26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या पाकिस्तान-चीन विदेश मंत्रियों की बैठक से दक्षिण एशिया में नई रणनीतियों का संकेत मिलता है?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या पाकिस्तान-चीन विदेश मंत्रियों की बैठक से दक्षिण एशिया में नई रणनीतियों का संकेत मिलता है?

सारांश

चीन और पाकिस्तान की हालिया बैठक से यह स्पष्ट होता है कि वे दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के खिलाफ उनके रणनीतिक कदम क्षेत्र में नई चुनौतियों का संकेत दे रहे हैं। इस लेख में हम इन रणनीतियों की गहराई में जाएंगे।

मुख्य बातें

चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संबंध भारत के प्रभाव को सीमित करने का प्रयास अफगानिस्तान में आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई की आवश्यकता सीपीईसी का अपग्रेडेड वर्ज़न 2.0 तीसरे पक्ष की भागीदारी का स्वागत

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। चीन और पाकिस्तान तेजी से अफगानिस्तान और बांग्लादेश के साथ अपने कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में भारत के प्रभाव को कम करना बताया जा रहा है। दोनों देश संवाद तंत्रों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने, आर्थिक परियोजनाओं के विकास और सैन्य समन्वय की पेशकश कर रहे हैं।

चीन ने अफगान मुद्दों पर खुद को एक मध्यस्थ और संवाद के आयोजक के रूप में स्थापित किया है। बीजिंग अपने जुड़ाव को शून्य-योग भू-राजनीति के बजाय पुनर्निर्माण और आतंकवाद-रोधी सहयोग के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के सातवें रणनीतिक संवाद के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया, “दोनों पक्ष चीन-अफगानिस्तान-पाकिस्तान त्रिपक्षीय विदेश मंत्रियों के संवाद और चीन-बांग्लादेश-पाकिस्तान सहयोग तंत्र का उपयोग जारी रखते हुए ठोस परिणाम देने को तैयार हैं।”

चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार के बीच यह वार्ता 3 से 5 जनवरी तक बीजिंग में हुई। संयुक्त वक्तव्य दोनों देशों के साझा उद्देश्यों को स्पष्ट करता है। तुर्किये, कतर और ईरान जैसे देशों की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष पहल के बाद अब चीन भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव कम कराने के प्रयासों में सक्रिय हो गया है।

संयुक्त विज्ञप्ति में कहा गया, “दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान में उपस्थित सभी आतंकवादी संगठनों को समाप्त करने के लिए अधिक स्पष्ट और सत्यापनीय कार्रवाई का आह्वान किया, जो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं, तथा अफगान भूमि का किसी भी अन्य देश के खिलाफ आतंकवाद के लिए उपयोग रोके जाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।”

हालांकि काबुल ने अपने क्षेत्र में किसी भी आतंकवादी संगठन की मौजूदगी से इनकार किया है और कहा है कि पाकिस्तान के भीतर होने वाले हमले इस्लामाबाद का आंतरिक मामला हैं।

चीन और पाकिस्तान ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के “अपग्रेडेड वर्ज़न 2.0” के निर्माण पर भी सहमति जताई, जो चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का महत्वपूर्ण हिस्सा है। साथ ही, दोनों ने सीपीईसी में “तीसरे पक्ष की भागीदारी” का स्वागत किया, बशर्ते वह चीन और पाकिस्तान द्वारा तय शर्तों के अनुरूप हो।

पहले से ही ऐसी रिपोर्टें आई हैं कि सीपीईसी को अफगानिस्तान तक बढ़ाने की योजना पर विचार हो रहा है, जिससे काबुल को भारत की परियोजनाओं के विकल्प के तौर पर बड़े पैमाने पर ढांचागत निवेश मिल सकता है। वहीं पाकिस्तान में बीआरआई परियोजनाओं को लेकर बाहरी कर्ज़ और परियोजनाओं की व्यवहार्यता पर सवाल उठते रहे हैं, हालांकि चीन और पाकिस्तान इन्हें विकास वित्त के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन और पाकिस्तान की बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दक्षिण एशिया में अपने कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करना और भारत के प्रभाव को सीमित करना था।
क्या इस बैठक से क्षेत्र में कोई नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं?
हां, इस बैठक के परिणामस्वरूप भारत के लिए नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं क्योंकि चीन और पाकिस्तान मिलकर अपनी रणनीतियों को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का क्या महत्व है?
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो क्षेत्र में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का कार्य करता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले