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क्या 11 साल में ट्रेनों से सफर आसान और सुरक्षित हुआ है? 2026–27 में 7,900 किलोमीटर ट्रैक नवीनीकरण की योजना

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क्या 11 साल में ट्रेनों से सफर आसान और सुरक्षित हुआ है? 2026–27 में 7,900 किलोमीटर ट्रैक नवीनीकरण की योजना

सारांश

भारतीय रेलवे ने पिछले 11 वर्षों में अपने ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। नए नवीनीकरण योजनाओं और तकनीकों के साथ, यात्री अब अधिक सुरक्षित और तेज यात्रा का अनुभव कर रहे हैं। जानिए कैसे!

मुख्य बातें

नवीनीकरण की योजना में 7,900 किलोमीटर ट्रैक शामिल है।
सुरक्षा बाड़ लगाने का काम प्राथमिकता पर है।
ट्रैक मशीनों की संख्या में वृद्धि हुई है।
ट्रेन संचालन अब तेज और सुरक्षित है।
गहन स्क्रीनिंग से पटरियों की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।

नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रेलवे ने पिछले ग्यारह वर्षों में अपनी ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और सुरक्षा मानकों में सुधार लाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। लगातार निवेश और फोकस्ड प्रयासों के चलते ट्रेन संचालन अब पूरे देश में अधिक सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद हो गया है।

वित्तीय वर्ष 2024–25 में रेलवे ने 6,851 किलोमीटर और 2025–26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक ट्रैक का नवीनीकरण किया। साल 2026–27 में 7,900 किलोमीटर ट्रैक नवीनीकरण की योजना बनाई गई है। इसका अर्थ है कि रेलवे लगातार ट्रैक की गुणवत्ता और सुरक्षा पर जोर दे रहा है।

रेलगाड़ियों की सुचारू आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण टर्नआउट नवीनीकरण में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। 2024–25 में 7,161 थिक वेब स्विच और 1,704 वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग लगाए गए थे। 2025–26 में इससे भी अधिक 8,000 से ज्यादा थिक वेब स्विच और 3,000 से ज्यादा वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग लगाए जा रहे हैं। ये ट्रेनों के सुचारू संचालन के लिए बहुत आवश्यक हैं।

ट्रैक की स्थिरता बनाए रखने और सवारी की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक गिट्टी की मशीनीकृत गहन स्क्रीनिंग लगातार की जा रही है। 2024–25 में 7,442 किलोमीटर ट्रैक की डीप स्क्रीनिंग हुई और 2025–26 में 7,500 किलोमीटर से ज्यादा डीप स्क्रीनिंग का काम जारी है।

ट्रैक मशीनों के इस्तेमाल में वृद्धि करके मेंटेनेंस की क्षमता भी बढ़ाई गई है। 2014 के बाद से 1,100 से ज्यादा ट्रैक मशीनें खरीदी गई हैं, जिससे रेलवे जल्दी और कुशलता से ट्रैक की मरम्मत कर पा रहा है।

रेलवे ट्रैक के किनारे सुरक्षा बाड़ लगाने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है ताकि मवेशियों के कुचले जाने और पटरियों पर अनधिकृत प्रवेश की घटनाओं को कम किया जा सके और समग्र सुरक्षा को बढ़ाया जा सके। अब तक लगभग 15,000 किलोमीटर की बाड़ लगाई जा चुकी है, जिससे उन खंडों पर सुरक्षा में सुधार हुआ है जहां ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से चलती हैं।

इन निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप, भारतीय रेलवे ने पटरियों के उन्नयन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। 110 किमी प्रति घंटे और उससे अधिक की गति की अनुमति देने वाली पटरियों की लंबाई 2014 में 31,445 किलोमीटर (नेटवर्क का लगभग 40 प्रतिशत) से बढ़कर वर्तमान में 84,244 किलोमीटर (नेटवर्क का लगभग 80 प्रतिशत) हो गई है, जिससे ट्रेनों का संचालन तेज और अधिक कुशल हो गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ट्रेनों के संचालन को भी कुशल बनाता है। इस प्रकार, रेलवे का यह विकास राष्ट्रीय परिवहन नेटवर्क को मजबूत करता है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय रेलवे ने ट्रैक नवीनीकरण की योजना कब बनाई?
भारतीय रेलवे ने 2026–27 में 7,900 किलोमीटर ट्रैक नवीनीकरण की योजना बनाई है।
ट्रैक की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए गए हैं?
ट्रैक के किनारे सुरक्षा बाड़ लगाने का कार्य प्राथमिकता से किया जा रहा है।
ट्रैक मशीनों की संख्या में कितनी वृद्धि हुई है?
2014 के बाद से 1,100 से ज्यादा ट्रैक मशीनें खरीदी गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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