छत्तीसगढ़: कोरिया जिले के जल मॉडल ने 'मन की बात' में पाई राष्ट्रीय पहचान, 5 प्रतिशत पहल बनी मिसाल
सारांश
Key Takeaways
- कोरिया जिले का जल मॉडल ने राष्ट्रीय पहचान पाई है।
- 5 प्रतिशत मॉडल ने जल संकट का समाधान प्रस्तुत किया है।
- किसानों की भागीदारी इस पहल की सफलता में महत्वपूर्ण है।
- भूजल स्तर में वृद्धि को दर्शाता है कि यह मॉडल प्रभावी है।
- महिलाओं और युवाओं ने इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
बैकुंठपुर, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम के 132वें एपिसोड में छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के अभिनव जल संरक्षण मॉडल का उल्लेख होने के बाद यह जिला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। किसानों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से विकसित '5 प्रतिशत मॉडल' ने न केवल जल संकट का समाधान प्रस्तुत किया है, बल्कि स्थायी विकास की दिशा में एक मजबूत उदाहरण भी स्थापित किया है।
वर्ष 2025 में इस अभियान के तहत लगभग 2.8 मिलियन क्यूबिक मीटर जल का भूजल में पुनर्भरण किया गया, जो सैकड़ों बड़े तालाबों के बराबर है। छत्तीसगढ़ वाटर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार जिले में भूजल स्तर में 5.41 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करती है।
इस संबंध में सीईओ जिला पंचायत डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में कैच द रेन वाटर, जल संचय और जन भागीदारी अभियान चलाया जा रहा है। इसी सिलसिले में राज्य में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मोर गांव मोर पानी अभियान चलाया जा रहा है।
उन्हें ने बताया कि कोरिया के कलेक्टर के दिशा निर्देशों के अंतर्गत 'आवा पानी झोंकी अभियान' के तहत न केवल शहरी क्षेत्रों बल्कि किसानों को ध्यान में रखते हुए जन भागीदारी से किसानों ने खेतों में सोखता गड्ढे बनाए हैं, जिससे जल स्तर में वृद्धि हुई है और यह कार्य अब भी जारी है। वर्ष 2025 में 5.41 मीटर की वृद्धि देखी गई थी। इस वर्ष, संरचनाओं और लोगों की भागीदारी में वृद्धि हुई है।
स्थानीय किसान विशाल कुमार दास और परमेश्वर राजवाड़े ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में प्रदेश सरकार के इस पहल की सराहना की। विशाल कुमार दास ने कहा कि इस छोटे सोखता गड्ढे से खेतों में नमी बनी रहती है और जलस्रोत सुरक्षित रहता है।
परमेश्वर राजवाड़े ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से बनाए गए सोखता गड्ढों से हमें बहुत लाभ होने वाला है। जब बारिश होगी तो इस गड्ढे में पानी एकत्र होगा और खेत में नमी बनी रहेगी, जिससे फसलों को लाभ होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में कोरिया जिले के किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे नवाचार बड़े बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने बताया कि किसानों ने अपने खेतों में छोटे सोखता गड्ढे बनाकर वर्षा जल को खेतों में ही रोकने का प्रभावी उपाय किया, जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 5 प्रतिशत मॉडल का नतीजा यह रहा कि छोटे प्रयास से बड़ा परिणाम मिला। कोरिया जिले में लागू '5 प्रतिशत मॉडल' के तहत किसानों ने अपनी भूमि का पांच प्रतिशत हिस्सा जल संरचनाओं के निर्माण के लिए समर्पित किया।
इस पहल में छोटे-छोटे सोखता बनाकर वर्षा जल को एकत्रित किया गया और जल संचय की दिशा में परिणाम बेहद सकारात्मक मिले, जिससे वर्षा जल का संरक्षण संभव हो पाया। इस मॉडल को 1200 से अधिक किसानों ने अपनाया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता जनभागीदारी रही। महिलाओं ने 'नीर नायिका' और युवाओं ने 'जल दूत' के रूप में जिम्मेदारी निभाई। ग्राम सभाओं के माध्यम से योजनाओं का विकेंद्रीकरण किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने और क्रियान्वयन की प्रक्रिया मजबूत हुई। इससे समुदाय स्वयं इस अभियान का नेतृत्वकर्ता बन गया।