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बिहार पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाया बड़ा कदम, सब-इंस्पेक्टर बर्खास्त

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बिहार पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाया बड़ा कदम, सब-इंस्पेक्टर बर्खास्त

सारांश

बिहार पुलिस ने एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे बर्खास्त कर दिया है। यह कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूती प्रदान करता है।

मुख्य बातें

बिहार पुलिस ने सब-इंस्पेक्टर सदरे आलम को बर्खास्त किया।
यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है।
सदरे आलम को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था।
जांच ने भ्रष्टाचार के आरोपों को साबित किया।
पुलिस विभाग में ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

पटना, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार पुलिस ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को और मजबूत करते हुए एक दागी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है।

तिरहुत रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) चंदन कुशवाहा ने सब-इंस्पेक्टर सदरे आलम को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश दिया है। यह मामला 2021 का है, जब सदरे आलम मुजफ्फरपुर के अहियापुर पुलिस स्टेशन में तैनात थे।

एक शिकायतकर्ता, तबस्सुम आरा ने रिश्वतखोरी के आरोपों के साथ विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो से संपर्क किया था। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए 30 सितंबर 2021 को एक जाल बिछाकर सदरे आलम को 11 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। यह गिरफ्तारी पुलिस स्टेशन के निकट एक चाय की दुकान पर हुई। इस संबंध में विजिलेंस ने पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया। आलम की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में एक विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई।

इस मामले की जांच मुजफ्फरपुर के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (पूर्व) की देखरेख में हुई। जांच का नेतृत्व शहरयार अख्तर ने किया। अंतिम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह स्थापित किया गया कि भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह से सही थे। पुलिस अधिकारी कर्तव्य में लापरवाही और अनैतिक आचरण का दोषी पाया गया।

जांच के निष्कर्षों के आधार पर डीआईजी कुशवाहा ने आलम को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया, जिससे पुलिस बल में एक सख्त संदेश गया। एक कड़ा रुख अपनाते हुए और जांच प्राधिकरण के निष्कर्षों के साथ-साथ मुजफ्फरपुर के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसएसपी) कंतेश कुमार मिश्रा की सिफारिशों से सहमत होते हुए डीआईजी चंदन कुशवाहा ने गुरुवार को सदरे आलम को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया।

यह कार्रवाई बिहार पुलिस के भीतर भ्रष्टाचार और कदाचार के खिलाफ कठोर रुख को प्रकट करती है। अधिकारियों ने कहा है कि रिश्वतखोरी में किसी भी प्रकार की संलिप्तता पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जवाबदेही और ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

डीआईजी कार्यालय ने एक बयान में जोर देकर कहा है कि पुलिस विभाग एक अनुशासित संगठन है, जहां ईमानदारी सर्वोपरि है। बयान में यह भी कहा गया कि भ्रष्ट आचरण में लिप्त कर्मियों की उपस्थिति न केवल जनता के विश्वास को कम करती है, बल्कि बल के भीतर ईमानदार अधिकारियों की प्रतिष्ठा को भी धूमिल करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह आम जनता के विश्वास को भी मजबूत करता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार पुलिस ने किस अधिकारी को बर्खास्त किया?
बिहार पुलिस ने सब-इंस्पेक्टर सदरे आलम को बर्खास्त किया है।
सदरे आलम पर क्या आरोप थे?
सदरे आलम पर रिश्वतखोरी के आरोप थे।
इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बिहार पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूत करना है।
इस मामले की जांच किसने की?
इस मामले की जांच मुजफ्फरपुर के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस ने की।
बिहार पुलिस की भ्रष्टाचार के प्रति नीति क्या है?
बिहार पुलिस की नीति 'जीरो टॉलरेंस' है, जिसका मतलब है भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
राष्ट्र प्रेस
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