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क्या हम प्रदूषण से लड़कर इसे समाप्त कर सकते हैं? दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा

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क्या हम प्रदूषण से लड़कर इसे समाप्त कर सकते हैं? दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा

सारांश

क्या दिल्ली प्रदूषण से मुक्ति पा सकेगी? पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने विधानसभा में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं का उल्लेख किया। आइए जानते हैं उनकी योजनाओं और पिछले प्रयासों की विफलताओं के बारे में।

मुख्य बातें

दिल्ली प्रदूषण के खिलाफ ठोस कदम उठा रही है।
पिछली सरकारों की नीतियों की विफलता को स्वीकार किया गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में नई योजनाएं लागू की जा रही हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य है।
हरित क्षेत्र के विकास पर जोर दिया जा रहा है।

नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने विधानसभा में प्रदूषण के मुद्दे पर पिछली और वर्तमान सरकारों की योजनाओं का एक विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1984–85 में एमसी मेहता बनाम भारत सरकार मामले से लेकर सुप्रीम कोर्ट के सीएनजी आदेश, औद्योगिक रिलोकेशन और वाहन प्रदूषण मानकों तक कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, लेकिन 2014 के बाद दिल्ली की स्थिति में लगातार गिरावट आई।

उन्होंने बताया कि 2014 से 2025 तक दिल्ली को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और आईक्यूएयर जैसी संस्थाओं ने लगातार सबसे प्रदूषित राजधानी के रूप में पहचाना, जो आम आदमी पार्टी सरकार की पूर्ण असफलता को दर्शाता है। मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और एनजीटी की कई गंभीर टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालतों ने दिल्ली को “गैस चैंबर” और “रहने योग्य नहीं” कहा, फिर भी तत्कालीन सरकार ने कोई ठोस सुधार नहीं किया।

सिरसा ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि ऑड-ईवन योजना असफल रही, पीयूसी प्रणाली कमजोर पाई गई, और एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम भी निर्धारित गाइडलाइंस के अनुसार नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के धन से स्मॉग टावर, ऑड-ईवन और अन्य अभियानों पर भारी प्रचार किया गया, लेकिन वास्तविक परिणाम शून्य रहे।

वहीं, मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में मौजूदा सरकार ने प्रदूषण के खिलाफ “एक्शन मोड” अपनाया। तीनों लैंडफिल साइट्स—ओखला, भलस्वा और गाजीपुर—पर बायोमाइनिंग के जरिए हर महीने हजारों मीट्रिक टन कूड़ा हटाया जा रहा है और 45 एकड़ जमीन पुनः प्राप्त की जा चुकी है। एमसीडी को ठोस कचरा प्रबंधन के लिए विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।

डस्ट मिटिगेशन के लिए सड़कों की एंड-टू-एंड कार्पेटिंग, एंटी-स्मॉग गन, वाटर स्प्रिंकलर, मैकेनिकल रोड स्वीपर्स और सख्त रोड कटिंग नीति लागू की गई है। निर्माण स्थलों और औद्योगिक क्षेत्रों में कड़ी निगरानी, भारी जुर्माने और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है।

वाहन प्रदूषण के संदर्भ में मंत्री ने बताया कि ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नीति लागू की गई है, फर्जी पीयूसी केंद्र बंद किए गए हैं और इलेक्ट्रिक बसों का देश का सबसे बड़ा बेड़ा तैयार किया जा रहा है। 2026 तक 7500 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर होंगी, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी।

हरित दिल्ली के लक्ष्य की दिशा में बढ़ते हुए 1994 के बाद पहली बार 10,000 एकड़ से अधिक भूमि को रिजर्व फॉरेस्ट घोषित किया गया है। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत लाखों पौधे लगाए गए हैं और भविष्य में नए शहरी जंगल विकसित किए जा रहे हैं।

संस्थागत सुधारों के तहत विशेषज्ञ समितियों का गठन, डीपीसीसी में लंबित भर्तियों की पूर्ति और आधुनिक तकनीकी समाधानों को अपनाया गया है। मंत्री ने कहा कि इन ठोस कदमों का प्रभाव एयर क्वालिटी इंडेक्स और ‘सैटिस्फैक्टरी डेज’ की संख्या में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

अपने संबोधन का समापन करते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार प्रदूषण के खिलाफ केवल बयानबाजी नहीं कर रही, बल्कि ठोस और दीर्घकालिक समाधान लागू कर रही है। उन्होंने दोहराया कि दिल्ली अब रुकेगी नहीं, बल्कि समन्वय और ठोस नीति के साथ स्वच्छ हवा की ओर तेजी से आगे बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझना होगा कि दिल्ली की प्रदूषण समस्या केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह नागरिक स्वास्थ्य और पर्यावरण का भी मामला है। सभी राजनीतिक दलों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए, ताकि दिल्ली के नागरिकों को स्वच्छ हवा मिल सके।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति क्या है?
दिल्ली को पिछले कुछ वर्षों से विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सबसे प्रदूषित राजधानी के रूप में चिन्हित किया गया है।
क्या सरकार ने प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं?
हां, सरकार ने कई योजनाएं जैसे ऑड-ईवन, इलेक्ट्रिक बसें, और बायोमाइनिंग लागू की हैं।
क्या पहले की योजनाएं सफल रहीं?
पहले की योजनाएं जैसे ऑड-ईवन और पीयूसी प्रणाली अधिकतर असफल रहीं।
सरकार की मौजूदा योजनाएं क्या हैं?
सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त नीतियां और योजनाएं बनाई हैं, जिनमें ठोस कचरा प्रबंधन और डस्ट मिटिगेशन शामिल हैं।
दिल्ली में हरित क्षेत्र के विकास के लिए क्या किया जा रहा है?
दिल्ली सरकार ने 10,000 एकड़ भूमि को रिजर्व फॉरेस्ट घोषित किया है और लाखों पौधे लगाने का अभियान शुरू किया है।
राष्ट्र प्रेस
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