26 अक्टूबर 2026
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नीलगिरि में भारी बारिश: मोयार नदी में बाढ़ से थेनगुमाराहाडा गांव का संपर्क टूटा, 24 घंटे में 60 से अधिक भूस्खलन

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नीलगिरि में भारी बारिश: मोयार नदी में बाढ़ से थेनगुमाराहाडा गांव का संपर्क टूटा, 24 घंटे में 60 से अधिक भूस्खलन

सारांश

नीलगिरि में मोयार नदी खतरे के निशान से ऊपर बही और थेनगुमाराहाडा गांव बाहरी दुनिया से कट गया। 24 घंटे में 60 से अधिक भूस्खलन, एक सरकारी बस चालक की जान गई और नीलगिरि माउंटेन रेलवे का परिचालन ठप हुआ। पहाड़ी जिले में बारिश का संकट गहराता जा रहा है।

मुख्य बातें

नीलगिरि जिले के थेनगुमाराहाडा गांव का 26 अक्टूबर 2026 को मोयार नदी में बाढ़ आने से बाहरी दुनिया से संपर्क टूट गया।
पिछले 24 घंटों में जिले में 60 से अधिक भूस्खलन की घटनाएँ दर्ज की गई हैं।
मेट्टुपलयम-कुन्नूर पहाड़ी सड़क पर परालियार के पास भूस्खलन में 51 वर्षीय बस चालक जनगराज की मौत हुई।
नीलगिरि माउंटेन रेलवे के कुन्नूर-मेट्टुपलयम सेक्शन पर ट्रेन परिचालन अस्थायी रूप से बंद।
वाहनों को कोटागिरी के वैकल्पिक मार्ग से भेजा जा रहा है; राहत के लिए 1077 या 0423-2450024 पर संपर्क करें।

तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में 26 अक्टूबर 2026 को भारी बारिश के कारण मोयार नदी में आई बाढ़ ने थेनगुमाराहाडा गांव के निवासियों को बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट दिया है। नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे भोजन, दवाएँ और अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। पिछले 24 घंटों में जिले में 60 से अधिक भूस्खलन की घटनाएँ दर्ज की गई हैं।

थेनगुमाराहाडा गांव की स्थिति

सत्यमंगलम और मुदुमलाई टाइगर रिजर्व के निकट, कोटागिरी तालुक के घने जंगलों में बसा थेनगुमाराहाडा एक दूरदराज की बस्ती है। यहाँ के निवासियों को बाहर जाने के लिए मोयार नदी पार करनी पड़ती है, जो अभी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नदी का तेज बहाव सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाले रास्ते से पार करना जानलेवा बना रहा है, जिसके चलते नदी पार करने की सुविधा पूरी तरह बंद कर दी गई है।

प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, गांव में ऐसे लोग हैं जो नियमित दवाइयों और अन्य चिकित्सा सुविधाओं के लिए बाहरी सेवाओं पर निर्भर हैं। उनके लिए यह रुकावट विशेष रूप से चिंताजनक है।

मुख्य घटनाक्रम: भूस्खलन और मृत्यु

लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पिछले 24 घंटों में नीलगिरि जिले में 60 से अधिक भूस्खलन की घटनाएँ सामने आई हैं — इनमें छोटी मिट्टी खिसकने से लेकर बड़े पैमाने पर ढलान ढहने तक के मामले शामिल हैं। एक दुखद घटना में, शुक्रवार को मेट्टुपलयम-कुन्नूर पहाड़ी सड़क पर परालियार के निकट एक बड़े भूस्खलन की चपेट में आने से 51 वर्षीय सरकारी बस चालक जनगराज की मौत हो गई।

यह ऐसे समय में आया है जब नीलगिरि में भूस्खलन की संवेदनशीलता लंबे समय से चिंता का विषय रही है। 2021 में भी इसी क्षेत्र में भारी बारिश के कारण कई भूस्खलन हुए थे और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था।

