क्या देश के किसी भी कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है? : सीएम योगी

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क्या देश के किसी भी कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है? : सीएम योगी

सारांश

सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से साइबर ठगों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' का प्रावधान नहीं है। यूपी पुलिस ने साइबर अपराध रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें साइबर कमांडो की नियुक्ति और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं।

Key Takeaways

  • साइबर अपराध की रोकथाम के लिए जागरूक रहना जरूरी है।
  • डिजिटल अरेस्ट का कोई कानूनी आधार नहीं है।
  • सभी जनपदों में साइबर क्राइम थाने सक्रिय हैं।
  • साइबर ठगों से बचने के लिए सतर्कता जरूरी है।
  • अपने ओटीपी और व्यक्तिगत जानकारी को साझा न करें।

लखनऊ, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। योगी सरकार ने प्रदेशवासियों की कड़ी मेहनत से अर्जित धन पर डाका डालने वाले साइबर अपराधियों पर नियंत्रण पाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पुलिस ने साइबर अपराध और ठगी को रोकने के लिए साइबर कमांडो की नियुक्ति की है। इसके साथ ही पुलिस द्वारा जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपनी पाती में साइबर ठगों से सावधान रहने के लिए प्रदेशवासियों से अपील की है। उन्होंने अपनी पाती का संदेश मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया है और प्रदेशवासियों से जागरूक बनने तथा अन्य लोगों को जागरूक करने की अपील की है। यह भी कहा कि किसी भी कानून में डिजिटल अरेस्ट का प्रावधान नहीं है।

सीएम योगी की मंशा के अनुसार पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ पर जागरूकता संबंधी एक लघु फिल्म जारी की है, जिसे पिछले चार दिनों में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर 17 लाख 30 हजार से अधिक लोगों ने देखा और सराहा है। यह लघु फिल्म आम नागरिकों को साइबर ठगी के नए तरीकों से सतर्क करने और भयमुक्त होकर सही कदम उठाने का सशक्त संदेश देती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पाती में लिखा है कि मोबाइल और कंप्यूटर ने हमारे जीवन को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराध की चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं। आपकी सरकार इसकी रोकथाम के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। 2017 से पहले प्रदेश में केवल 2 साइबर क्राइम थाने थे। आज सभी 75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने सक्रिय हैं। साथ ही सभी जनपदों में साइबर हेल्प डेस्क बनाई गई हैं।

उन्होंने कहा कि साइबर ठगों के खिलाफ सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़े शस्त्र हैं। ये अपराधी डिजिटल अरेस्ट जैसे झूठे और भ्रामक शब्दों का प्रयोग कर निर्दोष नागरिकों को डराते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं। पुलिस या अन्य कोई सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल, वॉट्सएप या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है।

सीएम योगी ने कहा कि सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर भी सावधान रहना होगा। आप जो तस्वीरें, वीडियो, या लोकेशन सार्वजनिक करते हैं, उनके माध्यम से अपराधी पहले आपके बारे में सूचनाएँ जुटाते हैं और इन्हीं सूचनाओं का प्रयोग आपके खिलाफ करते हैं। अपनी व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। सावधानी के बाद भी यदि आपके साथ साइबर अपराध हो जाता है, तो सर्वप्रथम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करें। जितना शीघ्र आप पुलिस को सूचित करेंगे, बचाव की संभावना भी उतनी ही अधिक होगी। जागरूक बनें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को। आइए, हम सब मिलकर एक सुरक्षित और साइबर अपराध-मुक्त उत्तर प्रदेश का निर्माण करें।

योगी सरकार के निर्देश पर यूपी पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के संबंध में आम जनता को जागरूक करने के लिए एक लघु फिल्म जारी की है। इस लघु फिल्म में मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर ने अभिनय किया है। लघु फिल्म को मात्र चार दिनों में यूट्यूब पर लगभग 10 लाख 42 हजार लोगों ने देखा है, जबकि सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर करीब 1 लाख 26 हजार व्यूज मिले हैं। इंस्टाग्राम पर इसे लगभग 42 हजार लोगों ने देखा है, वहीं फेसबुक पर यह संख्या 20 हजार से अधिक रही।

इसके अतिरिक्त व्हाट्सएप चैनल और डिजिटल वॉलंटियर ग्रुप्स के माध्यम से भी लगभग 5 लाख लोगों तक संदेश पहुँच चुका है। ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि साइबर सुरक्षा से जुड़ा यह विषय आम जनता के लिए कितना महत्वपूर्ण बन चुका है। यह योगी सरकार की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है कि वह प्रदेशवासियों की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित करने के लिए कितने संवेदनशील हैं।

Point of View

NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

डिजिटल अरेस्ट क्या है?
डिजिटल अरेस्ट एक भ्रामक शब्द है, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है। यह साइबर ठगों द्वारा नागरिकों को डराने के लिए प्रयोग किया जाता है।
अगर मुझे साइबर अपराध का शिकार होना पड़े तो क्या करूँ?
अगर आप साइबर अपराध का शिकार होते हैं, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और पुलिस को सूचित करें।
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