नीलगिरि भूस्खलन: बस चालक की मौत, ऊटी में NDRF की दो टीमें तैनात, पर्यटन स्थल बंद
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में 24 अक्टूबर को लगातार हो रही भारी बारिश के चलते कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएँ सामने आईं, जिनमें एक सरकारी बस चालक की मौत हो गई और कंडक्टर गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की दो टीमें ऊटी में तैनात की गई हैं और जिले में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
ऊटी-मेट्टूपालयम मार्ग पर तीन स्थानों पर भूस्खलन दर्ज किया गया। इस दौरान एक सरकारी बस मलबे में फँस गई, जिससे चालक की मौके पर ही मृत्यु हो गई। घायल कंडक्टर को बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसने बाद में बताया कि भूस्खलन इतनी तेज़ी से आया कि बचने का मौका ही नहीं मिला।
पारलियार क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में 25 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई — जो इस मौसम में इस क्षेत्र के लिए असाधारण रूप से अधिक है। भारी बारिश के कारण पारलियार में कई पेड़ उखड़ गए, जिससे पहाड़ी मार्गों पर यातायात और अधिक बाधित हुआ।
NDRF की तैनाती और राहत कार्य
तमिलनाडु आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुरोध पर NDRF की चौथी बटालियन की दो टीमों को ऊटी में एहतियाती उपायों और राहत-बचाव कार्यों के लिए भेजा गया है। प्रशासन की टीमें भारी मशीनों की सहायता से सड़कों पर जमा मिट्टी, चट्टानों और गिरे हुए पेड़ों को हटाने में जुटी हैं।
जिला कलेक्टर लक्ष्मी भव्या तन्नीरु ने स्वयं भूस्खलन प्रभावित कुनूर-मेट्टूपालयम मार्ग का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया और राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने पर्यटकों से अगले तीन दिनों तक नीलगिरि की यात्रा टालने की अपील की है।
अन्य क्षेत्रों में नुकसान
ऊटी के थीट्टुकल इलाके में एक सहायक दीवार (रिटेनिंग वॉल) ढह जाने से दो कारें और छह दोपहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। सीसीटीवी फुटेज में एक सुरक्षा गार्ड को दीवार गिरने से बाल-बाल बचते देखा गया।
कोटागिरि-कोनावक्काराई मार्ग पर एक विशाल पेड़ गिरने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। अग्निशमन एवं बचाव सेवा के कर्मचारियों ने पेड़ को काटकर सड़क को साफ किया। कोटागिरि क्षेत्र में कोट्टाकंबाई नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे एक मकान के गिरने का खतरा भी पैदा हो गया है।
रेल और पर्यटन पर असर
भूस्खलन का प्रभाव नीलगिरि माउंटेन रेलवे सेवाओं पर भी पड़ा है, जिससे ऊटी तक पहुँचना और अधिक कठिन हो गया है। यह रेलवे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण है। जिला प्रशासन ने सभी पर्यटन स्थलों को अगली सूचना तक बंद रखने का आदेश दिया है।
गौरतलब है कि नीलगिरि जिला हर मानसून में भूस्खलन की चपेट में आता है और यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से संवेदनशील माना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु के कई हिस्सों में उत्तर-पूर्वी मानसून सक्रिय है।
क्या होगा आगे
जिला कलेक्टर ने स्थानीय लोगों को भी अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है, क्योंकि राहत और सफाई कार्य जारी हैं तथा आगे भी भूस्खलन और यातायात बाधित होने की आशंका बनी हुई है। NDRF की टीमें अगले कुछ दिनों तक तैनात रहेंगी और स्थिति पर निरंतर नज़र रखी जा रही है।