुद्री क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और भारत के व्यापारिक हितों की रक्षा करना है।
बंदरगाहों के लिए क्या वित्तीय राहत उपाय लागू किए गए हैं?
बंदरगाहों को ग्राउंड रेंट में छूट और रीफर चार्जेस में रियायत जैसे वित्तीय राहत उपायों के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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