नीलगिरि भूस्खलन: पार्लियार के पास सरकारी बस मलबे में दबी, ड्राइवर जनगराज की मौत, 50 यात्री सुरक्षित
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में पार्लियार के समीप 24 अक्टूबर 2026 को एक भीषण भूस्खलन में कोयंबटूर-ऊटी मार्ग पर चल रही सरकारी बस मलबे में दब गई। टायर पंचर होने के कारण बस रुकी और तकरीबन 50 यात्रियों को पहले ही सुरक्षित उतार लिया गया था — उनके उतरने के कुछ ही मिनटों बाद पहाड़ी ढह पड़ी। बस चालक जनगराज वाहन में ही फँसे रहे और लंबे बचाव अभियान के बाद उनका शव मलबे से निकाला गया।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
बस कोयंबटूर से ऊटी जा रही थी जब पार्लियार के नज़दीक पहुँचने से कुछ देर पहले उसका टायर पंचर हो गया। चालक ने बस को सड़क किनारे रोका और सभी 50 यात्रियों को वाहन से उतार दिया गया। उतरे हुए यात्री अभी कुछ ही दूर गए थे कि पहाड़ी ढलान से पेड़, पत्थर और मिट्टी का भारी मलबा सड़क पर आ गिरा और बस को पूरी तरह चपेट में ले लिया।
कंडक्टर केशवन ने बताया, 'बस में सिर्फ मैं और ड्राइवर थे। पेड़ एक के बाद एक सड़क पर गिरने लगे। जब हमने बस को सुरक्षित रूप से रोकने की कोशिश की, तो हम भूस्खलन की चपेट में आ गए।'
बचाव अभियान और हताहत
सूचना मिलते ही अग्निशमन एवं बचाव सेवा की टीमें मौके पर पहुँचीं। घायल कंडक्टर केशवन को मलबे से सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुँचाया गया। चालक जनगराज के बारे में शुरुआती रिपोर्टों में उन्हें सुरक्षित बताया गया था, लेकिन लंबे अभियान के बाद बचाव दल ने स्पष्ट किया कि वे वाहन के अंदर ही फँसे रहे और उनका शव मलबे से बरामद किया गया। इस प्रकार एक व्यक्ति की जान जाने की पुष्टि हुई।
गौरतलब है कि यात्रियों का टायर पंचर की वजह से पहले ही उतार लिया जाना एक संयोग था जिसने 50 से अधिक लोगों की जान बचाई — अन्यथा यह हादसा और भी विनाशकारी हो सकता था।
सड़क पर यातायात और राहत कार्य
कोयंबटूर-ऊटी मार्ग पर भूस्खलन से गिरे पेड़ों, पत्थरों और मिट्टी को हटाने का काम तत्काल आधार पर शुरू किया गया। प्रशासन ने यातायात बहाल करने के लिए सफाई अभियान को प्राथमिकता दी। नीलगिरि जिले की पहाड़ी सड़कें मानसून के दौरान भूस्खलन के लिए अत्यंत संवेदनशील मानी जाती हैं।
क्षेत्र में भूस्खलन का इतिहास
यह ऐसे समय में आया है जब नीलगिरि और आसपास के पहाड़ी ज़िलों में मानसूनी बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएँ बढ़ी हुई हैं। तमिलनाडु के पश्चिमी घाट क्षेत्र में भूस्खलन की यह कोई पहली बड़ी घटना नहीं है — पिछले कुछ वर्षों में वायनाड और नीलगिरि दोनों जगहों पर ऐसी त्रासदियाँ दर्ज की जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक वर्षा और पहाड़ी ढलानों पर मानवीय दबाव इन हादसों की बारंबारता बढ़ा रहे हैं।
आगे की स्थिति
प्रशासन ने प्रभावित मार्ग पर वैकल्पिक व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने के संकेत दिए हैं। जनगराज के परिवार को सूचना दे दी गई है। आपदा प्रबंधन टीमें क्षेत्र में तैनात हैं और मौसम विभाग की चेतावनियों के मद्देनज़र सतर्कता जारी है।