नीलगिरि माउंटेन रेलवे प्रभावित

कई स्थानों पर हुए भूस्खलन के कारण नीलगिरि माउंटेन रेलवे भी प्रभावित हुआ है। कुन्नूर-मेट्टुपलयम सेक्शन पर ट्रेनों का परिचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है, क्योंकि रास्ते में मलबा जमा हो गया है। गौरतलब है कि यह रेलमार्ग यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों के लिए भी महत्वपूर्ण परिवहन माध्यम है।

जब तक मेट्टुपलयम-कुन्नूर सड़क से मलबा नहीं हटाया जाता, उस मार्ग से गुजरने वाले सभी वाहनों को कोटागिरी के रास्ते मोड़ा जा रहा है। इससे पहाड़ी इलाकों में आवाजाही और भी जटिल हो गई है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और राहत कार्य

जिला प्रशासन और फायर एंड रेस्क्यू सर्विस के दल प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्य में जुटे हैं। भूस्खलन से बंद हुई सड़कों से मिट्टी और मलबा हटाने का अभियान जारी है।

जिला कलेक्टर ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि जब तक हालात सामान्य नहीं होते, पहाड़ी सड़कों पर अनावश्यक यात्रा न करें। आपातकालीन सहायता के लिए नीलगिरि जिला नियंत्रण कक्ष से 1077 या 0423-2450024 पर संपर्क किया जा सकता है।

आगे क्या

बारिश का सिलसिला जारी रहने की आशंका के बीच थेनगुमाराहाडा गांव के निवासियों का संपर्क कब बहाल होगा, यह मोयार नदी के जलस्तर में गिरावट पर निर्भर करेगा। जिला प्रशासन स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और अधिकारियों के अनुसार ज़रूरत पड़ने पर आपातकालीन आपूर्ति पहुँचाने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नीति-नियोजन की विफलता भी है। नीलगिरि में हर मानसून इसी तरह की घटनाएँ दोहराई जाती हैं, फिर भी वैकल्पिक संपर्क मार्गों और आपदा-पूर्व तैयारी पर ठोस कदम नहीं उठाए गए। जब तक भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों में स्थायी राहत तंत्र नहीं बनाया जाता, ये संकट हर साल नई सुर्खियाँ बनाते रहेंगे।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थेनगुमाराहाडा गांव का संपर्क क्यों टूटा?
भारी बारिश के कारण मोयार नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे नदी पार करने के सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं। यह गांव कोटागिरी तालुक के घने जंगलों में स्थित है और बाहर जाने के लिए नदी पार करना अनिवार्य है।
नीलगिरि में कितने भूस्खलन हुए हैं?
पिछले 24 घंटों में नीलगिरि जिले में 60 से अधिक भूस्खलन की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इनमें छोटी मिट्टी खिसकने से लेकर बड़े पैमाने पर ढलान ढहने तक के मामले शामिल हैं।
नीलगिरि माउंटेन रेलवे पर क्या असर पड़ा है?
कुन्नूर-मेट्टुपलयम सेक्शन पर भूस्खलन के कारण मलबा जमा होने से ट्रेन परिचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। सड़क मार्ग पर भी वाहनों को कोटागिरी के वैकल्पिक रास्ते से भेजा जा रहा है।
बस चालक जनगराज की मौत कैसे हुई?
शुक्रवार को मेट्टुपलयम-कुन्नूर पहाड़ी सड़क पर परालियार के पास एक बड़े भूस्खलन की चपेट में आने से 51 वर्षीय सरकारी बस चालक जनगराज की मौत हो गई। यह घटना उजागर करती है कि लगातार बारिश में अस्थिर ढलान कितने जानलेवा हो सकते हैं।
नीलगिरि में आपातकालीन मदद के लिए कहाँ संपर्क करें?
नीलगिरि जिला नियंत्रण कक्ष से 1077 या 0423-2450024 पर संपर्क किया जा सकता है। जिला कलेक्टर ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अनावश्यक पहाड़ी यात्रा से बचने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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