कुरनूल में देवरागाट्टू बन्नी उत्सव: लाठी युद्ध में 1 की मौत, 100 से अधिक घायल
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के देवरागाट्टू गांव में 22 अक्टूबर 2026 को दशहरा की रात आयोजित पारंपरिक 'देवरागाट्टू बन्नी उत्सव' के दौरान लाठी युद्ध में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हो गए। मृतक की पहचान अलूर निवासी 28 वर्षीय पोताराजू के रूप में हुई है। होलगोंडा मंडल के इस गांव में हर वर्ष यह आयोजन विजयदशमी की रात होता है, और इस बार भी 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के बावजूद लड़ाई को नहीं रोका जा सका।
मुख्य घटनाक्रम
बुधवार देर रात माला मल्लेश्वर स्वामी मंदिर की पहाड़ी पर दो गुट आमने-सामने आए। आधी रात को देवी मल्लम्मा और मल्लेश्वर स्वामी के प्रतीकात्मक विवाह संपन्न होने के बाद, दोनों पक्षों ने देवी-देवताओं की मूर्तियों पर अपना अधिकार जमाने के लिए एक-दूसरे पर बेरहमी से लाठियाँ बरसाईं। घायलों को अडोनी और अलूर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 10 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। मामूली चोट वाले लोगों का उपचार प्रशासन द्वारा स्थापित एक अस्थायी चिकित्सा केंद्र में किया गया।
परंपरा का धार्मिक आधार
ग्रामीणों की मान्यता है कि भगवान शिव ने भैरव का रूप धारण कर मणि और मल्लासुर नामक दो राक्षसों को लाठियों से पराजित किया था। विजयदशमी के दिन ग्रामीण इसी पौराणिक घटना को पुनः दोहराते हैं — एक गुट 'राक्षस पक्ष' और दूसरा 'देवता पक्ष' बनकर मूर्तियों पर अधिकार के लिए लड़ता है। नेरानी, नेरानी टांडा और कोथापेटा गांवों के लोग एक ओर हैं, जबकि अरिकेरा, अलूरू, सुलुवई, एलार्थी, निद्रावत्ती और बिलेहाल गांवों के भक्त दूसरी ओर। गौरतलब है कि भक्त इस लड़ाई में लगी चोटों को शुभ मानते हैं।
पुलिस और प्रशासन की विफलता
प्रशासन की ओर से इस आयोजन को रोकने के सभी प्रयास इस वर्ष भी नाकाम रहे। इस बार 1,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, फिर भी ग्रामीणों ने पुलिस के आदेशों को दरकिनार कर लड़ाई को अंजाम दिया। यह ऐसे समय में आया है जब प्रशासन हर वर्ष बेहतर व्यवस्था का दावा करता है, लेकिन परिणाम अपरिवर्तित रहते हैं।
आम जनता पर असर और भीड़
इस पारंपरिक आयोजन को देखने के लिए कुरनूल के अलावा आसपास के जिलों, तेलंगाना और कर्नाटक से भी हज़ारों लोग देवरागाट्टू पहुँचते हैं। बड़ी भीड़ और लाठियों के प्रहार से हर वर्ष घायलों की संख्या दर्जनों में होती है — और इस वर्ष यह आँकड़ा 100 से पार चला गया। विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों की ओर से इस आयोजन की नियमित समीक्षा की माँग उठती रही है।
क्या होगा आगे
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, घटना की जाँच की जा रही है और गंभीर रूप से घायल 10 लोगों की निगरानी जारी है। यह घटना एक बार फिर इस प्रश्न को उठाती है कि क्या परंपरा और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए कोई स्थायी नीतिगत ढाँचा तैयार किया जाएगा।