क्या दिल्ली पुलिस ने 25 साल बाद पत्नी की हत्या करने वाले को पकड़ा?

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क्या दिल्ली पुलिस ने 25 साल बाद पत्नी की हत्या करने वाले को पकड़ा?

सारांश

दिल्ली पुलिस ने एक हत्यारे को 25 वर्षों बाद गिरफ्तार किया है। योगिंदर ने 1992 में अपनी पत्नी की हत्या की थी और फिर फरार हो गया था। इस मामले में कई घटनाएं हुईं जो उसके गिरफ्तारी की ओर ले गईं। जानें इस चौंकाने वाली कहानी के पीछे का सच।

Key Takeaways

  • 25 साल बाद एक हत्यारे की गिरफ्तारी
  • नई पहचान बनाकर भागने का प्रयास
  • पुलिस की तकनीकी जांच की सफलता
  • अपराधियों के लिए कानून का कोई समय नहीं
  • सही जानकारी से मिली गिरफ्तारी

नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक हत्या के आरोपी को 25 वर्षों बाद गिरफ्तार किया है। योगिंदर उर्फ जोगिंदर सिंह ने 1992 में अपनी पत्नी की गला घोंटकर हत्या की थी। इसके बाद वह फरार हो गया और एक नई पहचान बनाकर छिपता रहा।

अब 58 वर्ष की उम्र में उसे पंजाब के लुधियाना से पकड़ लिया गया है। यह मामला 15 मार्च 1992 का है। दिल्ली के पिल्लांजी गांव में योगिंदर ने अपनी पत्नी की हत्या की और भागने की कोशिश की। भागते समय मकान मालिक के भाई ने उसका पीछा करके उसे पकड़ लिया था। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर देखा कि महिला का शव घर के भीतर गद्दे पर पड़ा था। मृतका की बाईं आंख के पास चोट के निशान थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि महिला की मौत गला घोंटने से हुई थी और शरीर पर मौजूद सभी चोटें मृत्यु से पहले की थीं।

इस मामले में सरोजिनी नगर थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। वर्ष 1997 में पटियाला हाउस कोर्ट ने योगिंदर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। साल 2000 में दिल्ली हाई कोर्ट ने योगिंदर को चार सप्ताह की पैरोल दी, लेकिन वह तय समय पर जेल वापस नहीं लौटा। अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया, जिसके बाद वह लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा।

क्राइम ब्रांच की टीम को पैरोल जंप करने वालों पर नजर रखने का जिम्मा मिला। हेड कांस्टेबल मिंटू यादव को गुप्त सूचना मिली कि योगिंदर लुधियाना में छिपा है। टीम ने तकनीकी जांच और मानव स्रोतों की मदद से उसका पता लगाया। मुजफ्फरनगर और लुधियाना में पांच सौ से ज्यादा लोगों की जांच की गई। पता चला कि उसने नाम बदलकर जोगिंदर सिंह रख लिया और पिता का नाम भी जय प्रकाश से जयपाल कर दिया। नई पहचान से आधार कार्ड और वोटर आईडी बनवा ली।

एसीपी संजय कुमार नागपाल की निगरानी में इंस्पेक्टर मंगेश त्यागी और रोबिन त्यागी की टीम ने कार्रवाई की। रेडिंग टीम दस दिन से ज्यादा लुधियाना में रुकी। आरोपी वहां बढ़ई का काम कर रहा था। 5 जनवरी 2026 को रेड की गई। पुलिस देखकर वह मोटरसाइकिल पर भागा लेकिन पीछा करने पर पकड़ा गया।

पूछताछ में योगिंदर ने बताया कि पैरोल के बाद वह हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और कर्नाटक घूमता रहा। हर जगह दो-तीन साल रहकर भागता रहा। आखिर 2012 में लुधियाना में बस गया और एक नई जिंदगी शुरू की।

Point of View

एक आरोपी को उसके अपराध के लिए सजा मिलना एक महत्वपूर्ण कदम है। हमें एक मजबूत कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है जो ऐसे मामलों को समय पर सुलझा सके।
NationPress
08/01/2026

Frequently Asked Questions

योगिंदर ने अपनी पत्नी की हत्या क्यों की?
आरोपी ने व्यक्तिगत कारणों से अपनी पत्नी की हत्या की, लेकिन अदालत में इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
योगिंदर की पहचान कैसे बदली गई?
योगिंदर ने अपना नाम बदलकर जोगिंदर सिंह रख लिया था और पिता का नाम भी बदल दिया था।
योगिंदर को कितनी सजा मिली?
उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
पुलिस ने योगिंदर को कैसे पकड़ा?
क्राइम ब्रांच की टीम ने तकनीकी जांच के माध्यम से और गुप्त सूचना के आधार पर उसे लुधियाना में पकड़ा।
क्या योगिंदर ने अपने फरार होने के दौरान किसी और अपराध को अंजाम दिया?
इस विषय पर कोई जानकारी नहीं है, लेकिन वह कई वर्षों तक फरार रहा।
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