सीनेटर रिक स्कॉट ने ट्रंप से ओपीटी कार्यक्रम समाप्त करने का किया अनुरोध, अमेरिकी युवाओं पर पड़ रहा है प्रभाव
सारांश
Key Takeaways
- ओपीटी कार्यक्रम विदेशी छात्रों को पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है।
- सीनेटर रिक स्कॉट ने इसे खत्म करने की मांग की है।
- यह कार्यक्रम अमेरिकी युवाओं के रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी यह खतरा हो सकता है।
- चीन के संदर्भ में यह चिंताजनक है।
वाशिंगटन, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण वर्क परमिट कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी)' कार्यक्रम को समाप्त करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि यह योजना अमेरिकी युवाओं के रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है, विशेषकर चीन के संदर्भ में।
सीनेटर स्कॉट ने राष्ट्रपति ट्रंप को लिखे पत्र में यह स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता वाला मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी छात्रों को दिए जाने वाले ये वर्क परमिट न केवल अमेरिकी ग्रेजुएट्स के रोजगार के अवसरों को सीमित कर रहे हैं, बल्कि इनका दुरुपयोग भी हो रहा है। स्कॉट ने विशेष रूप से चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक 'स्वयं घोषित दुश्मन देश' है, जो इस प्रणाली का लाभ उठा सकता है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका में युवा ग्रेजुएट्स की नौकरी की स्थिति पहले जैसी नहीं रही। पहले नए ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर आम जनसंख्या से कम होती थी, लेकिन 2020 के बाद से यह स्थिति बदल गई है। विशेष रूप से एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स) क्षेत्र में परिस्थितियाँ और चिंताजनक हो गई हैं। उनके अनुसार, कंप्यूटर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर सामान्य दर से लगभग दोगुनी है, जबकि कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट्स में यह 50 प्रतिशत अधिक है।
सीनेटर रिक स्कॉट ने यह भी कहा कि ओपीटी कार्यक्रम इस समस्या को और बढ़ा रहा है। वर्तमान में, 5 लाख से अधिक छात्र वीजा धारकों के पास ओपीटी वर्क परमिट हैं, जो उन्हें पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम करने और अमेरिकी युवाओं के साथ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर प्रदान करते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को उठाते हुए सीनेटर स्कॉट ने कहा कि यह प्रणाली जासूसी और तकनीकी जानकारी के ट्रांसफर के लिए भी उपयोग की जा सकती है। उन्होंने बताया कि लगभग 33,000 चीनी नागरिक एसटीईएम ओपीटी के तहत अमेरिका में कार्यरत हैं, जिनमें से कई विश्वविद्यालयों और प्रमुख टेक कंपनियों में काम करते हैं, जहाँ उन्हें संवेदनशील तकनीकी जानकारी तक पहुँच प्राप्त होती है।
इसके अलावा, सीनेटर स्कॉट ने कहा कि ओपीटी कार्यक्रम का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है और यह केवल नियमों के माध्यम से स्थापित किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसटीईएम ओपीटी का विस्तार, एच-1बी वीजा की सीमाओं को दरकिनार करने का एक तरीका है।
सीनेटर स्कॉट ने राष्ट्रपति ट्रंप प्रशासन के उस कदम का स्वागत किया, जिसमें इस कार्यक्रम में बदलाव की संभावना पर चर्चा की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे अमेरिकी नौकरियों और परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।