क्या बिहार का बाबरचक गांव 1989 के दंगों से उबरकर एक नई पहचान बना रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- बाबरचक गांव अब बिहार का पहला स्मार्ट गांव बनने की दिशा में अग्रसर है।
- 1989 के दंगों से प्रभावित गांव का पुनर्वास एक नई पहचान बन चुका है।
- सरकार की पहल से 164 परिवारों को स्थायी आवास मिले हैं।
- यह परियोजना ग्रामीण विकास और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देती है।
- पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के 'पूरा' मॉडल पर आधारित है।
बांका, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के पहले स्मार्ट गांव के रूप में उभर रहा बाबरचक अब एक नई पहचान के साथ पुनर्जीवित हो चुका है। यह गांव वर्ष 1989 के दंगों में पूरी तरह से नष्ट हो गया था। वर्षों तक विस्थापन, असुरक्षा और अभाव का सामना करने वाले इस गांव का पुनर्निर्माण आज विकास, पुनर्वास और आशा की एक मिसाल बन गया है।
सरकार की पहल पर बाबरचक में 164 भूमिहीन परिवारों के लिए स्थायी आवासों का निर्माण किया गया है, जिससे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित, स्थायी और सम्मानजनक जीवन का सहारा मिला है।
इस योजना के अंतर्गत प्राप्त आवासों ने उन परिवारों की ज़िंदगी को बदल दिया है, जो दशकों से अस्थायी ठिकानों और कच्चे घरों में रहने के लिए विवश थे। लाभार्थी गीता देवी ने नए घर की चाबी मिलने पर खुशीनरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि पहले उनके पास कच्चा घर था, जो 1989 के दंगों में पूरी तरह से उजड़ गया था। अब प्रधानमंत्री मोदी की पहल से उन्हें पक्का घर मिला है। गीता देवी ने बताया कि उनके परिवार में छह सदस्य हैं और वह फल की रेहड़ी लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। नए घर से उन्हें न केवल सुरक्षा मिली है, बल्कि भविष्य के प्रति विश्वास भी बढ़ा है।
बाबरचक पुनर्वास परियोजना का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फरवरी 2025 में अपनी 'प्रगति यात्रा' के दौरान किया था। इस अवसर पर उन्होंने गांव के समग्र विकास से संबंधित कई अन्य योजनाओं का शिलान्यास भी किया था। इनमें आधारभूत संरचना के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और आजीविका से जुड़े कार्य भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह परियोजना केवल आवास उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
इस संपूर्ण पुनर्वास मॉडल को पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न स्वर्गीय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के 'पूरा' (पीयूआरए - प्रोवाइडिंग अर्बन एमिनिटीज इन रूरल एरिया) मॉडल पर विकसित किया गया है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें बेहतर सड़कें, बिजली-पानी, डिजिटल कनेक्टिविटी, सामाजिक नवाचार और आर्थिक अवसर शामिल हैं।
बाबरचक गांव में इन सुविधाओं के जरिए न केवल भौतिक विकास किया गया है, बल्कि सामाजिक समरसता और टिकाऊ ग्रामीण विकास को भी बढ़ावा दिया गया है।
आज बाबरचक गांव केवल एक पुनर्वास परियोजना नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि सही नीतियों और इच्छाशक्ति से वर्षों से उजड़े गांवों को फिर से बसाया जा सकता है। यह गांव उन परिवारों के लिए आशा की नई किरण बनकर सामने आया है, जिन्होंने कभी अपना सब कुछ खो दिया था और अब एक सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।