आगरा एक्सप्रेसवे पर 250 किमी पीछा: दिल्ली पुलिस ने दो अंतरराज्यीय वाहन चोरों को दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 19 अक्टूबर 2026 को एक सघन अभियान में आगरा एक्सप्रेसवे पर करीब 250 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद दो कथित अंतरराज्यीय वाहन चोरों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से एक चोरी का टाटा ऐस मिनी ट्रक और चार मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं, जो दिल्ली के विभिन्न थानों में दर्ज ई-एफआईआर और एफआईआर से जुड़ी बताई जा रही हैं।
मामले का घटनाक्रम
16 अक्टूबर 2026 को ओखला इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस स्टेशन को पीसीआर कॉल के ज़रिए टाटा मिनी ट्रक की चोरी की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल ई-एफआईआर दर्ज की और जाँच शुरू कर दी। दक्षिण-पूर्वी जिले के एडिशनल डीसीपी-1 उत्कर्षा के अनुसार, चोरी के मामले की जाँच के लिए ओखला पुलिस पोस्ट के प्रभारी सब-इंस्पेक्टर चंद्रवीर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।
इस टीम में एएसआई विकुल, हेड कांस्टेबल कृष्ण, हेड कांस्टेबल हरीश, हेड कांस्टेबल करमवीर और कांस्टेबल धर्मेंद्र शामिल थे। टीम एसीपी सरिता विहार के मार्गदर्शन में कार्रवाई कर रही थी।
जीपीएस और सीसीटीवी से मिला सुराग
पुलिस टीम ने चोरी के वाहन की जीपीएस लोकेशन का पता लगाने के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज खंगालनी शुरू की। वाहन की आवाजाही का विस्तृत क्रम तैयार करने के लिए टोल प्लाजा के रिकॉर्ड और फुटेज का भी सत्यापन किया गया। इन सभी सूचनाओं को जोड़कर टीम ने वाहन का पीछा करते हुए दिल्ली से करीब 250 किलोमीटर दूर आगरा तक का सफर तय किया। वहाँ पुलिस ने चोरी के मिनी ट्रक को रोककर उसमें सवार लोगों को धर दबोचा।
आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार दोनों आरोपियों की पहचान शहबाज और जुबेर के रूप में हुई है। दोनों मूल रूप से झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले बताए गए हैं और घटना के समय ओखला में अस्थायी रूप से रह रहे थे। यह तथ्य इस मामले को अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण बनाता है।
बरामद वाहन और संबंधित मामले
बरामद चार मोटरसाइकिलों में से तीन दिल्ली के तीन अलग-अलग थानों में दर्ज ई-एफआईआर से संबंधित हैं, जबकि एक मोटरसाइकिल का संबंध उत्तर-पूर्वी दिल्ली के वेलकम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से है। यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी में वाहन चोरी के मामलों में कथित तौर पर अंतरराज्यीय गिरोहों की संलिप्तता की आशंका पहले से जताई जाती रही है।
आगे की जाँच
अधिकारियों के अनुसार, जाँच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपी अन्य किन वारदातों में शामिल रहे हैं और चोरी किए गए वाहनों को कहाँ बेचा जाता था। पुलिस यह भी जाँच कर रही है कि इस गतिविधि में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। चोरी के संभावित ठिकानों और आपूर्ति श्रृंखला की पड़ताल जारी है।