चीन ने 32 देशों में स्थापित कीं 38 लुबान कार्यशालाएँ, 1.90 लाख से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण
सारांश
मुख्य बातें
चीनी शिक्षा मंत्रालय ने 12 अक्टूबर 2026 को बीजिंग में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 32 देशों में संयुक्त रूप से 38 लुबान कार्यशालाएँ स्थापित की जा चुकी हैं, जिनमें 30,000 से अधिक डिग्री पाठ्यक्रम के छात्र और 1,60,000 से अधिक गैर-डिग्री प्रशिक्षार्थी नामांकित हैं। मंत्रालय के अनुसार, चीन की व्यावसायिक शिक्षा अब कर्मियों के आदान-प्रदान और परियोजना सहयोग से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय मानक-निर्धारण की भूमिका में आ गई है।
लुबान कार्यशाला क्या है
लुबान वर्कशॉप एक व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसे विदेशों में स्थानीय संस्थानों के साथ मिलकर चीनी विश्वविद्यालय संचालित करते हैं। इसमें डिग्री पाठ्यक्रम और कौशल-केंद्रित गैर-डिग्री प्रशिक्षण — दोनों शामिल हैं। चीनी शिक्षा मंत्रालय ने उत्तरी चीन के थ्येनचिन शहर के अग्रणी अनुभव का लाभ उठाते हुए लुबान वर्कशॉप निर्माण गठबंधन और लुबान वर्कशॉप विशेषज्ञ समिति की स्थापना को प्रोत्साहित किया।
दस वर्षों के निरंतर प्रयासों के बाद, यह पहल 'थ्येनचिन प्रैक्टिस' से निकलकर चीन की व्यावसायिक शिक्षा का 'राष्ट्रीय ब्रांड' बन गई है। इसके अंतर्गत कार्यशालाओं के लिए निर्माण प्रक्रियाएँ और मान्यता मानक भी तैयार किए गए हैं।
आगामी विश्व सम्मेलन और नए मानक
व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा के विकास पर विश्व सम्मेलन 15 से 17 अक्टूबर 2026 तक थ्येनचिन में आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन का विषय है — 'विश्व व्यावसायिक शिक्षा: परिवर्तन को अपनाना, मानक स्थापित करना, भविष्य का निर्माण करना।'
बताया गया है कि सम्मेलन के दौरान 'लुबान कार्यशालाओं के निर्माण के लिए सामान्य आवश्यकताएँ' सहित चार अनुशंसित राष्ट्रीय मानक जारी किए जाएंगे। इनका उद्देश्य लुबान कार्यशालाओं की स्थापना, निर्माण और संचालन को अधिक मानकीकृत करना तथा 'निर्माण-प्रमाणीकरण-मूल्यांकन' की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित ढाँचे में लाना है।
व्यापक वैश्विक विस्तार
लुबान कार्यशालाओं के अलावा, चीनी शिक्षा मंत्रालय ने 80 से अधिक देशों और क्षेत्रों में 500 से ज़्यादा व्यावसायिक शिक्षा सहयोग परियोजनाएँ लागू की हैं। इनमें आधुनिक शिल्पकार अकादमी और सिल्क रोड अकादमी जैसे ब्रांड उभरे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय उत्पादन क्षमता सहयोग में सहायता करते हैं।
ये पहलें चीनी उद्यमों के वैश्विक विस्तार को कुशल तकनीकी जनशक्ति उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आलोचकों का कहना है कि इन कार्यक्रमों का विस्तार चीन की 'सॉफ्ट पावर' रणनीति का हिस्सा भी है, जिसके ज़रिए वह विकासशील देशों में शैक्षिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ा रहा है।
आगे की राह
थ्येनचिन सम्मेलन के बाद लुबान कार्यशालाओं के लिए नए राष्ट्रीय मानक लागू होने की उम्मीद है, जो इन कार्यक्रमों की गुणवत्ता और जवाबदेही को और पुख्ता करेंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए मानकीकरण ढाँचे से भागीदार देशों में स्थानीय रोज़गार और कौशल-विकास पर कितना वास्तविक प्रभाव पड़ता है।