22 अक्टूबर 2026
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कुरनूल में देवरागाट्टू बन्नी उत्सव: लाठी युद्ध में 1 की मौत, 100 से अधिक घायल

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कुरनूल में देवरागाट्टू बन्नी उत्सव: लाठी युद्ध में 1 की मौत, 100 से अधिक घायल

सारांश

दशहरा की रात कुरनूल के देवरागाट्टू में एक बार फिर खून बहा — 28 वर्षीय पोताराजू की जान गई, 100 से अधिक घायल हुए। 1,000 पुलिसकर्मी भी इस सदियों पुरानी लाठी-परंपरा को नहीं रोक सके। परंपरा और सुरक्षा का यह टकराव हर साल नई बहस छेड़ता है।

मुख्य बातें

22 अक्टूबर 2026 की रात कुरनूल के देवरागाट्टू गांव में बन्नी उत्सव के दौरान लाठी युद्ध में 1 व्यक्ति की मौत , 100 से अधिक घायल ।
मृतक की पहचान अलूर के 28 वर्षीय पोताराजू के रूप में हुई।
घायलों में 10 लोगों की हालत गंभीर ; उन्हें अडोनी और अलूर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
इस वर्ष 1,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे, फिर भी आयोजन नहीं रुका।
कुरनूल, तेलंगाना और कर्नाटक से हज़ारों लोग इस पारंपरिक उत्सव में शामिल होते हैं।

आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के देवरागाट्टू गांव में 22 अक्टूबर 2026 को दशहरा की रात आयोजित पारंपरिक 'देवरागाट्टू बन्नी उत्सव' के दौरान लाठी युद्ध में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हो गए। मृतक की पहचान अलूर निवासी 28 वर्षीय पोताराजू के रूप में हुई है। होलगोंडा मंडल के इस गांव में हर वर्ष यह आयोजन विजयदशमी की रात होता है, और इस बार भी 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के बावजूद लड़ाई को नहीं रोका जा सका।

मुख्य घटनाक्रम

बुधवार देर रात माला मल्लेश्वर स्वामी मंदिर की पहाड़ी पर दो गुट आमने-सामने आए। आधी रात को देवी मल्लम्मा और मल्लेश्वर स्वामी के प्रतीकात्मक विवाह संपन्न होने के बाद, दोनों पक्षों ने देवी-देवताओं की मूर्तियों पर अपना अधिकार जमाने के लिए एक-दूसरे पर बेरहमी से लाठियाँ बरसाईं। घायलों को अडोनी और अलूर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 10 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। मामूली चोट वाले लोगों का उपचार प्रशासन द्वारा स्थापित एक अस्थायी चिकित्सा केंद्र में किया गया।

परंपरा का धार्मिक आधार

ग्रामीणों की मान्यता है कि भगवान शिव ने भैरव का रूप धारण कर मणि और मल्लासुर नामक दो राक्षसों को लाठियों से पराजित किया था। विजयदशमी के दिन ग्रामीण इसी पौराणिक घटना को पुनः दोहराते हैं — एक गुट 'राक्षस पक्ष' और दूसरा 'देवता पक्ष' बनकर मूर्तियों पर अधिकार के लिए लड़ता है। नेरानी, नेरानी टांडा और कोथापेटा गांवों के लोग एक ओर हैं, जबकि अरिकेरा, अलूरू, सुलुवई, एलार्थी, निद्रावत्ती और बिलेहाल गांवों के भक्त दूसरी ओर। गौरतलब है कि भक्त इस लड़ाई में लगी चोटों को शुभ मानते हैं।

पुलिस और प्रशासन की विफलता

प्रशासन की ओर से इस आयोजन को रोकने के सभी प्रयास इस वर्ष भी नाकाम रहे। इस बार 1,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, फिर भी ग्रामीणों ने पुलिस के आदेशों को दरकिनार कर लड़ाई को अंजाम दिया। यह ऐसे समय में आया है जब प्रशासन हर वर्ष बेहतर व्यवस्था का दावा करता है, लेकिन परिणाम अपरिवर्तित रहते हैं।

आम जनता पर असर और भीड़

इस पारंपरिक आयोजन को देखने के लिए कुरनूल के अलावा आसपास के जिलों, तेलंगाना और कर्नाटक से भी हज़ारों लोग देवरागाट्टू पहुँचते हैं। बड़ी भीड़ और लाठियों के प्रहार से हर वर्ष घायलों की संख्या दर्जनों में होती है — और इस वर्ष यह आँकड़ा 100 से पार चला गया। विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों की ओर से इस आयोजन की नियमित समीक्षा की माँग उठती रही है।

क्या होगा आगे

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, घटना की जाँच की जा रही है और गंभीर रूप से घायल 10 लोगों की निगरानी जारी है। यह घटना एक बार फिर इस प्रश्न को उठाती है कि क्या परंपरा और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए कोई स्थायी नीतिगत ढाँचा तैयार किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 पुलिसकर्मी तैनात करना और फिर वही परिणाम देखना यह बताता है कि मौजूदा ढाँचा न निवारक है, न पर्याप्त। असली प्रश्न यह है कि क्या राज्य सरकार परंपरा और जीवन-रक्षा के बीच कोई मध्यमार्ग निकालने की इच्छाशक्ति रखती है — जैसे कि सुरक्षित क्षेत्र, चिकित्सा पूर्व-तैनाती, या सहमति-आधारित नियम — या यह चक्र अगले दशक भी जारी रहेगा। मृतक पोताराजू की उम्र 28 वर्ष थी; यह आँकड़ा किसी भी 'शुभ परंपरा' के दावे पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवरागाट्टू बन्नी उत्सव क्या है?
यह आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के देवरागाट्टू गांव में हर वर्ष विजयदशमी की रात माला मल्लेश्वर स्वामी मंदिर की पहाड़ी पर आयोजित होने वाला पारंपरिक लाठी युद्ध उत्सव है। इसमें विभिन्न गांवों के दो गुट देवी-देवताओं की मूर्तियों पर अधिकार के लिए लाठियों से लड़ते हैं, जिसे भक्त एक धार्मिक परंपरा मानते हैं।
इस वर्ष के बन्नी उत्सव में कितने लोग हताहत हुए?
22 अक्टूबर 2026 की रात के इस आयोजन में अलूर के 28 वर्षीय पोताराजू की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए। घायलों में से 10 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें अडोनी और अलूर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
पुलिस इस लड़ाई को रोकने में क्यों नाकाम रही?
इस वर्ष 1,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन ग्रामीणों ने प्रशासनिक आदेशों को दरकिनार कर आयोजन किया। ग्रामीणों का तर्क है कि यह उनकी सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है, जिसे वे हर वर्ष करते आए हैं।
इस उत्सव का धार्मिक आधार क्या है?
ग्रामीणों की मान्यता है कि भगवान शिव ने भैरव रूप में मणि और मल्लासुर नामक राक्षसों को लाठियों से पराजित किया था। विजयदशमी पर दो गुट — 'राक्षस पक्ष' और 'देवता पक्ष' — इसी पौराणिक घटना को दोहराते हुए देवी मल्लम्मा और मल्लेश्वर स्वामी की मूर्तियों पर अधिकार के लिए लड़ते हैं।
क्या यह घटना पहली बार हुई है या पहले भी ऐसा होता रहा है?
यह आयोजन प्रतिवर्ष होता है और हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं। प्रशासन हर साल इसे रोकने की कोशिश करता है, लेकिन अब तक सफल नहीं हो पाया है। इस वर्ष घायलों की संख्या 100 से अधिक रही, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है।
राष्ट्र प्रेस
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